नरेश मीणा बोले-सत्ता के बिना कोई बदलाव नहीं आने वाला:वसुंधरा राजे और दीया कुमारी को भी सत्ता चाहिए; राजनीति में बहरूपिया बनना पड़ता है
बूंदी में नरेश मीणा ने कहा- आदिवासी समाज का भला सत्ता में भागीदारी के बिना संभव नहीं है। सत्ता जरूरी है, क्योंकि राजघराने की वसुंधरा राजे और दीया कुमारी को भी सत्ता चाहिए, तो तुम सत्ता के पीछे क्यों नहीं भाग रहे। जब तक सत्ता तुम्हारे हाथ में नहीं आएगी तब तक कोई बदलाव आने वाला नहीं है, कोई परिवर्तन नहीं होने वाला है। नरेश मीणा ने कहा- अगर तुम्हें आगे बढ़ाना है तो कितने ही नौकरी लग जाओ, कितने ही बिजनेस कर लो, जब तक सत्ता में भागीदारी नहीं होगी, तुम्हारा भला होने वाला नहीं है। सत्ता में भागीदारी नहीं है तो तुम्हारे कर्मचारियों को डर-डर के नौकरी करनी पड़ेगी। कोई बिजनेस डालेगा या क्रेशर डालेगा तो ओम बिरला, प्रमोद भैया एक फोन पर बंद करवा देंगे। कोई मीणा का बेटा पीडब्ल्यूडी का रोड बनाने का प्रयास करेगा तो अधिकारियों को फोन करेंगे कि इसका बिल पास नहीं होना चाहिए। बड़े नेताओं का फोन करने पर ही AEN, JEN आपका बिल पास करेगा। नरेश मीणा रविवार को बूंदी के नैनवां में आदिवासी मीणा सेवा संस्थान द्वारा आयोजित प्रतिभा सम्मान एवं भामाशाह सम्मान समारोह में पहुंचे थे। इस दौरान समर्थकों ने उनको कंधों पर बैठाकर मंच तक पहुंचाया। आदिवासी समाज को शिक्षा से वंचित रखा गया नरेश मीणा ने कहा- प्राचीन काल में आदिवासी समाज को शिक्षा से वंचित रखा गया था, फिर भी उनके पूर्वजों ने सूझबूझ और पराक्रम से शासन किया। उन्होंने जोर दिया कि आज के लोकतंत्र में सत्ता में भागीदारी ही समाज की वास्तविक ताकत है और इसके बिना उत्थान संभव नहीं है। मीणा ने कहा- हाड़ौती में आदिवासी मीणा समाज की बड़ी संख्या होने के बावजूद पूंजीपति वर्ग के नेताओं ने उनको राजनीतिक रूप से हाशिए पर रखा है। ओम बिरला, शांति धारीवाल, प्रमोद जैन भाया और प्रताप सिंह सिंघवी जैसे पूंजीपति वर्ग के नेता सीमित वोटों के बावजूद वर्षों से इस क्षेत्र पर शासन कर रहे हैं। नरेश मीणा ने हाड़ौती को इन पूंजीपतियों के राजनीतिक कब्जे से मुक्त कराने का संकल्प लिया है और जूते-चप्पल का त्याग किया। उन्होंने प्रण लिया कि जब तक ऐसे नेता विधानसभा और संसद से बाहर नहीं होंगे, वो जूते नहीं पहनेंगे। मीणा ने दावा किया कि हाड़ौती में आदिवासी समाज के अधिकारी-कर्मचारियों को प्रताड़ित किया जा रहा है, उन्हें भय के माहौल में काम करना पड़ रहा है और उनके व्यवसाय भी बंद करवाए जा रहे हैं। उन्होंने इसे सत्ता से दूर रहने का परिणाम बताया। नरेश मीणा बोले- मैं कभी भाजपा में जाऊंगा नरेश मीणा ने कहा- 8 महीने जेल में रहने और 32 मुकदमों का सामना करने के बावजूद मैंने सार्वजनिक रूप से घोषणा की है कि मैं कभी भाजपा में नहीं जाऊंगा। उन्होंने भाजपा को आरक्षण विरोधी और दलित-आदिवासियों के हितों के खिलाफ काम करने वाली पार्टी बताया। मीणा ने अंता विधानसभा उपचुनाव में भाजपा का टिकट ठुकराने का भी जिक्र किया। राजनीति में बहरूपिया बनना पड़ता है नरेश मीणा ने कहा- मैंने 3 विधानसभा के चुनाव लड़े हैं। जनता के बीच जाकर जो अनुभव मिलता है, वह किताबों में नहीं मिलता। राजनीति करने के लिए हमको बहरूपिया भी बनना पड़ता है। राजनीति में सत्ता तक पहुंचने के लिए कई तरह के काम करने पड़ते हैं। सभी समाज को साथ लेकर चलना पड़ता है। जब तक तुम्हारी सत्ता में भागीदारी नहीं होगी तुम्हारा भला नहीं हो सकता है। इस दौरान उन्होंने चुनाव में साथ नहीं देने वालों को भी जमकर खरीखोटी सुनाई।