तेज सर्दी से जल रही लोगों की त्वचा:सुन्न और छाले पड़ने की हो रही समस्या, अस्पतालों में ओपीडी बढ़ी
SOURCE:Dainik Bhaskar Tech
कोटा में पिछले चार दिनों से तेज सर्दी का सितम जारी है। इसके चलते सर्दी की वजह से बीमार पड़ने वाले लोगों की संख्या में भी बढ़ोतरी होने लगी है। कोटा के एमबीएस और मेडिकल कॉलेज के नए अस्पतालों में मरीज इलाज करवाने पहुंच रहे हैं। शहर के सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर भी लोगों की भीड़ लग रही है। शीतलहर का ज्यादा प्रकोप स्किन पर भी पड़ रहा है। कोल्ड बर्न के मामले बढ़ने लगे हैं। इस स्थिति को कोल्ड अटैक कहा जाता है। चर्म रोग विभाग में पहुंच रहे मरीजों में सबसे ज्यादा हाथ और पैरों की समस्या सामने आ रही है। कई मरीजों के हाथ-पैरों की त्वचा शीतलहर या तेज सर्दी के चलते पहले लाल हुई फिर काली पड़ने लगी। सर्द हवा-पानी के लगातार संपर्क में रहने से यह समस्या हो रही है। डॉ. देवेन्द्र विजय के अनुसार तेज सर्दी में त्वचा की रक्त नलिकाएं सिकुड़ जाती है। इससे हाथ-पैरों में रक्त संचार कम हो जाता है और त्वचा को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती। इसी कारण त्वचा जलने जैसी स्थिति बन जाती है। मेडिकल कॉलेज अस्पताल की बात की जाए तो तो यहां ओपीडी में सर्दी की वजह से बीमार होने के तकरीबन सौ मरीजों में पांच सात मरीज बर्न स्किन के सामने आ रहे है। सुबह-सुबह ठंडे पानी से काम करने वाले लोग इसका ज्यादा शिकार हो रहे हैं। घरों में कामकाज करने वाली महिलाएं, किसान, मजदूर और खुले में काम करने वाले लोग इस समस्या की चपेट में ज्यादा है। इसके अलावा अस्पतालों में सर्दी जुकाम और बुखार के मरीजों की संख्या है। क्या है कोल्ड बर्न
डॉ. यावर खान ने बताया- यह त्वचा को ठंड से होने वाली चोट है, जो तब होती है, जब त्वचा के ऊतक जम जाते हैं। यह सामान्य गर्मी से जलने जैसा दिख सकता है, लेकिन इसका कारण ज्यादा सर्दी होती है। इसके लक्षणों में त्वचा का रंग बदलना, त्वचा का सुन्न होना या झुनझुनी महसूस होना, त्वचा पर छाले पड़ना, त्वचा का कठोर या मोमी महसूस होना होता है। उन्होंने बताया- ज्यादातर मरीज मेडिकल कॉलेज संबद्ध अस्पतालों में पहुंच रहे है। वहीं, डिस्पेंसरी की बात करें तो डिस्पेंसरियों में भी ओपीडी सर्दी में डेढ़ सौ से तीन सौ तक रहती है। जिनमें आमतौर पर खांसी जुकाम के मरीज, बच्चों में सर्दी की वजह से बीमारी या कोल्ड बर्न के मरीज आ रहे हैं।
कोटा में पिछले चार दिनों से तेज सर्दी का सितम जारी है। जिसके चलते सर्दी की वजह से बीमार पड़ने वाले लोगों की संख्या में भी बढ़ोतरी होने लगी है। कोटा के एमबीएस और मेडिकल कॉलेज के नए अस्पतालों में मरीज इलाज करवाने पहुंच रहे है। शहर के सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर भी लोगों की भीड़ लग रही है। शीतलहर का ज्यादा प्रकोप स्किन पर भी पड़ रहा है। कोल्ड बर्न के मामले बढ़ने लगे हैं। इस स्थिति को कोल्ड अटैक कहा जाता है। चर्म रोग विभाग में पहुंच रहे मरीजों में सबसे ज्यादा हाथ और पैरों की समस्या सामने आ रही है। कई मरीजों के हाथ-पैरों की त्वचा शीतलहर या तेज सर्दी के चलते पहले लाल हुई फिर काली पड़ने लगी। सर्द हवा-पानी के लगातार संपर्क में रहने से यह समस्या हो रही है। डॉ. देवेन्द्र विजय के अनुसार तेज सर्दी में त्वचा की रक्त नलिकाएं सिकुड़ जाती है। इससे हाथ-पैरों में रक्त संचार कम हो जाता है और त्वचा को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती। इसी कारण त्वचा जलने जैसी स्थिति बन जाती है। मेडिकल कॉलेज अस्पताल की बात की जाए तो तो यहां ओपीडी में सर्दी की वजह से बीमार होने के तकरीबन सौ मरीजों में पांच सात मरीज बर्न स्किन के सामने आ रहे है। सुबह-सुबह ठंडे पानी से काम करने वाले लोग इसका ज्यादा शिकार हो रहे हैं। घरों में कामकाज करने वाली महिलाएं, किसान, मजदूर और खुले में काम करने वाले लोग इस समस्या की चपेट में ज्यादा है। इसके अलावा अस्पतालों में सर्दी जुकाम और बुखार के मरीजों की संख्या है। क्या है कोल्ड बर्न
डॉ. यावर खान ने बताया कि यह त्वचा को ठंड से होने वाली चोट है, जो तब होती है जब त्वचा के ऊतक जम जाते हैं। यह सामान्य गर्मी से जलने जैसा दिख सकता है लेकिन इसका कारण ज्यादा सर्दी होती है। इसके लक्षणों में
त्वचा का रंग बदलना, त्वचा का सुन्न होना या झुनझुनी महसूस होना, त्वचा पर छाले पड़ना, त्वचा का कठोर या मोमी महसूस होना होता है। उन्होंने बताया कि ज्यादातर मरीज मेडिकल कॉलेज संबद्ध अस्पतालों में पहुंच रहे है। वहीं डिस्पेंसरी की बात करें तो डिस्पेंसरियों में भी ओपीडी सर्दी में डेढ़ सौ से तीन सौ तक रहती है। जिनमें आमतौर पर खांसी जुकाम के मरीज, बच्चों में सर्दी की वजह से बीमारी या कोल्ड बर्न के मरीज आ रहे हैं।