मनरेगा के नाम व स्वरूप बदलने पर कांग्रेस ने जताया विरोध, दिया धरना
टोंक| जिला कांग्रेस कमेटी ने केंद्र सरकार द्वारा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के नाम में बदलाव और योजना के स्वरूप में संशोधन को लेकर गहरी नाराजगी जताई है। पार्टी ने इसे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के सम्मान के खिलाफ और ग्रामीण मजदूरों के अधिकारों पर हमला करार देते हुए रविवार को एक दिवसीय धरना प्रदर्शन आयोजित किया। यह धरना घंटाघर के समीप डॉ. भीमराव अंबेडकर प्रतिमा के नीचे दिया गया, कांग्रेस कार्यकर्ता, पदाधिकारी और स्थानीय ग्रामीण मजदूर भी मौजूद रहे। धरने का नेतृत्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष सऊद सईदी ने किया। कांग्रेस के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि केंद्र की भाजपा सरकार ने मनरेगा को बदलकर महात्मा गांधी का नाम हटाया है। यह कदम न केवल ऐतिहासिक योजना की मूल भावना को कमजोर करता है, बल्कि गरीबों और ग्रामीण मजदूरों के संवैधानिक अधिकारों पर भी गंभीर प्रहार है। सऊद सईदी सहित कई पदाधिकारियों ने बताया कि मनरेगा महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज और रोजगार के अधिकार के सपने का प्रतीक है। इसका नाम बदलना गांधी जी के विचारों का अपमान है। हम मांग करते हैं कि केंद्र और राज्य सरकार मनरेगा का मूल स्वरूप बहाल करें। महात्मा गांधी के नाम सम्मान किया जाए। ग्रामीण मजदूरों को पूर्ण रोजगार गारंटी सुनिश्चित करें। इस मौके पर प्रदेश कांग्रेस के उपाध्यक्ष रामबिलास चौधरी, पूर्व विधायक कमल बैरवा, दिनेश चौरासिया, निवर्तमान जिलाध्यक्ष हरि प्रसाद बैरवा, सेवादल के अब्दुल खालिक खान, सलीमुद्दीन खान, सतवीर गुर्जर, अल्पसंख्यक विभाग के सैयद बरकात हसीन, सरपंच संघ के नेता हंसराज फागणा, शकीलुर्रहमान, ब्लाक कांग्रेस अध्यक्ष कैलाशी मीणा, मणिंद्र लोदी, आबिद मेव, अहसान बाबा, औसाफ खान, आमिर फारूख आदि मौजूद रहे।
टोंक| जिला कांग्रेस कमेटी ने केंद्र सरकार द्वारा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के नाम में बदलाव और योजना के स्वरूप में संशोधन को लेकर गहरी नाराजगी जताई है। पार्टी ने इसे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के सम्मान के खिलाफ और
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यह धरना घंटाघर के समीप डॉ. भीमराव अंबेडकर प्रतिमा के नीचे दिया गया, कांग्रेस कार्यकर्ता, पदाधिकारी और स्थानीय ग्रामीण मजदूर भी मौजूद रहे। धरने का नेतृत्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष सऊद सईदी ने किया। कांग्रेस के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि केंद्र की भाजपा सरकार ने मनरेगा को बदलकर महात्मा गांधी का नाम हटाया है। यह कदम न केवल ऐतिहासिक योजना की मूल भावना को कमजोर करता है, बल्कि गरीबों और ग्रामीण मजदूरों के संवैधानिक अधिकारों पर भी गंभीर प्रहार है। सऊद सईदी सहित कई पदाधिकारियों ने बताया कि मनरेगा महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज और रोजगार के अधिकार के सपने का प्रतीक है। इसका नाम बदलना गांधी जी के विचारों का अपमान है। हम मांग करते हैं कि केंद्र और राज्य सरकार मनरेगा का मूल स्वरूप बहाल करें।