दो साल बाद भी 'ग्राउंड' पर नहीं उतरी बजट घोषणा:हर जिले में शुरू होनी थी खेल एकेडमी, झुंझुनूं को मिली थी बास्केटबॉल एकेडमी
राजस्थान को 'खेल हब' बनाने का सरकारी दावा फिलहाल प्रशासनिक फाइलों में अटका है। राज्य सरकार के कार्यकाल का तीसरा साल शुरू होने को है, लेकिन बजट में घोषित की गईं 41 नई खेल एकेडमी अब तक धरातल पर नहीं उतर पाई हैं। झुंझुनूं जिले को बास्केटबॉल एकेडमी की सौगात मिली थी, जिससे स्थानीय खिलाड़ियों में भारी उत्साह था। लेकिन अभी यह एकेडमी सिर्फ कागजों में ही हुई है। झुंझुनूं ने देश को दर्शन सिंह जोझिया, ओमप्रकाश ढाका और शरद दाधीच जैसे अंतरराष्ट्रीय सितारे दिए हैं। वर्तमान में भी मीनाक्षी जोशी और सिया शेखावत जैसी बेटियां इस खेल को आगे बढ़ा रही हैं। कोच लव कुमार के अनुसार, एकेडमी के लिए स्टेडियम में जगह भी चिह्नित कर ली गई है, लेकिन सरकारी आदेशों के बिना सब रुका पड़ा है। सरकार की ओर से इन एकेडमियों के लिए खेलों का चयन और जिलों का आवंटन तो कर दिया गया, लेकिन खिलाड़ियों के लिए मैदान पर बुनियादी सुविधाएं विकसित करना तो दूर, अस्थाई प्रवेश प्रक्रिया तक शुरू नहीं की गई है। बास्केटबॉल खिलाड़ी निशा का कहना है कि घोषणा हुए लंबा वक्त बीत चुका है। अब खिलाड़ियों का धैर्य जवाब दे रहा है। अगर सरकार जल्द ही बुनियादी ढांचा तैयार नहीं कर सकती, तो कम से कम अस्थाई ट्रायल लेकर खिलाड़ियों को प्रैक्टिस के लिए बुलाना चाहिए। हर जिले में एक खेल एकेडमी राज्य सरकार ने प्रदेश के हर जिले में एक विशेष खेल एकेडमी खोलने का वादा किया था ताकि ग्रामीण और शहरी प्रतिभाओं को तराशा जा सके। विडंबना यह है कि जहां एक ओर सरकार की सुस्त कार्यप्रणाली के कारण सरकारी एकेडमियां ठप पड़ी हैं, वहीं निजी एकेडमी संचालकों ने इस मौके का फायदा उठाते हुए प्रदेश भर में अपनी जड़ें जमा ली हैं। गरीब और मध्यम वर्गीय खिलाड़ी आज भी सरकारी कोच और सुविधाओं की राह देख रहे हैं। यह सुविधाएं मिलती हैं सरकारी एकेडमी में राजस्थान राज्य क्रीड़ा परिषद (RSSC) के माध्यम से संचालित होने वाली इन एकेडमियों में खिलाड़ियों को विश्वस्तरीय सुविधाएं देने का प्रावधान है। निशुल्क प्रशिक्षण: NIS क्वालिफाइड कोच द्वारा कोचिंग। आवासीय सुविधा: खिलाड़ियों के रहने, भोजन और डाइट का पूरा खर्चा सरकार वहन करती है। उपकरण व किट: ड्रेस और खेल से जुड़े महंगे उपकरण सरकारी खर्चे पर उपलब्ध कराए जाते हैं। शिक्षा का जिम्मा: एकेडमी में रहने वाले खिलाड़ियों की पढ़ाई का खर्च भी सरकार द्वारा उठाया जाता है। जिलावार आवंटित प्रमुख एकेडमी: