पुलिस की प्राथमिकताओं में शामिल, मगर ना थाना भवन, ना एक्सपर्ट, साइबर अपराधों पर कैसे कसे नकेल
पुलिस मुख्यालय ने वर्ष, 26 की प्राथमिकताएं तय कर दी हैं जिसमें साइबर क्राइम की रोकथाम और बेहतर अनुसंधान को शामिल किया गया है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि पुलिस की प्राथमिकता पर बेहतर काम कैसे होगा। जब जिले में न तो साइबर पुलिस थाने का अपना भवन है और न ही एक्सपर्ट स्टॉफ। अलग-अलग राज्यों से तार जुड़े होने के मामलों में कानूनी पेचीदगियां हैं और समन्वय की कमी। दूसरी तरफ साइबर अपराधी इतने शातिर हैं कि एक गलती हुई नहीं कि एकाउंट हैक और खाता खाली हो जाता है। पुलिस मुख्यालय ने हर साल की तरह इस साल भी वर्ष, 26 की पुलिस प्राथमिकताएं घोषित कर दी हैं। चार प्राथमिकताएं अपराध संबंधी और इतनी ही प्रशासनिक हैं। साइबर क्राइम की रोकथाम पिछले साल भी पुलिस की प्राथमिकताओं में शामिल था और इस बार भी। लेकिन, अब लगातार बढ़ते मामलों को देखते हुए इसे प्रमुखता से लिया गया है और बेहतर अनुसंधान पर जोर दिया है। ‘भास्कर’ ने साइबर पुलिस थानों के बारे में जानकारी जुटाई तो सामने आया कि साइबर क्राइम से निपटने के के इंतजाम नाकाफी हैं। प्रदेश में वर्ष, 22 में अधिकांश जिलों में साइबर पुलिस थाने शुरू किए गए थे। तब से लेकर आज तक ना तो साइबर एक्सपर्ट मिले हैं और ना ही अपराध की रोकथाम में आड़े आ रही समस्याओं पर विचार-विमर्श कर उन्हें दूर किया गया है। बीकानेर जिले में साइबर थाना अभय कमांड सेंटर के उधार के कमरों में चल रहा है जहां अभियुक्तों को रखने के लिए बैरक तक नहीं है। अभियुक्तों को व्यास कॉलोनी पुलिस थाने के बैरक में रखा जाता है। ऐसे में साइबर क्राइम रोकने की पुलिस की प्राथमिकता पर कैसे बेहतर काम होगा, सवाल खड़ा हो गया है। वर्ष, 26 की पुलिस प्राथमिकताएं अपराध संबंधी 1. संगठित अपराध पर प्रहार। 2. महिलाओं, बच्चों एवं कमजोर वर्ग के प्रति अपराधों की रोकथाम। 3. बेहतर सड़क सुरक्षा एवं यातायात प्रबंधन। 4. साइबर अपराधों की रोकथाम व बेहतर अनुसंधान। प्रशासनिक 1. जन सहभागिता से पुलिस तंत्र सशक्त करना। 2. पुलिस के कार्य में तकनीकी दक्षता का अधिकतम उपयोग। 3. कार्मिकों की कार्यदशा एवं दक्षता में सुधार। 4. पुलिस परिसरों में सामुदायिक सेवाओं का उन्नयन साइबर क्राइम रोकने और अनुसंधान में आने वाली मुख्य परेशानियां साइबर क्राइम }हैकिंग : किसी के कम्प्यूटर सिस्टम में बिना अनुमति प्रवेश या छेड़छाड़। }फिशिंग : लोगों को धोखा देकर उनकी व्यक्तिगत जानकारी चुराना }मैलवेयर : कम्प्यूटर सिस्टम को नुकसान पहुंचाने वाले सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल }रैंसमवेयर : कम्प्यूटर सिस्टम को लॉक करके उसे खोलने के लिए रुपए मांगना }आइडेंटिटी थेफ्ट : किसी की पहचान चुराकर उसका गलत इस्तेमाल करना }साइबर स्टॉकिंग : किसी को लगातार ऑनलाइन परेशान करना }क्रेडिट कार्ड धोखाधड़ी : चोरी किए क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल कर खरीदारी करना } दूसरे राज्यों में बैंक खातों का वेरिफिकेशन करने के लिए पुलिस को बार-बार जाना पड़ता है। इससे जांच में देरी होती है और आने-जाने में समय की बर्बादी और अन्य परेशानियां भी } साइबर अपराधी किसी के खाते में रुपए डालकर ट्रांजेक्शन करता है तो खाता सीज कर दिया जाता है। जिससे अनजान खातेदार परेशान होता रहता है और खाता आसानी से चालू नहीं हो पाता } साइबर थाने में इंस्पेक्टर, डीवाईएसपी की पोस्ट है। लेकिन, जिन लोगों को साइबर क्राइम की जानकारी नहीं होती या जो रुचि नहीं रखते, उन्हें पोस्टिंग दे दी जाती है जिससे बेहतर नतीजे नहीं मिल पाते } सरकार ने साइबर पुलिस थाने तो शुरू कर दिए, लेकिन उनमें बेहतर काम करने के लिए साइबर एक्सपर्ट की भर्ती शुरू नहीं की। इसके अभाव में पुलिसकर्मियों को निजी एक्सपर्ट के पास जाना पड़ता है। पुलिस भर्ती में साइबर एक्सपर्ट पदनाम से भर्ती की जानी चाहिए } साइबर पुलिस थानों की नफरी बहुत कम है। एक डीवाईएसपी, दो इंस्पेक्टर, दो एसआई, दो हेड कांस्टेबल और 7 कांस्टेबल के पद स्वीकृत हैं। जबकि, साइबर क्राइम की रोकथाम और बेहतर अनुसंधान के लिए इससे तीन-चार गुना नफरी की आवश्यकता जताई जाती है।