राजसमंद में बदल छाए, 11 बजे बाद निकली धूप:कोहरे से राहत मिली, मौसम में गलन बढ़ने से ठिठुरन बढ़ी
राजसमंद जिले में मौसम का मिजाज लगातार दूसरे दिन भी बदला-बदला नजर आया। आज आसमान में बादल छाए रहे, जबकि कल की तुलना में कोहरे के असर में कुछ कमी देखी गई। हालांकि कल दिनभर बारिश की आशंका बनी रही, लेकिन बारिश नहीं हुई। वहीं सुबह के समय घने कोहरे के कारण जनजीवन पूरी तरह प्रभावित रहा था। 11 बजे बाद निकली धूप आज कोहरे से लोगों को थोड़ी राहत जरूर मिली, लेकिन बादलों के कारण सुबह 11 बजे तक भी धूप नहीं निकल पाई। धूप नहीं निकलने से ठंड का असर कल के मुकाबले और अधिक हो गया, जिससे लोगों को गलन महसूस करनी पड़ी। सर्द मौसम के चलते सुबह के समय बाजारों में लोगों की आवाजाही कम रही और लोग केवल जरूरी काम से ही घरों से बाहर निकले। शहर के कई इलाकों में लोगों ने सर्दी से बचाव के लिए अलाव का सहारा लिया। वहीं कड़ाके की ठंड के कारण किसानों को खेती-किसानी के कामों में परेशानियों का सामना करना पड़ा। सिंचाई कार्य के दौरान ठंड का अधिक असर देखने को मिला। ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालकों ने मवेशियों को सर्दी से बचाने के लिए तिरपाल और चद्दरों से ढकने की व्यवस्था की।
राजसमंद में लगातार दूसरे दिन आसमान में बादल छाए रहे। कोहरा कम हुआ लेकिन धूप नहीं निकलने से ठंड और गलन बढ़ गई।
राजसमंद जिले में मौसम का मिजाज लगातार दूसरे दिन भी बदला-बदला नजर आया। आज आसमान में बादल छाए रहे, जबकि कल की तुलना में कोहरे के असर में कुछ कमी देखी गई।
.
हालांकि कल दिनभर बारिश की आशंका बनी रही, लेकिन बारिश नहीं हुई। वहीं सुबह के समय घने कोहरे के कारण जनजीवन पूरी तरह प्रभावित रहा था।
11 बजे बाद निकली धूप
आज कोहरे से लोगों को थोड़ी राहत जरूर मिली, लेकिन बादलों के कारण सुबह 11 बजे तक भी धूप नहीं निकल पाई। धूप नहीं निकलने से ठंड का असर कल के मुकाबले और अधिक हो गया, जिससे लोगों को गलन महसूस करनी पड़ी। सर्द मौसम के चलते सुबह के समय बाजारों में लोगों की आवाजाही कम रही और लोग केवल जरूरी काम से ही घरों से बाहर निकले।
शहर के कई इलाकों में लोगों ने सर्दी से बचाव के लिए अलाव का सहारा लिया। वहीं कड़ाके की ठंड के कारण किसानों को खेती-किसानी के कामों में परेशानियों का सामना करना पड़ा। सिंचाई कार्य के दौरान ठंड का अधिक असर देखने को मिला। ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालकों ने मवेशियों को सर्दी से बचाने के लिए तिरपाल और चद्दरों से ढकने की व्यवस्था की।