कुम्हेर में सफाई व्यवस्था ठप,10 दिन से हड़ताल पर कर्मचारी:सड़कों पर लगे कूड़े के ढेर, नई कंपनी की नीतियों से नाराज सफाईकर्मी
डीग के कुम्हेर कस्बे में पिछले 10 दिनों से सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। नगर पालिका द्वारा नियुक्त नई कंपनी की नीतियों से नाराज सफाई कर्मचारी हड़ताल पर चले गए हैं। नतीजतन, कस्बे के प्रमुख बाजारों, गलियों और रिहायशी इलाकों में जगह-जगह कूड़े के ढेर लगे हुए हैं। इन कचरे के ढेरों पर जानवरों के झुंड मंडराते नजर आ रहे हैं, जिससे आमजन को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बिना टेंडर प्रक्रिया कंपनी को सौंपा गया ठेका अस्थाई सफाई कर्मचारी विक्रम ने बताया कि पिछले करीब 10 वर्षों से सभी सफाई कर्मचारी ठेके के माध्यम से नगर पालिका कुम्हेर में सेवाएं दे रहे हैं। उन्होंने कहा - जिस फर्म के जरिए हम काम कर रहे थे, उसकी निविदा 31 दिसंबर को समाप्त हो गई। इसके बाद कोई नई टेंडर प्रक्रिया नहीं की गई और बिना निविदा निकाले ही सोन चिरैया नाम की कंपनी को सफाई का ठेका दे दिया गया। विक्रम के अनुसार, इस कंपनी को 40 सफाई कर्मचारी उपलब्ध कराने थे, लेकिन नियुक्ति प्रक्रिया और नियमों को लेकर कर्मचारियों में असंतोष है। नई कंपनी कम वेतन दे रही सफाई कर्मचारियों का आरोप है कि नई कंपनी सोन चिरैया उन्हें मात्र 6465 रुपए प्रतिमाह वेतन दे रही है।विक्रम ने बताया- पहले पाराशर कंस्ट्रक्शन कंपनी हमें 7410 रुपए प्रतिमाह देती थी। इसके साथ ही ESI और PF जैसी सुविधाएं भी मिलती थीं। नई कंपनी में न तो वेतन बढ़ाया गया है और न ही कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा से जुड़े लाभ दिए जा रहे हैं। आपात स्थिति में एडवांस भी नहीं कर्मचारियों का कहना है कि नई कंपनी की शर्तों में यह भी शामिल है कि किसी भी आपात स्थिति में एडवांस राशि नहीं दी जाएगी।"घर में कोई परेशानी आ जाए तो एडवांस भी नहीं मिलेगा, ऐसे में इतने कम वेतन में काम करना मुश्किल हो गया है,"एक अन्य कर्मचारी ने बताया। करीब 40 सफाईकर्मी हड़ताल पर नई नीतियों से नाराज होकर करीब 40 सफाई कर्मचारी पिछले 10 दिनों से हड़ताल पर हैं। इसके चलते कुम्हेर कस्बे की सफाई व्यवस्था पूरी तरह ठप हो चुकी है। बाजारों और कॉलोनियों में बदबू फैल रही है, जिससे बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है। समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन तेज करने की चेतावनी सफाई कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो वे आंदोलन को और तेज करेंगे। हम काम करना चाहते हैं, लेकिन सम्मानजनक वेतन और सुविधाएं जरूरी हैं।