खाद कमी पर किसानों ने की स्टॉक बढ़ाने की मांग:भाजपा-जिलाध्यक्ष ने की मंत्री से बात; जल्द सप्लाई शुरू होने की उम्मीद
बांसवाड़ा के अलग अलग क्षेत्रों से लगातार शिकायतें सामने आ रही थीं कि किसानों को फसलों के लिए पर्याप्त खाद नहीं मिल पा रही है। खाद की किल्लत के चलते किसानों को बार बार केंद्रों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। कई किसान संगठनों और ग्रामीण क्षेत्रों के काश्तकारों ने व्यक्तिगत रूप से भाजपा जिलाध्यक्ष पूंजीलाल गायरी को अपनी परेशानी बताई थी। सहकारिता मंत्री से फोन पर की बात किसानों की समस्या को गंभीर मानते हुए जिलाध्यक्ष गायरी ने प्रदेश के सहकारिता मंत्री गौतम दक से फोन पर बातचीत की। उन्होंने जिले में खाद की कमी से अवगत कराते हुए कहा कि यदि समय पर खाद उपलब्ध नहीं हुई तो कृषि कार्य प्रभावित होंगे और किसानों को नुकसान झेलना पड़ेगा। लैम्प्स समितियों में स्टॉक बढ़ाने की मांग बातचीत के दौरान जिलाध्यक्ष ने विशेष रूप से लैम्प्स समितियों में खाद की भारी कमी का मुद्दा उठाया। उन्होंने मांग की कि किसानों की बढ़ती डिमांड के अनुसार जिले में तुरंत खाद का स्टॉक भिजवाया जाए और वितरण व्यवस्था को सुचारू किया जाए, ताकि किसी भी किसान को परेशानी न हो। गेहूं की फसल पर पड़ रहा असर खाद की कमी के कारण जिले के कृषि कार्यों पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। इस समय गेहूं की फसल में सिंचाई का दौर चल रहा है, लेकिन खाद नहीं मिलने से किसान बड़ी समस्या का सामना कर रहे हैं। जल्द आपूर्ति बहाल होने की उम्मीद जिलाध्यक्ष के हस्तक्षेप के बाद अब उम्मीद जताई जा रही है कि सरकार बांसवाड़ा जिले के लिए खाद का अतिरिक्त कोटा आवंटित करेगी और जल्द ही आपूर्ति बहाल होगी, जिससे किसानों को राहत मिल सके।
फ़ोटो. भाजपा जिलाध्यक्ष पूँजीलाल गायरी।
बांसवाड़ा के अलग अलग क्षेत्रों से लगातार शिकायतें सामने आ रही थीं कि किसानों को फसलों के लिए पर्याप्त खाद नहीं मिल पा रही है। खाद की किल्लत के चलते किसानों को बार बार केंद्रों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
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कई किसान संगठनों और ग्रामीण क्षेत्रों के काश्तकारों ने व्यक्तिगत रूप से भाजपा जिलाध्यक्ष पूंजीलाल गायरी को अपनी परेशानी बताई थी।
सहकारिता मंत्री से फोन पर की बात
किसानों की समस्या को गंभीर मानते हुए जिलाध्यक्ष गायरी ने प्रदेश के सहकारिता मंत्री गौतम दक से फोन पर बातचीत की। उन्होंने जिले में खाद की कमी से अवगत कराते हुए कहा कि यदि समय पर खाद उपलब्ध नहीं हुई तो कृषि कार्य प्रभावित होंगे और किसानों को नुकसान झेलना पड़ेगा।