कैमल फेस्टिवल के लिए शहरवासियों को दिया निमंत्रण:लक्ष्मीनाथ मंदिर से रामपुरिया हवेली नाचते-गाते हुए कलाकारों ने बांटे पीले चावल
बीकानेर में 9 से 11 जनवरी तक आयोजित होने वाले अंतरराष्ट्रीय ऊंट उत्सव की शुरुआत के तहत शुक्रवार को पारंपरिक ‘आवण री मनवार’ की गई। स्थानीय लोगों को निमंत्रण देने का सिलसिला शुरू किया गया है। अब होटल में आने वाले पर्यटकों को भी आमंत्रित किया जाएगा। राजस्थानी परम्परा के तहत ‘पीळे चावळ’ बांटकर स्थानीय लोगों का को ऊंट उत्सव में शामिल होने का न्योता दिया गया। इस अवसर पर गढ़ गणेश, नगर सेठ लक्ष्मीनाथ मंदिर और करणी माता को पहला औपचारिक निमंत्रण दिया गया। सजे-धजे ऊंट और लोक कलाकार बने आकर्षण आवण री मनवार के दौरान सजे-धजे ऊंट, रोबीले और पारंपरिक वेशभूषा में लोक कलाकार आकर्षण का केंद्र रहे। ढोल-नगाड़ों और लोक संगीत के साथ निकले कारवां ने शहरवासियों को ऊंट उत्सव की झलक दिखाई और उत्सव के रंग में रंग दिया। हेरिटेज रूट से होकर रामपुरिया हवेलियों तक पहुंचा कारवां कार्यक्रम की शुरुआत नगर सेठ लक्ष्मीनाथ मंदिर से हुई। इसके बाद कारवां बीकानेर के प्रमुख हेरिटेज रूट से होते हुए रामपुरिया हवेलियों तक पहुंचा। रास्ते में शहरवासियों ने पारंपरिक अंदाज में कारवां का स्वागत किया। पर्यटन विभाग के अधिकारी रहे मौजूद कार्यक्रम में पर्यटन विभाग के संयुक्त निदेशक अनिल राठौड़, सहायक निदेशक महेश व्यास, पर्यटन अधिकारी पवन शर्मा, सहायक पर्यटन अधिकारी नेहा शेखावत सहित विभाग के अन्य अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे। अधिकारियों ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय ऊंट उत्सव का आयोजन 9 से 11 जनवरी तक किया जाएगा, जिसमें ऊंट दौड़, ऊंट सजावट, लोक सांस्कृतिक कार्यक्रम और विभिन्न पारंपरिक गतिविधियां शामिल होंगी।
बीकानेर में 9 से 11 जनवरी तक आयोजित होने वाले अंतरराष्ट्रीय ऊंट उत्सव की शुरुआत के तहत शुक्रवार को पारंपरिक ‘आवण री मनवार’ की गई। स्थानीय लोगों को निमंत्रण देने का सिलसिला शुरू किया गया है। अब होटल में आने वाले पर्यटकों को भी आमंत्रित किया जाएगा। राज
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सजे-धजे ऊंट और लोक कलाकार बने आकर्षण
आवण री मनवार के दौरान सजे-धजे ऊंट, रोबीले और पारंपरिक वेशभूषा में लोक कलाकार आकर्षण का केंद्र रहे। ढोल-नगाड़ों और लोक संगीत के साथ निकले कारवां ने शहरवासियों को ऊंट उत्सव की झलक दिखाई और उत्सव के रंग में रंग दिया।
हेरिटेज रूट से होकर रामपुरिया हवेलियों तक पहुंचा कारवां
कार्यक्रम की शुरुआत नगर सेठ लक्ष्मीनाथ मंदिर से हुई। इसके बाद कारवां बीकानेर के प्रमुख हेरिटेज रूट से होते हुए रामपुरिया हवेलियों तक पहुंचा। रास्ते में शहरवासियों ने पारंपरिक अंदाज में कारवां का स्वागत किया।