बाड़मेर में दूसरे दिन भी घना कोहरा और शीतलहर:100 मीटर तक सिमटी विजिबिलिटी, तापमान में 4-6 डिग्री गिरावट
बाड़मेर में लगातार दूसरे दिन भी घना कोहरा छाया रहा। नए साल के बाद आई मावठ के असर से सुबह 9 बजे तक सूरज कोहरे की ओट में छिपा रहा। शहर से लेकर गांव तक दृश्यता बेहद कम रही, जिससे वाहनों की रफ्तार थमी रही और सड़कों पर आवाजाही सीमित नजर आई। एक दिन में 5 डिग्री तक गिरा तापमान मावठ की बारिश के बाद तापमान में 4 से 6 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट दर्ज की गई। गुरुवार को अधिकतम तापमान 5 डिग्री गिरकर 19 डिग्री और न्यूनतम तापमान 13 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। एक दिन पहले अधिकतम तापमान 24.2 डिग्री था, जिससे अचानक ठंड बढ़ गई। शीतलहर की चपेट में पूरा रेगिस्तान शीतलहर के चलते पूरा रेगिस्तानी इलाका ठंड की चपेट में रहा। गुरुवार को दिनभर लोग ठिठुरते नजर आए। नए साल की सुबह भी कोहरे के साथ शुरू हुई। घने कोहरे के कारण नेशनल हाईवे सहित अन्य सड़कों पर यातायात प्रभावित रहा। शुक्रवार को भी 100 मीटर तक सिमटी विजिबिलिटी दूसरे दिन शुक्रवार को भी चारों ओर घना कोहरा छाया रहा। कई इलाकों में विजिबिलिटी घटकर करीब 100 मीटर तक रह गई। पहाड़ और दूरस्थ इलाके कोहरे में छिपे नजर आए। सुबह करीब 9.30 बजे के बाद धीरे धीरे कोहरा छंटना शुरू हुआ। पश्चिमी विक्षोभ बना मौसम बदलने की वजह मौसम विशेषज्ञों के अनुसार पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से अचानक मौसम में बदलाव आया है। उत्तर भारत के पहाड़ों पर हो रही बर्फबारी और वहां से आ रही सर्द हवाओं के कारण राजस्थान में कम दबाव का क्षेत्र बना। बाड़मेर जैसे शुष्क क्षेत्र में नमी पहुंचने से बादल बने और मावठ की स्थिति बनी। बारिश से हवा में मौजूद धूल के कण साफ हुए, लेकिन सुबह के समय कोहरा छा गया। अगले दो दिन कोहरे की संभावना मौसम विभाग के अनुसार आने वाले 48 से 72 घंटों तक बाड़मेर और आसपास के क्षेत्रों में घना कोहरा बना रह सकता है। न्यूनतम तापमान में 2 से 4 डिग्री तक और गिरावट की संभावना है। अगले दो दिनों तक आसमान में आंशिक बादल छाए रहने से धूप का असर कम रहेगा। रबी फसलों के लिए लाभकारी मावठ कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यह मावठ जीरा, ईसबगोल और अन्य रबी फसलों के लिए फायदेमंद है। मीठे पानी की बारिश से फसलों की बढ़वार में मदद मिलेगी। इन दिनों फसलों को 40 से 50 दिन हो चुके हैं और वे बढ़ने की अवस्था में हैं। इस सीजन में पहली बार चली शीतलहर और मावठ को किसानों के लिए लाभकारी माना जा रहा है।