पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत का इंटरव्यू:विकसित भारत का टूरिज्म कैसा होगा ? एक्सपीरियंस बेस्ड टूरिज्म बना रहे हैं, हर दिन पर्यटन सीजन होगा
पीएम मोदी कहते हैं, पहले भारत देखो, फिर दुनिया घूमों? अब तक क्या हुआ? विविधताओं भरे भारत को देखने के लिए एक जन्म पर्याप्त नहीं। रुचि के अनुरूप सब तरह के डेस्टिनेशन हैं। मोदीजी ने देखो अपना देश स्लोगन दिया। अर्थव्यवस्था का आगे बढ़ना, करोड़ों का गरीबी रेखा से बाहर आना, जेब में पैसा बचना। इनसे डोमेस्टिक ट्रेवल तेजी से बढ़ा है। घर से बाहर निकलने, ठहरने, घूमने आदि को ट्रेवल मानें तो यह कुल यात्राएं 294 करोड़ हैं। यह स्वाभाविक था, आपने क्या किया? मोदी जी के नेतृत्व में डेस्टिनेशन के इन्फ्रास्ट्रक्चर पर काम किया। उदाहरण देखें तो महाकाल मंदिर में साल का फुट-फॉल करीब 35 लाख था। आज एक सप्ताह का 30 लाख है। हर डेस्टिनेशन में ऐसा हुआ है। भारतीयों में भारत के प्रति एक आस्था, विश्वास और सम्मान का भाव मोदी जी ने सृजित किया। हम सस्टेनेबल टूरिज्म का प्रयास कर रहे हैं। हमारी योजनाओं में राज्यों के प्रोजेक्ट को सलेक्ट करने में सस्टनेबिलिटी बड़ा क्राइटेरिया होता है। टूरिज्म पॉलिसी पर कितना काम हुआ ? टूरिस्ट का अनुभव बढ़े, इसे लेकर हमने होलिस्टिक प्रोग्राम बनाया है। किस तरह टूरिज्म बढ़े, हॉस्पिटेलिटी सैक्टर में इन्वेस्टमेंट किस तरह से आए। इसके लिए सरकार ने पॉलिसी रिफॉर्म की हैं। कई राज्यों की व इंटरनेशनल पॉलिसीज का अध्ययन कर ड्रॉफ्ट पॉलिसी बनाई। राज्यों को भेजा। 10 से अधिक राज्यों ने उसे हूबहू एडॉप्ट किया, आगे बढ़कर काम किया। राज्यों में टूरिज्म बेस्ड इकॉनॉमी पोटेंशियल के दोहन की प्रतियोगिता खड़ी हुई है। होटल निर्माण पर क्या पॉलिसी है? हमने प्रधानमंत्री व वित्त मंत्री से आग्रह किया था कि हॉस्पिटेलिटी में इन्वेस्टमेंट को इन्फ्रास्ट्रक्चर का स्टेटस मिले। मुझे खुशी है कि जो 50 ग्लोबल आइकोनिक टूरिस्ट प्लेस बनाने की कल्पना की है, उन जगह पर और होटल निर्माण वाले शहर 10 लाख से कम आबादी वाले शहरों के लिए यह स्टेटस दे दिया गया है। सिंगापुर व हांगकांग जैसा टूरिज्म कब विकसित होगा? हम देखें की वहां डोमेस्टिक टूरिज्म नहीं के बराबर होता है। जबकि यहां यहां अकेले कई मंदिरों में उनके यहां से कई ज्यादा टूरिज्म होता है। केवल विदेशी सैलानियों की संख्या के आधार पर तुलना नहीं कर सकते। जबकि यह बढ़ा भी है और प्री-कोविड बैंचमार्क को हमने ही प्राप्त किया है। विकसित भारत का टूरिज्म कहां देखते हैं? इयर अराउंड टूरिज्म, सस्टेनेबल टूरिज्म और एक्सपीरियंस बेस्ड टूरिज्म का डेस्टिनेशन बने। लोग मॉन्युमेंट के बजाय अनुभव परक पर्यटन को पसंद करने लगे हैं। भारत की कल्चर, भोजन, नेचुरल डायवर्सिटीज, म्यूजिक, फेस्टिवल, कॉस्ट्यूम सबको अनुभव में बदलकर साल भर चलने वाले पर्यटन रूप में विकसित कर रहे हैं। विकसित भारत 2047 में साल का हर दिन टूरिज्म सीजन होगा। विकसित भारत का टूरिज्म कैसा होगा ? विकसित भारत 2047 कॉन्सेप्ट पर पर्यटन में कितना काम... देश के पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत से भास्कर की खास बातचीत पर्यटन में रोजगार सृजन में कितना पोटेंशियल दिखता है? फॉर्मल टूरिज्म का देश की जीडीपी में योगदान 5.6 प्रतिशत है। जबकि वैश्विक परिदृश्य में दुनिया का 10 प्रतिशत। हम 2047 तक इसे 10% ले जाएंगे। हमारा शॉर्ट टर्म गोल 2030 तक 7 प्रतिशत का है। जिस दिन 10% होगा। उस दिन टूरिज्म सैक्टर एग्रीकल्चर के बाद दूसरा जॉब उत्पन्न करने वाला सैक्टर बनेगा। इससे मल्टीसैक्टरल एंप्लॉयमेंट जनरेट होता है।