बयाना, वैर और भुसावर क्षेत्र में जलस्तर गिरने से सोलर पंप ठप
भरतपुर। सरकार द्वारा पीएम कुसुम योजना के तहत सोलर पंप योजना की शुरुआत की गई थी, लेकिन लगातार गिरते भूजल स्तर के कारण बयाना, वैर, भुसावर में सोलर पंप की योजना ठप पड़ती जा रही है। वजह, सरकार द्वारा किसानों को उपलब्ध कराए सोलर पंप की क्षमता 750 एचपी यानि 330 फीट तक काम करता है,जबकि भुसावर, वैर, बयाना में 600 फीट पर जाकर पानी मिलता है। इस कारण सोलर पंप की क्षमता कम होने से योजना देहाती क्षेत्र में सफल नहीं हो पा रही। पीएम कुसुम योजना के तहत किसानों को सस्ती और स्थायी सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सोलर पंप योजना शुरू की गई थी। बयाना, वैर और भुसावर ब्लॉकों में लगाए गए 750 एचपी क्षमता के सोलर पंप पानी की कमी के कारण बार-बार हांफ हो रहे हैं। जलस्तर इतना नीचे चला गया है कि पंप पूरी क्षमता से पानी नहीं खींच पा रहे, जिससे खेतों तक सिंचाई नहीं पहुंच पा रही है। लाखों रुपये की लागत से लगाए गए ये पंप कई जगह या तो बंद पड़े हैं। किसानों का कहना है कि योजना लागू करने से पहले भूजल स्तर का सही सर्वे नहीं किया गया। सोलर पंप को सिंचाई का स्थायी समाधान बताया गया था, लेकिन मौजूदा हालात में न तो फसलों को समय पर पानी मिल रहा है और न ही किसानों की परेशानी कम हो पा रही है। ^पीएम कुसुम योजना देहाती क्षेत्र के किसानों के लिए शुरू की गई थी। वैर, भुसावर, बयाना में सोलर पंप काम नहीं कर रहे क्योंकि वहां का भूजल स्तर नीचे आ जा रहा है। पिछले साल 52 किसानों ने लाभ लिया था। इस वर्ष 2025-26 में मात्र 38 किसानों ने ही योजना का लाभ लिया। -जनकराज मीना, उपनिदेशक
भरतपुर। सरकार द्वारा पीएम कुसुम योजना के तहत सोलर पंप योजना की शुरुआत की गई थी, लेकिन लगातार गिरते भूजल स्तर के कारण बयाना, वैर, भुसावर में सोलर पंप की योजना ठप पड़ती जा रही है। वजह, सरकार द्वारा किसानों को उपलब्ध कराए सोलर पंप की क्षमता 750 एचपी यान
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पीएम कुसुम योजना के तहत किसानों को सस्ती और स्थायी सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सोलर पंप योजना शुरू की गई थी। बयाना, वैर और भुसावर ब्लॉकों में लगाए गए 750 एचपी क्षमता के सोलर पंप पानी की कमी के कारण बार-बार हांफ हो रहे हैं। जलस्तर इतना नीचे चला गया है कि पंप पूरी क्षमता से पानी नहीं खींच पा रहे, जिससे खेतों तक सिंचाई नहीं पहुंच पा रही है।
लाखों रुपये की लागत से लगाए गए ये पंप कई जगह या तो बंद पड़े हैं। किसानों का कहना है कि योजना लागू करने से पहले भूजल स्तर का सही सर्वे नहीं किया गया। सोलर पंप को सिंचाई का स्थायी समाधान बताया गया था, लेकिन मौजूदा हालात में न तो फसलों को समय पर पानी मिल रहा है और न ही किसानों की परेशानी कम हो पा रही है।