झुंझुनूं के 'हाट' में सजी शेखावाटी की संस्कृति:हस्तशिल्प एवं पर्यटन मेले का आगाज, सांस्कृतिक संध्या में दिखेगी विरासत
झुंझुनूं में आबूसर स्थित ग्रामीण हाट में शुक्रवार से ‘शेखावाटी हस्तशिल्प एवं पर्यटन मेले’ का शुभारंभ हुआ। कलेक्टर अरुण गर्ग ने दीप प्रज्ज्वलित कर मेले का उद्घाटन किया। उद्घाटन के साथ ही पूरा परिसर राजस्थानी लोक-संस्कृति के रंगों में सराबोर नजर आया। ‘लोकल फॉर वोकल’ को मिलेगा मंच मेले का अवलोकन करते हुए जिला कलेक्टर अरुण गर्ग ने कहा कि इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य ‘लोकल फॉर वोकल’ की सोच को धरातल पर उतारना है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में छिपी प्रतिभाओं और पारंपरिक हुनर को अक्सर बड़ा बाजार नहीं मिल पाता। यह मेला शिल्पकारों और स्थानीय उद्यमियों के लिए बाजार से जुड़ने का एक मजबूत माध्यम बनेगा। इससे न केवल उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, बल्कि विलुप्त होती पारंपरिक कलाओं को भी नया जीवन मिलेगा। आभूषण से लेकर परिधान तक, हर स्वाद का सामान जिला उद्योग एवं वाणिज्य केंद्र के महाप्रबंधक अभिषेक चौबदार और पर्यटन विभाग के सहायक निदेशक देवेंद्र चौधरी ने बताया कि मेले में शेखावाटी क्षेत्र के साथ-साथ अन्य जिलों से भी शिल्पकार पहुंचे हैं।पहले ही दिन स्टॉल्स पर पारंपरिक आभूषण, हस्तशिल्प की कलाकृतियां और राजस्थानी परिधानों की जमकर खरीदारी हुई। खासतौर पर महिलाओं में घरेलू हस्तशिल्प उत्पादों को लेकर खासा उत्साह देखने को मिला। सांस्कृतिक शामों में दिखेगी शेखावाटी की विरासत पर्यटन विभाग की ओर से मेले में आने वाले सैलानियों के लिए सांस्कृतिक और मनोरंजन कार्यक्रमों की विशेष व्यवस्था की गई है। नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने के उद्देश्य से सितोलिया, रस्साकशी जैसी पारंपरिक प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। 9 और 10 जनवरी को लोक कलाकारों की धूम मेले की सांस्कृतिक संध्याएं 9 और 10 जनवरी को लोक कलाकारों के नाम रहेंगी। इन दो दिनों में लोकगीत, चंग-धमाल और पारंपरिक नृत्यों के माध्यम से शेखावाटी की सांस्कृतिक विरासत को मंच पर जीवंत रूप में प्रस्तुत किया जाएगा।
शहर के आबूसर स्थित ग्रामीण हाट में शुक्रवार से 'शेखावाटी हस्तशिल्प एवं पर्यटन मेले' का आगाज हुआ। जिला कलेक्टर अरूण गर्ग ने दीप प्रज्वलित कर मेले का शुभारंभ किया। उद्घाटन के साथ ही पूरा परिसर राजस्थानी संस्कृति के रंगों में सराबोर नजर आया। मेले का अवलोकन करते हुए कलेक्टर गर्ग ने कहा कि इस आयोजन का मूल ध्येय 'लोकल फॉर वोकल' को चरितार्थ करना है। उन्होंने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में छिपे हुनर को अक्सर बड़ा बाजार नहीं मिल पाता, यह मेला उन कारीगरों और उद्यमियों के लिए एक सेतु का काम करेगा। इससे न केवल उनकी आर्थिक स्थिति सुधरेगी, बल्कि पारंपरिक लुप्त होती कलाओं को भी नया जीवन मिलेगा। आभूषणों से लेकर कपड़ों तक की रेंज जिला उद्योग एवं वाणिज्य केंद्र के महाप्रबंधक अभिषेक चौबदार व पर्यटन विभाग के सहायक निदेशक देवेंद्र चौधरी ने बताया कि मेले में शेखावाटी के अलावा अन्य जिलों के शिल्पकार भी यहां आए हैं। पहले ही दिन स्टॉल्स पर पारंपरिक आभूषण, हस्तशिल्प की कलाकृतियां और राजस्थानी परिधानों की जमकर खरीदारी हुई। महिलाओं में विशेषकर हस्तशिल्प के घरेलू सामान को लेकर खासा उत्साह देखा गया। विरासत से रूबरू कराएंगी सांस्कृतिक शामें पर्यटन विभाग की ओर से मेले में आने वाले सैलानियों के लिए मनोरंजन के विशेष इंतजाम किए गए हैं। नई पीढ़ी को जड़ों से जोड़ने के लिए सितोलिया और रस्साकशी जैसी प्रतियोगिताएं होंगी। 9 और 10 जनवरी की शाम लोक कलाकारों के नाम रहेगी। इन दो दिनों में लोकगीत, चंग-धमाल और नृत्यों के जरिए शेखावाटी की विरासत को पेश किया जाएगा।