झालावाड़-उज्जैन फोरलेन बाईपास का विरोध:मांग नहीं मानने पर ग्रामीणों और किसानों ने सामूहिक आंदोलन की दी चेतावनी
झालावाड़ जिले के रायपुर कस्बे में प्रस्तावित उज्जैन-झालावाड़ फोरलेन बाईपास सड़क के निर्माण को लेकर ग्रामीणों और किसानों ने विरोध जताया है। क्षेत्रवासियों ने इस संबंध में जिला कलेक्टर को एक ज्ञापन सौंपा है। ग्रामीणों की मांग है कि फोरलेन सड़क का निर्माण वर्तमान मार्ग पर ही किया जाए। उनका तर्क है कि यदि बाईपास सड़क को कृषि भूमि वाले क्षेत्र से निकाला जाता है, तो इससे किसानों की उपजाऊ जमीन नष्ट हो जाएगी। किसानों ने बताया कि रेलवे लाइन और अन्य परियोजनाओं के कारण उनकी कृषि भूमि पहले ही कम हो चुकी है। उनका मानना है कि बाईपास के निर्माण से खेती करना और भी मुश्किल हो जाएगा। रोजगार होगा प्रभावित क्षेत्रवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन उनकी मांगों पर ध्यान नहीं देता है, तो वे सामूहिक आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे। ग्रामीणों ने यह भी कहा कि बाईपास सड़क बनने से छोटे व्यापारियों और मजदूरों का रोजगार प्रभावित होगा, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक असर पड़ेगा। ज्ञापन में प्रशासन से अनुरोध किया गया है कि किसानों और ग्रामीणों की चिंताओं को ध्यान में रखते हुए फोरलेन सड़क को रायपुर कस्बे के मौजूदा क्षेत्र से ही निकाला जाए, ताकि कृषि भूमि और स्थानीय रोजगार सुरक्षित रह सकें।
झालावाड़ जिले के रायपुर कस्बे में प्रस्तावित उज्जैन-झालावाड़ फोरलेन बाईपास सड़क के निर्माण को लेकर ग्रामीणों और किसानों ने विरोध जताया है। क्षेत्रवासियों ने इस संबंध में जिला कलेक्टर को एक ज्ञापन सौंपा है।
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ग्रामीणों की मांग है कि फोरलेन सड़क का निर्माण वर्तमान मार्ग पर ही किया जाए। उनका तर्क है कि यदि बाईपास सड़क को कृषि भूमि वाले क्षेत्र से निकाला जाता है, तो इससे किसानों की उपजाऊ जमीन नष्ट हो जाएगी। किसानों ने बताया कि रेलवे लाइन और अन्य परियोजनाओं के कारण उनकी कृषि भूमि पहले ही कम हो चुकी है। उनका मानना है कि बाईपास के निर्माण से खेती करना और भी मुश्किल हो जाएगा।
रोजगार होगा प्रभावित क्षेत्रवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन उनकी मांगों पर ध्यान नहीं देता है, तो वे सामूहिक आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे। ग्रामीणों ने यह भी कहा कि बाईपास सड़क बनने से छोटे व्यापारियों और मजदूरों का रोजगार प्रभावित होगा, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक असर पड़ेगा।
ज्ञापन में प्रशासन से अनुरोध किया गया है कि किसानों और ग्रामीणों की चिंताओं को ध्यान में रखते हुए फोरलेन सड़क को रायपुर कस्बे के मौजूदा क्षेत्र से ही निकाला जाए, ताकि कृषि भूमि और स्थानीय रोजगार सुरक्षित रह सकें।