युवक को पैरालिसिस हुआ, परिजन मंदिर में छोड़कर भागे:मौत पर भी नहीं आए; चित्तौड़गढ़ की सेवा समिति और समाजसेवियों ने किया अंतिम संस्कार
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युवक को पैरालिसिस हुआ, परिजन मंदिर में छोड़कर भागे:मौत पर भी नहीं आए; चित्तौड़गढ़ की सेवा समिति और समाजसेवियों ने किया अंतिम संस्कार
SOURCE:Dainik Bhaskar Tech
पैरालिसिस होने के बाद एक युवक को उसके परिजन मध्यप्रदेश के नीमच जिले में मोडिया माता मंदिर परिसर में छोड़ गए। सूचना पर चंदेरिया की द्वारकेश सेवा समिति के सदस्य वहां पहुंचे। समिति ने युवक को अपने वृद्ध आश्रम में लाने का फैसला लिया। करीब 4 महीने पहले युवक को आश्रम लाया गया, जहां उसकी नियमित देखभाल, खाना और इलाज की व्यवस्था की गई। हालांकि चित्तौड़गढ़ के जिला हॉस्पिटल में इलाज के दौरान शनिवार को युवक ने दम तोड़ दिया। द्वारकेश सेवा समिति की संचालक नंदिनी त्रिपाठी ने बताया कि युवक का नाम रामस्वरूप था और उसकी उम्र करीब 43 वर्ष थी। वह पैरालिसिस से ग्रस्त था और चलने-फिरने में पूरी तरह असमर्थ था। आश्रम में उसकी हालत कुछ समय तक स्थिर रही, लेकिन दो दिन पहले अचानक उसका स्वास्थ्य बिगड़ गया। स्थिति गंभीर होने पर समिति के लोग उसे शुक्रवार को जिला हॉस्पिटल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने उसका इलाज शुरू किया। इलाज के दौरान हुई मौत
जिला हॉस्पिटल में इलाज के दौरान रामस्वरूप की हालत में सुधार नहीं हो पाया। तमाम कोशिशों के बावजूद शनिवार को इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। जानकारी में सामने आया कि मृतक मूल रूप से जमुनिया गणेश, जिला नरसिंहगढ़, मध्यप्रदेश का रहने वाला था। लेकिन सूचना देने के बावजूद परिवार का कोई भी सदस्य हॉस्पिटल नहीं पहुंचा। न किसी ने शव लेने की जिम्मेदारी ली और न ही अंतिम संस्कार के लिए आया। पोस्टमॉर्टम के बाद सौंपा गया शव
परिवार के नहीं आने पर रविवार को चंदेरिया पुलिस थाना इस मामले में आगे आया। सहायक पुलिस उप निरीक्षक राजेश कुमार और कॉन्स्टेबल महेंद्र सिंह जिला हॉस्पिटल पहुंचे। उन्होंने नियमानुसार पोस्टमॉर्टम की प्रक्रिया पूरी करवाई। इसके बाद शव समाजसेवी गोपाल वेद को सौंप दिया गया, जिससे अंतिम संस्कार किया जा सके। विधि-विधान से हुआ अंतिम संस्कार
रविवार को द्वारकेश सेवा समिति और समाजसेवी गोपाल वेद के सहयोग से सिटी मोक्ष धाम में रामस्वरूप का विधि-विधान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। समिति के सदस्य राहुल दमामी, पुठोली सहित अन्य लोग मोक्ष रथ के जरिए शव को मोक्ष धाम लेकर पहुंचे, जहां समाजसेवियों ने अंतिम विदाई दी।
पैरालाइसिस होने के बाद जब एक युवक चलने-फिरने और अपनी देखभाल करने में असमर्थ हो गया, तब उसके अपने ही परिवार के लोगों ने इलाज और सेवा करने के बजाय उसे मध्यप्रदेश के नीमच जिले में स्थित मोडिया माता मंदिर परिसर में छोड़ दिया। यह घटना मानवता को शर्मसार करने वाली है। युवक काफी समय तक वहीं पड़ा रहा। स्थानीय लोगों के माध्यम से इस बारे में सूचना समाजसेवी संगठनों तक पहुंची, तब उसकी हालत पहले से ही काफी खराब हो चुकी थी। न तो उसके पास कोई सहारा था और न ही इलाज की कोई व्यवस्था। द्वारकेश सेवा समिति ने बढ़ाया मदद का हाथ मोडिया माता मंदिर से सूचना मिलने के बाद चंदेरिया की द्वारकेश सेवा समिति के सदस्य वहां पहुंचे। समिति ने मानवीय संवेदनाएं दिखाते हुए युवक को अपने वृद्ध आश्रम में लाने का फैसला लिया। करीब चार महीने पहले युवक को आश्रम लाया गया, जहां उसकी नियमित देखभाल, खाना और इलाज की व्यवस्था की गई। समिति के सदस्यों ने पूरी जिम्मेदारी के साथ उसकी सेवा की और उसे परिवार जैसा माहौल देने की कोशिश की। आश्रम में चला इलाज, फिर बिगड़ी तबीयत द्वारकेश सेवा समिति की संचालक नंदिनी त्रिपाठी ने बताया कि युवक का नाम रामस्वरूप था और उसकी उम्र करीब 43 वर्ष थी। वह पैरालिसिस से ग्रस्त था और चलने-फिरने में पूरी तरह असमर्थ था। आश्रम में उसकी हालत कुछ समय तक स्थिर रही, लेकिन दो दिन पहले अचानक उसका स्वास्थ्य बिगड़ गया। स्थिति गंभीर होने पर समिति के लोग उसे शुक्रवार को जिला हॉस्पिटल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने उसका इलाज शुरू किया। इलाज के दौरान हुई मौत जिला हॉस्पिटल में इलाज के दौरान रामस्वरूप की हालत में सुधार नहीं हो पाया। तमाम कोशिशों के बावजूद शनिवार को इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। यह खबर समिति के सदस्यों के लिए बहुत दुखद थी, क्योंकि पिछले चार महीनों में वे उसकी सेवा करते हुए उससे भावनात्मक रूप से जुड़ चुके थे। बताया गया कि वह मूल रूप से जमुनिया गणेश, जिला नरसिंहगढ़, मध्यप्रदेश का रहने वाला था। लेकिन सूचना देने के बावजूद परिवार का कोई भी सदस्य हॉस्पिटल नहीं पहुंचा। न किसी ने शव लेने की जिम्मेदारी ली और न ही अंतिम संस्कार के लिए आया। पोस्टमार्टम के बाद सौंपा गया शव परिवार के नहीं आने पर रविवार को चंदेरिया पुलिस थाना इस मामले में आगे आया। सहायक पुलिस उप निरीक्षक राजेश कुमार और कांस्टेबल महेंद्र सिंह जिला हॉस्पिटल पहुंचे। उन्होंने नियमानुसार पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी करवाई। इसके बाद शव समाजसेवी गोपाल वेद को सौंप दिया गया, ताकि अंतिम संस्कार किया जा सके। विधि-विधान से हुआ अंतिम संस्कार रविवार को द्वारकेश सेवा समिति और समाजसेवी गोपाल वेद के सहयोग से सिटी मोक्ष धाम में रामस्वरूप का विधि-विधान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। समिति के सदस्य राहुल दमामी, पुठोली सहित अन्य लोग मोक्ष रथ के जरिए शव को मोक्ष धाम लेकर पहुंचे। भले ही परिवार ने साथ नहीं दिया, लेकिन समाजसेवियों ने इंसानियत दिखाते हुए उसे अंतिम विदाई दी।