आदिवासी अंचल के लिए संजीवनी:12 माह में 937 रोगी, 572 को नियमित इलाज, सिकल सेल केंद्र बना जीवन रक्षक
राजस्थान के आदिवासी अंचलों में लंबे समय से चुनौती बना सिकल सेल एनीमिया रोग अब नियंत्रित और प्रबंधित होने वाली स्थिति के रूप में सामने आ रहा है। बड़ी वजह है उदयपुर में स्थापित देश का दूसरा सिकल सेल कॉम्पिटेंस सेंटर, जो आदिवासी मरीजों के लिए उम्मीद, उपचार और जीवन की नई राह बनकर उभरा है। केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्रालय की ओर से दिसंबर-2024 में शुरू यह केंद्र आज स्क्रीनिंग से लेकर विशेषज्ञ उपचार तक वन-स्टॉप सॉल्यूशन के रूप में काम कर रहा है। यहां सिकल सेल की शीघ्र पहचान, नियमित फॉलोअप, दवाइयां, टीकाकरण और विशेषज्ञ परामर्श सुविधा एक ही छत के नीचे उपलब्ध हैं। अप्रैल 2025 से राज्य सरकार द्वारा सभी आयु वर्ग के मरीजों को भर्ती सुविधा अनिवार्य किए जाने के बाद उपचार का दायरा और व्यापक हुआ है। वर्ष 2025 में अब तक केंद्र में 365 मरीजों का उपचार हुआ। इनमें 18 वर्ष से कम आयु के 137 और 18 वर्ष से अधिक आयु के 60 मरीज शामिल हैं। इसी अवधि में 168 नए मरीजों की पहचान की गई। वर्ष 2022 से अब तक 572 मरीज नियमित फॉलोअप में हैं, जबकि कुल 937 मरीज इस केंद्र से जुड़ चुके हैं। एमबी अधीक्षक डॉ. आरएल सुमन का कहना है कि लगातार टीम को भी बढ़ाया जा रहा है। हमारा प्रयास है कि हर मरीज बेहतर जीवन जी सके। जब मौत से लौटे मरीज, तब दिखी केंद्र की ताकत केस 1 - बलराम को सिकल सेल चेस्ट सिंड्रोम के कारण गंभीर सांस की तकलीफ थी। 10 दिन वेंटिलेटर और 6 बार ब्लड ट्रांसफ्यूजन के बाद उनकी जान बचाई जा सकी। वे अब नियमित फॉलोअप में हैं। केस 2 - ऋषभदेव निवासी महेश कटारा का हीमोग्लोबिन मात्र 2 ग्राम रह गया था। हेमोलिटिक क्राइसिस की स्थिति में 10 बार रक्त चढ़ाकर उन्हें नया जीवन दिया गया। अब वे भी फॉलोअप उपचार में हैं। जिलावार पहुंच ने बढ़ाया भरोसा उदयपुर (99), बांसवाड़ा (48), प्रतापगढ़ (14), डूंगरपुर (10) और सिरोही, पाली, बाड़मेर जैसे अन्य जिलों से आए 26 मरीजों का उपचार किया गया। यह दर्शाता है कि केंद्र न केवल उदयपुर, बल्कि पूरे दक्षिण राजस्थान के लिए रेफरल हब बन चुका है। मिशन 2047 : सिकल सेल मुक्त पीढ़ी की दिशा में कदम सिकल सेल एक आनुवंशिक विकार है। इसमें लाल रक्त कणिकाएं हंसिया के आकार की हो जाती हैं और रक्त प्रवाह में बाधा आती है। केंद्र सरकार के सिकल सेल उन्मूलन मिशन-2047 के तहत इस केंद्र का लक्ष्य केवल उपचार नहीं, बल्कि जन्म से ही रोकथाम, शत-प्रतिशत पहचान और समय पर इलाज से भविष्य में सिकल सेल मुक्त पीढ़ी का निर्माण है। इसके साथ केंद्र चिकित्सा शिक्षा और शोध कार्यों में भी सक्रिय भूमिका निभा रहा है। पांच बेड से शुरुआत, अब 15, इलाज के लिए मजबूत फौज यह केंद्र बाल चिकित्सालय में बना है। शुरुआत में 5 बेड थे। इसे मई 2025 में विस्तार दिया गया। अब इमरजेंसी में 10 अतिरिक्त बेड हैं। अब तक 10 जिलों से 30 डॉक्टर व 600 से नर्सेज को प्रशिक्षण दिया गया है। इस मिशन को सफल बनाने में असिस्टेंट नोडल ऑफिसर डॉ. भूपेश जैन, नर्सिंग इंचार्ज ललित पारगी, फिजियोथेरेपिस्ट दर्शी, भावना जैन, राजेश्वरी, रेखा डामोर, उर्मिला गुर्जर और दीपेश का विशेष योगदान है।