नए साल में बिजली उत्पादन का हब बनेगा बारां
शुभम निमोदिया | बारां पानी और जमीन की पर्याप्त उपलब्धता और भोगौलिक परिस्थितियों के कारण बारां बिजली उत्पादन में नित नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। संभवतया देश में बारां एकमात्र जिला है, जहां छह प्रकार गैस, कोयला, भाप, सौर ऊर्जा, भूसा, मिनी हाइड्रो एनर्जी से बिजली उत्पादन हो रहा है। जिले के विभिन्न प्लांटों व इकाईयो की वर्तमान में कुल बिजली उत्पादन क्षमता 4251 मेगावाट है। इनमें सर्वाधिक बिजली उत्पादन कोयले से छबड़ा में 2320 मेगावाट और कवाई में 1320 मेगावाट सहित कुल 3640 मेगावाट बिजली बन रही है। जिला बिजली उत्पादन का हब बना हुआ है। जिले में विभिन्न प्लांट व उत्पादन इकाईयो पर छह प्रकार से बिजली बनाई जा रही है। इसमें गैस, कोयला, भाप, सौर ऊर्जा, भूसा, मिनी हाइड्रो एनर्जी से कुल 4251 मेगावाट बिजली बन रही है, वहीं छबड़ा थर्मल में अल्ट्रा सुपर क्रिटिकल 660-660 मेगावाट की दो इकाइयों तथा कवाई में अडाणी की 800-800 मेगावाट की चार नई इकाइयों की स्थापना से कुल क्षमता बढ़कर 8771 मेगावाट हो जाएगी। एनटीपीसी अंता: गैस और भाप से बनती है 419 मेगावाट बिजली एनटीपीसी अंता की स्थापना 16 जनवरी 1987 में हुई थी। यहां स्थापित संयंत्र की कुल क्षमता 419.33 मेगावाट है। गैस टरबाइन 3 हैं, जिनमें से प्रत्येक 88.71 मेगावाट तथा 1 स्टीम टरबाइन 153.2 मेगावाट है। संयंत्र का मुख्य ईंधन प्राकृतिक गैस है। गैस नहीं मिलने पर नैफ्था से बिजली उत्पादन होता है। मूंडला मिनी हाइड्रो प्रोजेक्ट नहरी पानी से 6 मेगावाट बिजली मांगरोल के मूंडला में चंबल की नहर पर मिनी हाइड्रोलिक पावर प्रोजेक्ट बना हुआ है। इससे नहर संचालित होने पर 6 मेगावाट बिजली बनाई जाती है। इसकी कमिशनिंग 1992 में हुई थी। जानिए... जिले में किस प्लांट से कितना हो रहा बिजली का उत्पादन एनटीपीसी अंता सौर ऊर्जा प्लांट : बन रही 90 मेगावाट बिजली पिछले दिनों अंता एनटीपीसी में 90 मेगावाट का सोलर प्लांट 435 एकड़ में स्थापित किया गया है। प्लांट की 425 करोड़ रुपए लागत आई है। निजी सोलर पैनलों से 80 मेगावाट बिजली बन रही है। मोतीपुरा थर्मल छबड़ा: कोयले से बनती है 2320 मेगावाट बिजली छबड़ा के मोतीपुरा चौकी थर्मल पावर प्लांट में 250-250 मेगावाट की चार इकाइयां हैं। पहली इकाई अक्टूबर 2009 में कमीशन हुई थी। छबड़ा सुपर क्रिटिकल प्लांट में 660 मेगावाट की दो इकाइयां हैं। यहां कुल 2320 मेगावाट बिजली उत्पादन होता है। साथ ही यहां 9600 करोड़ की लागत से 660-660 मेगावाट की अल्ट्रा सुपर क्रिटिकल इकाइयां मोतीपुरा में स्थापित करने की भी योजना है। इसको लेकर तैयारी चल रही है। साल 2026 में यहां काम शुरु होने की उम्मीद जताई जा रही है। अडानी थर्मल : कोयले से बनती है बिजली कवाई में स्थित अडानी थर्मल पावर प्लांट की स्थापना साल 2007 में हुई थी। कवाई में 660 मेगावाट की दो इकाइयां स्थित हैं। यह सुपर क्रिटिकल तकनीक पर कोयला आधारित थर्मल पावर प्लांट है। भूसे से हो रहा बिजली उत्पादन बारां जिले के भंवरगढ़ और पछाड में निजी उपक्रम में 8-8 मेगावाट बिजली उत्पादन के भूसा आधारित पावर प्लांट है।