किसानों एवं व्यापारियों के लिए आएगी खुशहाली, चमकेगा प्रॉपर्टी बाजार
भास्कर संवाददाता | श्रीगंगानगर अंग्रेजी नववर्ष 2026 की शुरुआत कन्या लग्न, मीन नवमांश, कृतिका नक्षत्र का चतुर्थ चरण और वृष राशि में हो रही है। लग्न पर सप्तमस्थ शनि की पूर्ण दृष्टि है। वहीं, लग्नेश बुध अस्त होकर चतुर्थ भाव में सूर्य, अस्त मंगल और अस्त शुक्र के साथ स्थित है जिस पर बृहस्पति और केतु की पूर्ण दृष्टि है। ज्योतिषविद् जगदीश सोनी ने बताया कि श्रीगंगानगर स्थापना की कुंडली कर्क लग्न में नववर्ष 2026 के गोचर को देखा जाए तो लग्नेश चन्द्रमा उच्च का होकर एकादश भाव में, वहीं छठे भाव में सूर्य, बुध, मंगल और शुक्र का बैठना इस बात का संकेत है कि नववर्ष 2026 श्रीगंगानगर के व्यापारियों और किसानों के लिए काफी अच्छा रह सकता है। व्यापारिक स्थिति काफी मजबूत दिखाई दे रही है। व्यापार में छाई मायूसी दूर होगी। इस वर्ष रोहिणी का वास समुद्र में होने से फसलों की स्थिति काफी अच्छी रह सकती है। फसलों की बंपर आवक रहेगी। किसानों के लिए नववर्ष 2026 काफी सकारात्मक रहेगा। 16 जनवरी 2026 को मंगल अपनी उच्च राशि में आकर सुस्त पड़े प्रॉपर्टी बाजार को चला सकता है। साथ ही गोचर में मिथुन राशि बृहस्पति की पूर्ण दृष्टि सूर्य, बुध, मंगल और शुक्र पर होना प्रॉपर्टी बाजार के लिए काफी शुभ फलदायी है। श्रीगंगानगर के व्यापार और कृषि में उछाल : कुंडली में लग्नेश चंद्रमा के उच्च होने और छठे भाव में चार ग्रहों (सूर्य, बुध, मंगल, शुक्र) की युति से व्यापारिक मंदी दूर होगी। बंपर पैदावार: रोहिणी का वास समुद्र में होने से फसलों की आवक शानदार रहेगी। प्रॉपर्टी बाजार: 16 जनवरी 2026 को मंगल के उच्च राशि में आने से प्रॉपर्टी बाजार में तेजी आएगी। शिक्षा हब: 1 जून 2026 को देवगुरु बृहस्पति के उच्च राशि (कर्क) में प्रवेश से शहर में बड़े शिक्षण संस्थान खुल सकते हैं। शनि की चाल: साढ़ेसाती और अढैया वर्ष 2026 में शनि पूरे समय मीन राशि में रहेंगे। इसका प्रभाव विभिन्न राशियों पर इस प्रकार होगा: शनि की साढ़ेसाती: कुंभ (उतरती), मीन (मध्य) और मेष (प्रारंभिक) राशि पर रहेगी। शनि की अढैया: सिंह और धनु राशि के जातकों पर शनि की अढैया का प्रभाव रहेगा। ग्रहण काल: 2026 की खगोलीय घटना एं : इस वर्ष कुल चार ग्रहण लगेंगे : { 17 फरवरी: सूर्य ग्रहण (कुंभ राशि) - भारत में अदृश्य। { 03 मार्च: चन्द्र ग्रहण (सिंह राशि) - भारत के कुछ हिस्सों में दृश्य। 12 अगस्त: सूर्य ग्रहण (कर्क राशि) - भारत में अदृश्य। { 28 अगस्त: चन्द्र ग्रहण (कुंभ राशि) - भारत में अदृश्य। संवत्सर 2083 और प्राकृतिक आपदाएं: 19 मार्च 2026 से रौद्र नामक नया विक्रम संवत्सर शुरू होगा, जिसके राजा बृहस्पति और मंत्री मंगल होंगे। जोखिम: गुरु का तीन राशियों (मिथुन, कर्क, सिंह) में तेजी से भ्रमण शुभ नहीं माना जाता। इससे देश-दुनिया में महामारी, भूकंप या मानवीय त्रासदी की आशंका बनी रहेगी। वर्षा: 22 जून को सूर्य के आर्द्रा नक्षत्र में प्रवेश और वर्षा के स्वामी चंद्रमा होने से बारिश अच्छी होगी, हालांकि कहीं-कहीं बाढ़ के हालात बन सकते हैं। राशिफल 2026: संक्षिप्त प्रभाव : मेष: साढ़ेसाती से करियर में संघर्ष। वृष: व्यापारिक लाभ और आय के नए स्रोत। मिथुन: रोजगार में लाभ, स्थान परिवर्तन के योग। कर्क: जून के बाद आय में वृद्धि और विवाह योग। सिंह: अढैया के कारण कार्यों में सावधानी बरतें। कन्या: रुका हुआ धन मिलेगा, पारिवारिक शांति। तुला: शत्रुओं पर विजय, घर में मांगलिक कार्य। वृश्चिक: धार्मिक यात्राएं और आय में मजबूती। धनु: संपत्ति विवाद से बचें, क्रोध पर नियंत्रण रखें। मकर: भाई-बहनों का सहयोग, आय में वृद्धि। कुंभ: साढ़ेसाती का अंतिम चरण बड़ा लाभ दे सकता है। मीन: स्वास्थ्य के प्रति सजग रहें, शत्रुओं से सावधान। राहु-केतु का भ्रमण और प्रभाव : 04 दिसंबर 2026 तक राहु कुंभ में और केतु सिंह राशि में भ्रमण करेंगे, जिससे राहु केतु का शुभफल मेष, कन्या और धनु राशि के जातकों को मिलेगा। वहीं, 5 दिसंबर 2026 से 18 महीनों के लिए राहु मकर में और केतु कर्क राशि में भ्रमण करेंगे। इससे सिंह, वृश्चिक और मीन राशि के जातकों को राहु केतु का शुभफल मिलेगा।