1 हजार मरीजों में से 170 को पता ही नहीं था उन्हें हाई ब्लड प्रेशर है
भास्कर संवाददाता | पाली जिले में बढ रहे ब्लड प्रेशर हाई के मरीजों को देखते हुए बांगड़ अस्पताल के तीन डॉक्टर्स ने ओपीडी में आने वाले मरीजों पर रिसर्च की। उन्होंने 1 हजार मरीजों का चयन कर इनका हर पांच मिनट में 2 बार बीपी की जांच की। चयनित मरीजों में से 52.8 प्रतिशत पुरुष और 47.8 प्रतिशत महिलाएं थीं। इसमें 63.4 प्रतिशत मरीज ग्रामीण व 36.6 प्रतिशत शहरी क्षेत्र के थे। इन सभी एक हजार मरीजों में से 31 प्रतिशत मरीजों में रिपोर्ट में हाई ब्लड प्रेशर की बीमारी मिली। वहीं 17 प्रतिशत मरीज ऐसे हैं जिन्हें दवा लेने के बाद भी बीपी नॉर्मल नहीं है। इनमें से 21.8 प्रतिशत लोग तंबाकू का सेवन करते थे। डॉ.पंकज माथुर, डॉ. रक्षा व्यास व डॉ. रीमा व्यास ने जनवरी से दिसबंर 2024 यानि 12 महीने तक हाइपर टेंशन बीमारी पर रिसर्च की। इसमें तीनों डॉक्टर ने बांगड़ अस्पताल की ओपीडी में आने वाले 1 हजार मरीजों को शामिल किया है। जिनकी उम्र 18 व 18 से अधिक उम्र के मरीजों का चयन किया। फिर उनके उम्र, लिंग, निवास व शिक्षा के साथ शराब का सेवन, धूम्रपान व शारीरिक गतिविधियों के साथ हाल ही में चल रही दवाओं के बारे में जानकारी ली। फिर सभी का स्फिग्मोमैनो मीटर का उपयोग करके 5 मिनट के अंतराल में दो बार बीपी की जांच करके रिकॉर्ड तैयार । 1 हजार मरीजों में से 312 मरीजों को हाइपर टेंसन (बीपी हाई) की बीमारी थी। इन 312 में से 142 लोगों को ही पता था कि इन्हें बीपी है। 170 को पता नहीं था कि उनका भी ब्लड प्रेशर हाई है। इसमें भी 142 में से 119 मरीज ही केवल हाई ब्लड प्रेशर की दवा ले रहे थे। इन 119 में से भी केवल 68 लोगों का बीपी कंट्रोल में था। मतलब 51 मरीज ऐसे थे जिनका दवा खाने के बाद भी बीपी हाई कंट्रोल में नहीं था। ऐसे मरीजों को डॉक्टर दिखा कर दवा बदलने की जरूरत है। लेकिन वे शुरुआत में डॉक्टर द्वारा लिखी दवा ही ले रहे थे। {बीजिंग में एक स्टडी रिपोर्ट में दावा किया है कि अगर आप व्यस्त सड़क के करीब रहते हैं, तो आपको हाई ब्लड प्रेसर का जोखिम ज्यादा है। यह स्टडी 40 से 60 साल तक के 2.40 लाख से ज्यादा लोगों पर की गई है। मेडिसिन विभाग के डॉ. पंकज माथुर, एनीस्थिसिया विभाग की डॉ. रक्षा व्यास व पैथोलॉजी की डॉ. रीमा व्यास ने बांगड़ ओपीडी के मरीजों पर रिसर्च की {डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के अनुसार दुनिया में 30 से 79 साल की उम्र के 1.2 बिलियन से ज्यादा लोग हाइपरटेंशन से पीड़ित हैं, भारत जैसे देशों में ऐसे मरीजों की संख्या ज्यादा है। {डॉ. माथुर ने बताया कि मनुष्य के शरीर में ब्लड बहुत तेज दबाव से नसों में बहता है, इससे नसें सख्त और कमजोर हो जाती हैं। साथ ही समय के साथ नसों में ब्लॉकेज बनने लगता है। लेकिन जब दिल की नसों पर लगातार दबाव बनने लगता है तो नसे सिकुड़ने लग जाती है और अंत में ब्लॉक हो जाती है। ब्लड नसों के माध्यम से दिल तक नहीं पहुंच पाता है। जिससे हार्ट अटैक आ जाता है।