शेरगढ़ अभयारण्य में वाइल्ड लाइफ सफारी की तैयारी शुरू:पर्यटन सुविधाएं विकसित, ईको टूरिज्म हब बनाने और चीता बसाने की योजना
बारां जिले के शेरगढ़ अभयारण्य में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए वाइल्ड लाइफ सफारी शुरू करने की कवायद तेज हो गई है। इसके तहत अभयारण्य में 4 एंट्री गेट, बुकिंग काउंटर सहित अन्य मूलभूत सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। सफारी के लिए रूट भी चिह्नित करने का काम शुरू कर दिया गया है। इन सुविधाओं के विकास के लिए 40 लाख रुपए की स्वीकृति मिली है। वन विभाग के अनुसार, शेरगढ़ में लेपर्ड की संख्या लगातार बढ़ रही है, जो एक अच्छा संकेत है। वर्तमान में 7 से अधिक लेपर्ड का मूवमेंट दर्ज किया गया है। अब यहां लेपर्ड सफारी शुरू करने के लिए भी तैयारियां की जा रही हैं। इसके लिए 4 स्थानों पर एंट्री गेट, टिकट काउंटर और बैरियर जैसी सुविधाएं विकसित होंगी। इनमें 11.75 लाख रुपए से वाइल्ड लाइफ में एक एंट्री गेट बनेगा। वहीं, 8.65 लाख रुपए से आंचोली में बारापाटी ट्रेक का एंट्री गेट और 11.72 लाख रुपए से एंटी पोचिंग कैंप के समीप एक और एंट्री गेट तैयार किया जाएगा। इन गेटों के माध्यम से पर्यटक वाइल्ड लाइफ क्षेत्र में प्रवेश कर सकेंगे। बारापाटी सहित 3 स्थानों पर पहले से वॉच टावर मौजूद हैं, और अब 9.84 लाख रुपए की लागत से एक नया वॉच टॉवर भी बनाया जाएगा, जहां से पर्यटक जंगल की हरियाली और वन्य जीवों की गतिविधियों का अवलोकन कर सकेंगे। नए सफारी रूट्स की पहचान के लिए सर्वे किया जा रहा है। इसके साथ ही लेपर्ड सफारी और चीता बसाने की योजना को देखते हुए अभयारण्य में प्री-बेस बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है। इसके तहत एनक्लोजर तैयार किए गए हैं, और अब हार्बीबोर एनक्लोजर भी विकसित किया जा रहा है। शेरगढ़ में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। परवन नदी के किनारे घने जंगल और ऐतिहासिक शेरगढ़ दुर्ग यहां की प्रमुख विशेषताएं हैं। यदि उचित सार-संभाल और सुविधाओं का विकास किया जाए, तो पर्यटकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है। शेरगढ़ को हेरिटेज विलेज के रूप में भी विकसित किया जा रहा है। शेरगढ़ दुर्ग बनेगा आइकोनिक टूरिस्ट डेस्टिनेशन इधर, शेरगढ़ को हेरिटेज विलेज के तौर पर विकसित किया जा रहा है। इसको लेकर भी टेंडर प्रक्रिया चल रही है। साथ ही शेरगढ़ दुर्ग को भी आइकोनिक टूरिस्ट डेस्टिनेशन के रूप में विकसित किया जाएगा। इस पर करीब 2 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे।