गहलोत बोले- बाड़मेर-बालोतरा की सीमा में फेरबदल तुगलकी फरमान:निर्णय जनता की सहूलियत के लिए नहीं, सियासी समीकरण साधने के लिए
बाड़मेर और बालोतरा की सीमाओं में फेरबदल के बाद सीएम अशोक गहलोत ने ट्वीट कर लिखा- यह स्पष्ट है कि यह निर्णय जनता की सहूलियत के लिए नहीं, बल्कि आगामी परिसीमन और सियासी समीकरणों को साधने के लिए लिया गया है। हमारी सरकार ने प्रशासन को जनता के द्वार तक पहुंचाने की मंशा से नए जिले बनाए थे, लेकिन मौजूदा भाजपा सरकार जनभावनाओं को दरकिनार कर केवल 'सियासी रोटियां' सेकने में व्यस्त है। गहलोत ने अपनी पोस्ट में लिखा- सीमाओं में 31 दिसंबर की आधी रात को आनन-फानन में किया गया फेरबदल सरकार का एक और तुगलती फरमान है। इससे गुड़ामालानी इलाके की जनता के लिए जिला मुख्यालय की दूसरी कम होने की बजाय और बढ़ गई है। यह जनता के साथ अन्याय है। बायतु को बाड़मेर और गुड़ामालानी-धोरीमन्ना को बालोतरा में शामिल करने का फैसला प्रशासनिक दृष्टि से कतई तर्कसंगत नहीं है। इससे गुड़ामालानी क्षेत्र की जनता के लिए जिला मुख्यालय की दूरी कम होने के बजाय और बढ़ गई है, जो आमजन के साथ घोर अन्याय है। राज्य सरकार ने पाकिस्तान से सटे दो जिलों बाड़मेर और बालोतरा का रातें-रात भूगोल बदल दिया है। 31 दिसंबर को राजस्व विभाग ने दोनों जिलों के इलाकों का पुनर्गठन करने की अधिसूचना जारी कर दी। इधर, धोरीमन्ना में लोगों ने धरना शुरू कर दिया है। पूर्व मंत्री हेमाराम चौधरी ने भी धरने का समर्थन करते हुए धरने पर जाने की बात कही है। नेताओं के सियासी गणित पर पड़ सकता है असर जिलों की सीमाओं में बदलाव से अब आगे विधानसभा सीटों का परिसीमन भी इसी आधार पर होगा। बायतू से कांग्रेस विधायक और मध्यप्रदेश कांग्रेस प्रभारी हरीश चौधरी चुनाव लड़ते हैं, इस बदलाव के कारण आगे उन्हें सियासी नुकसान हो सकता है। वहीं, गुढ़ामालानी मंत्री केके विश्नोई का निर्वाचन क्षेत्र है। इस बदलाव के पीछे अब स्थानीय राजनीति गर्मा गई है। दोनों जिलों में एक दूसरे के इलाके शामिल करके अदला-बदली की गई है। बायतु उपखंड को बालोतरा से निकालकर फिर से बाड़मेर में शामिल कर दिया है। बाड़मेर के गुढ़ामालानी, धोरीमन्ना को बालोतरा में शामिल किया है। इसे लेकर सियासी विरोध शुरू हो गया है। अब पढ़िए- नेताओं ने क्या कहा हरीश चौधरी: कांग्रेस विधायक ने सोशल मीडिया पर शायराना अंदाज में विरोध जताया और उन्होंने लिखा- 'राजनीति मकसद से तहसीलों को तोड़ा, न डरूंगा, न झुकूंगा, मैं अपने लोगों के साथ खड़ा हूं, चाहे किधर भेजो मुझे।' उम्मेदाराम बेनीवाल: सांसद ने सोशल मीडिया पोस्ट में इसे तुगलकी व्यवस्था बताया है। उन्होंने लिखा कि बीजेपी सरकार का यह निर्णय लोगों को और दूर धकेलने का कारण बन गया है। हेमाराम चौधरी: पूर्व मंत्री ने भी अधिसूचना पर सवाल उठाते हुए कहा कि धोरीमन्ना उपखंड को बाड़मेर से हटाकर बालोतरा में शामिल करना और गुड़ामालानी उपखंड के पश्चिमी व दक्षिणी गांवों में किया गया प्रशासनिक बदलाव जमीनी हकीकत और लोगों की सुविधाओं के विपरीत है। बाड़मेर और बालोतरा में अब कौनसी तहसील और उपखंड नए बदलाव के बाद अब बालोतरा में अब 5 उपखंड और 9 तहसील और 5 उपतहसील है। वहीं, बाड़मेर में 7 उपखंड, 11 तहसील और 7 उप तहसील रहेगी। बायतु विधानसभा क्षेत्र को पुनर्गठित किया गया है। पहले बायतु विधानसभा में गिड़ा, पाटोदी और बायतु तहसील शामिल थीं। नए निर्णय के तहत गिड़ा और पाटोदी को बालोतरा जिले में ही रहेंगी। जबकि बायतु तहसील को दोबारा बाड़मेर जिले में शामिल किया गया है। वहीं, गुड़ामालानी और धोरीमन्ना उपखंड को नए जिले बालोतरा में जोड़ा गया है। नोटिफिकेशन के बाद भाजपा समर्थकों ने खुशी जताई, वहीं कांग्रेस ने इसे जनविरोधी निर्णय बताते हुए विरोध शुरू कर दिया। पढ़ें राजस्थान की सियासत से जुड़ी ये खबरें… राजस्थान के 2 जिलों का रातोंरात भूगोल बदला:बाड़मेर और बालोतरा की सीमाओं में फेरबदल; भाजपा ने पटाखे फोड़े, कांग्रेस का विरोध राजस्थान में कलेक्टर-SP के ट्रांसफर पर रोक:राज्य निर्वाचन आयोग ने जारी किए आदेश; 3 साल से ज्यादा समय से पोस्टेड अधिकारी हटेंगे