ट्रंप ने जो मादुरो के ख़िलाफ़ किया, क्या चीन ताइवान के साथ कर सकता है?
निकोलस मादुरो को पकड़कर अमेरिका ले जाने के बाद ताइवान की मीडिया में ऐसी ख़बरों को गंभीरता से लिया जा रहा है कि ताइवान अगला वेनेज़ुएला हो सकता है.
ट्रंप ने जो मादुरो के ख़िलाफ़ किया, क्या चीन ताइवान के साथ कर सकता है?

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इमेज कैप्शन, निकोलस मादुरो को अमेरिका की अदालत में पेशी के लिए हथकड़ी में ले जाया गया था
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- Author, बीबीसी मॉनिटरिंग
- 7 जनवरी 2026
वेनेज़ुएला पर अमेरिका के सैन्य हमलों और वहां के नेता निकोलस मादुरो को हिरासत में लिए जाने से अंतरराष्ट्रीय नियमों और देश की संप्रभुता को लेकर बहस छिड़ गई है.
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हो रही चर्चा के केंद्र में यह मुद्दा था कि क्या यह कार्रवाई एक नज़ीर बन सकती है और इससे चीन-रूस जैसे देशों को ताइवान और यूक्रेन जैसे मामलों में इसी तरह का क़दम उठाकर अपने-अपने 'प्रभाव क्षेत्र' बनाने का हौसला मिल सकता है.
वहीं, कुछ लोगों का कहना है कि मादुरो की गिरफ़्तारी चीन के लिए 'मज़बूत चेतावनी' हो सकती है और इससे 'चीन की वैश्विक पहुंच का मुद्दा भी उजागर होता है.'
हालांकि, चीन की सरकारी मीडिया में ऐसी कोई संभावना नहीं जताई गई है कि चीनी सेना ताइवान के राष्ट्रपति विलियम लाई चिंग-ते को इस तरह से पकड़ने के लिए कोई अभियान चलाएगी, मगर चीन वर्षों से ऐसी धमकी देता रहा है.
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ऐसी भी ख़बरें हैं कि चीन ने अपने ज़ूरीहा सैन्य अड्डे पर ताइवान के राष्ट्रपति भवन और सरकारी ढांचों की रेप्लिका तैयार कर ली है, ताकि 'डिकैपिटेशन स्ट्राइक यानी शीर्ष नेतृत्व को निशाना बनाने वाले' संभावित अभियान की तैयारी की जा सके.
चीन की नेशनल डिफ़ेंस यूनिवर्सिटी में प्रोफ़ेसर झांग ची ने सरकारी अख़बार ग्लोबल टाइम्स से कहा कि साल 2025 के आख़िर में ताइवान के पास हुए 'जस्टिस मिशन 2025' सैन्य अभ्यास के दौरान 'डिकैपिटेशन स्ट्राइक' का भी अभ्यास किया गया था.
उन्होंने कहा कि इन ड्रिल्स में "ताइवान की आज़ादी के समर्थक अलगाववादी बलों के अहम चेहरों से जुड़े बड़े प्रतीकात्मक ठिकानों पर नक़ली हमले" भी शामिल थे.
उनका दावा था कि चीन की पीपल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के पास ज़रूरत पड़ने पर 'ताइवान की आज़ादी के प्रमुख अपराधियों के ख़िलाफ़ सटीक कार्रवाई करने की ज़बरदस्त क्षमता है.'
ताइवान में कैसा माहौल?

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इमेज कैप्शन, ताइवान की मीडिया में ये आशंका जताई जा रही है कि क्या उनके राष्ट्रपति लाई चिंग ते (बीच में) को भी मादुरो की तरह पकड़ा जा सकता है
चीन की इन धमकियों को ताइवान में गंभीरता से लिया जा रहा है, ख़ासकर ये देखते हुए कि अमेरिका ने कितनी आसानी से मादुरो को पकड़ लिया.
ऑनलाइन न्यूज़ पोर्टल स्टॉर्म मीडिया और यूनाइटेड डेली न्यूज़ समेत ताइवान के मीडिया आउटलेटों ने ऐसे विचारों को प्रमुखता से जगह दी है कि 'ताइवान अगला वेनेज़ुएला हो सकता है', क्योंकि अमेरिका की 'ब्लॉकेड और डिकैपिटेशन' वाली रणनीति चीन को भी ताइवान के ख़िलाफ़ वैसा ही क़दम उठाने के लिए बल दे सकती है.
एक और ताइवानी ऑनलाइन न्यूज़ आउटलेट ताइ साउंड्स ने बताया कि चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ से जुड़े एक सोशल मीडिया अकाउंट ने तीन जनवरी को वीचैट पर प्रकाशित एक लेख में लोगों से कहा था कि वे अमेरिका की वेनेज़ुएला पर कार्रवाई की तुलना ताइवान से न करें.
इस लेख में ज़ोर देकर कहा गया था कि चीन असल में शांतिप्रिय देश है और वह तब तक युद्ध का सहारा नहीं लेता जब तक इसके अलावा कोई और विकल्प न बचे. साथ ही लेख में यह भी कहा गया कि अमेरिका के उलट चीन न्याय के लिए लड़ता है.
चीन की क्षमता पर भी सवाल

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इमेज कैप्शन, चीन पहले से ताइवान के आसपास सैन्य अभ्यास करता रहा है
ताइवान के मीडिया में यह सवाल भी चर्चा के केंद्र में है कि क्या चीन के पास अमेरिका जैसा कोई अभियान चलाने की क्षमता है.
चीन की ओर झुकाव रखने वाले ताइवानी अख़बार चाइना टाइम्स की एक रिपोर्ट में इंस्टीट्यूट फॉर नेशनल डिफेंस एंड सिक्योरिटी रिसर्च के सू-त्जु़-युन के हवाले से कहा गया कि चीन लंबे समय से ताइवान की मिलिट्री पुलिस और राष्ट्रपति की सुरक्षा से जुड़े कर्मियों के बीच घुसपैठ कर राष्ट्रपति की गतिविधियों की जानकारी जुटाने की कोशिश करता रहा है. ताइवान को ऐसी गतिविधियों से सतर्क रहने की ज़रूरत है.
हालांकि, सू ने यह भी कहा कि अमेरिका ने वेनेज़ुएला में अपने ऑपरेशन के ज़रिए यह दिखा दिया है कि उसकी इलेक्ट्रॉनिक वॉरफ़ेयर क्षमताएं चीन से बेहतर हैं. उनके मुताबिक़, ताइवान के पास मौजूद अमेरिका के बने रडार और कम्युनिकेशन सिस्टम चीनी सिस्टम की तरह आसानी से निष्क्रिय नहीं किए जा सकते.
यूनाइटेड डेली न्यूज़ में छपे एक अन्य लेख में एशिया पैसिफ़िक डिफ़ेंस मैगज़ीन के एडिटर-इन-चीफ़ चेंग ची-वेन के हवाले से कहा गया कि ताइवान की स्थिति वेनेज़ुएला से अलग है. क्योंकि ताइवान के राजनीतिक और सैन्य हलकों में चीन की घुसपैठ उतनी ज़्यादा नहीं है, जितनी लातिन अमेरिका में अमेरिका की रही है.
चेंग ने यह भी कहा कि 'एंटी-डिकैपिटेशन यानी शीर्ष नेतृत्व की सुरक्षा हमेशा से ताइवान की सेना का एक प्रमुख फ़ोकस रहा है. हाल के सालों में ताइवान की स्पेशल फ़ोर्सेज़ का अमेरिकी सेना के साथ बड़े पैमाने पर आदान-प्रदान हुआ है.'
यूनाइटेड डेली न्यूज़ की एक और रिपोर्ट में अमेरिका के पूर्व रक्षा अधिकारी ड्रू थॉम्पसन के हवाले से कहा गया है कि अमेरिकी सेना की तुलना में पीएलए के पास ऐसे अभियानों का अनुभव कम है. थॉम्पसन ने यह भी जोड़ा कि 'चीन के पास ताइवान के नेता को निष्क्रिय करने के दूसरे विकल्प हैं. और अगर वह हत्या का रास्ता अपनाता है तो उसके सफल होने की संभावना ज़्यादा हो सकती है.'
ताइवानी अख़बार लिबर्टी टाइम्स के मुताबिक़, चीन के संभावित "डिकैपिटेशन ऑपरेशन" की आशंका पर पूछे गए सवाल के जवाब में चिएन ने कहा कि सेना के पास हर तरह के हालात के लिए योजनाएं हैं और इसका अभ्यास भी किया गया है, जिनमें राष्ट्रपति की सुरक्षा से जुड़ा वान चुन प्लान भी शामिल है.
सरकार से जुड़ी समाचार एजेंसी सेंट्रल न्यूज़ एजेंसी की एक अन्य रिपोर्ट में शू के हवाले से बताया गया कि उन्होंने पांच जनवरी को ताइवान की लेजिस्लेटिव यूआन की वित्त समिति के सदस्यों के सामने आपात तैयारियों को मज़बूत करने के महत्व पर ज़ोर दिया और संसद से वार्षिक के साथ स्पेशल डिफ़ेंस बजट को जल्द से जल्द पास करने का भी आग्रह किया.
बीबीसी के लिए कलेक्टिवन्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.