कुम्हेर में सफाई-कर्मचारियों की हड़ताल से कस्बे में कचरा जमा:नई संस्था को टेंडर मिलने पर विरोध, बदबू से स्थानीय लोग परेशान
डीग जिले के कुम्हेर नगर पालिका क्षेत्र में सफाई कर्मचारियों की हड़ताल से हालात बिगड़ गए हैं। नई संस्था को टेंडर देने और कम वेतन तय करने के विरोध में कर्मचारी काम पर नहीं लौटे, जिससे कस्बे में जगह जगह कूड़े के ढेर लग गए हैं और लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कस्बे में जगह जगह जमा हुआ कचरा कुम्हेर नगर पालिका क्षेत्र में सफाई व्यवस्था पूरी तरह ठप पड़ी है। सफाई कर्मचारियों की हड़ताल के चलते सड़कों, गलियों और सार्वजनिक स्थानों पर कूड़े के ढेर जमा हो गए हैं। इन कूड़े के ढेरों पर जानवरों का झुंड लगा रहता है, जिससे आमजन का आना जाना मुश्किल हो गया है। बदबू और जानवरों से बढ़ी परेशानी स्थानीय निवासी रमेश ने बताया कि कई दिनों से कोई भी सफाई कर्मचारी कूड़ा उठाने नहीं आ रहा है। कूड़े के ढेरों से तेज बदबू फैल रही है। जानवर कचरे में मुंह मारते रहते हैं और राहगीरों को परेशान कर रहे हैं। इससे कस्बे में रहने वाले लोगों को रोजमर्रा के कामों में दिक्कत आ रही है। नई संस्था को टेंडर देने से नाराज कर्मचारी सफाई कर्मचारियों का कहना है कि वे पिछले करीब 12 वर्षों से अस्थाई कर्मचारी के रूप में नगर पालिका कुम्हेर में सफाई कार्य कर रहे हैं। 1 जनवरी 2026 से नगर पालिका द्वारा सफाई कार्य का टेंडर सोनचिरैया शहरी आजीविका केंद्र संस्था को दे दिया गया है। इसी फैसले से कर्मचारी नाराज हैं। वेतन घटाने का आरोप कर्मचारियों ने बताया कि पहले उन्हें 7 हजार रुपए प्रतिमाह वेतन दिया जाता था और इसके साथ ईएसआई और पीएफ की सुविधा भी मिलती थी। नई संस्था द्वारा केवल 6 हजार 400 रुपए वेतन देने की बात कही जा रही है। इसके अलावा इमरजेंसी में किसी भी तरह का एडवांस नहीं देने की शर्त रखी गई है। परिवार चलाना होगा मुश्किल सफाई कर्मचारियों का कहना है कि कम वेतन और नई शर्तों के कारण उनके लिए परिवार का पालन पोषण करना मुश्किल हो जाएगा। इसी वजह से सभी सफाई कर्मचारियों ने एकजुट होकर 1 जनवरी 2026 से हड़ताल शुरू कर दी है। विधायक को सौंपा था ज्ञापन सफाई कर्मचारियों ने बताया कि उन्होंने इस मुद्दे को लेकर पहले विधायक को ज्ञापन भी सौंपा था, लेकिन समाधान नहीं होने पर हड़ताल का रास्ता अपनाना पड़ा। वहीं हड़ताल के चलते कस्बे में सफाई व्यवस्था चरमरा गई है और आम लोग सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं।