नायाब-आयुष का जलवा... पंजाबी और बॉलीवुड गानों पर रोमांटिक डांस कर जीता फैंस का दिल
भास्कर संवाददाता | श्रीगंगानगर कवयित्री और कंटेंट क्रिएटर नायाब मिढ्ढा अपनी जिंदगी के नए सफर की शुरुआत कर चुकी हैं। रविवार को उनके होम टाउन श्रीगंगानगर में श्रीकरणपुर बाइपास स्थित पैलेस में एक भव्य वेडिंग रिसेप्शन का आयोजन किया गया, जिसमें शहर की जानी-मानी हस्तियों सहित नायाब के प्रशंसकों और करीबियों ने शिरकत की। इस शाम की सबसे बड़ी हाइलाइट रही नायाब और उनके पति सॉफ्टवेयर इंजीनियर आयुष चंधोक की केमिस्ट्री, जिसने वहां मौजूद हर शख्स का दिल जीत लिया। पैलेस को बेहद खूबसूरत तरीके से सजाया गया था। बता दें कि नायाब व आयुष ने नवंबर 2025 में उदयपुर में शादी की थी। रविवार को रिसेप्शन की शाम उस वक्त बेहद खास हो गई जब इस खूबसूरत कपल ने स्टेज पर अपनी परफॉर्मेंस दी। नायाब और आयुष ने बॉलीवुड के रोमांटिक और धमाकेदार पंजाबी गानों पर डांस किया। कंटेंट क्रिएटर के तौर पर लाखों दिलों पर राज करने वाली नायाब अपने रिसेप्शन में किसी अप्सरा से कम नहीं लग रही थीं। वहीं, आयुष क्लासी लुक में दिखाई दिए। इस रिसेप्शन में दाल-बाटी व चूरमा के अलावा पंजाबी व्यंजनों की भरमार रही। मेहमानों को प्लास्टिक-मुक्त क्रॉकरी में खाना खिलाया। नायाब के माता-पिता बबीता रानी-राजकुमार मिढ्ढा व आयुष के माता-पिता मोनिका-सोम चंधोक सहित बड़ी संख्या में मेहमान मौजूद रहे। Q. : आपने पहली बार कब महसूस किया कि आपके शब्दों में लोगों को जोड़ने की शक्ति है? A. साल 2012 की बात है, निर्भया कांड के विरोध में मैं लाउडस्पीकर पर अपनी कविता सुना रही थी। तब स्कूल जाने वाले कुछ लड़के मेरे पास आए और बोले- हमें इन बातों का अहसास ही नहीं था, शायद हमें खुद को बेहतर बनाने की जरूरत है। Q. आपकी कविताओं में अकसर जज्बात और रोजमर्रा की जिंदगी का मेल होता है। आपके लेखन के मुख्य स्रोत क्या हैं? A. मैं चीजों को बहुत गहराई से महसूस करती हूं। कहते हैं न कि कलाकार वह होता है जो महसूस भी ज्यादा करता है और उसे व्यक्त भी ज्यादा करता है। इसीलिए मैं जिंदगी को सिर्फ गुजारना नहीं, बल्कि उसे दोगुनी गहराई के साथ जीना पसंद करती हूं। Q. जब शब्द नहीं मिलते, तब आप खुद को फिर से लिखने के लिए कैसे प्रेरित करती हैं? A. मुझे लगता है कि जब शब्द मिलने बंद हो जाएं तो वह "लिखने' का नहीं बल्कि "पढ़ने' का समय होता है। जब आप दूसरों के अनुभवों और विचारों को पढ़ते हैं तो प्रेरणा अपने आप वापस लौट आती है। Q. डिजिटल प्लेटफॉर्म ने एक कलाकार के रूप में आपके सफर को कैसे बदला है? A. डिजिटल प्लेटफॉर्म ने मुझे वह दिया है जो हर कलाकार का सपना होता है- "जनता'। इसने मेरी आवाज को घर-घर तक पहुंचाया और मुझे एक कलाकार से एक सफल कंटेंट क्रिएटर के रूप में पहचान दिलाई। हालांकि, मैं इसे मंजिल नहीं मानती, मुझे लगता है कि अभी बहुत कुछ करना और सीखना बाकी है। Q. हमारे शहर श्रीगंगानगर की मिट्टी और यहां की संस्कृति ने आपकी लेखनी को किस तरह आकार दिया है? A. श्रीगंगानगर बाकी शहरों से बहुत अलग है। यहां पंजाबी, राजस्थानी और शरणार्थी संस्कृतियों का एक खूबसूरत मेल है। मेरे बचपन के दौरान यहां आधुनिकता, समानता और डिबेट्स का माहौल था। जब मैं दिल्ली गई, तब मुझे अहसास हुआ कि मेरे सेक्रेड हार्ट स्कूल और शहर ने मुझे कितनी बेहतरीन शिक्षा और आजादी दी थी। मुझे गर्व है कि मेरी जड़ों ने मुझे इतना मजबूत बनाया। Q. आपकी कोई ऐसी रचना जो आपके दिल के सबसे करीब हो, लेकिन उसे अभी तक वह पहचान न मिली हो जिसकी वह हकदार थी? A. मेरी एक कविता है- "बेटियां जब पढ़ती हैं, कमाल बहुत करती हैं...'। यह सोशल मीडिया पर उपलब्ध तो है, लेकिन मुझे लगता है कि इस कविता का संदेश और भी ज्यादा लोगों तक पहुंचना चाहिए था।