पंचायत चुनाव एक साथ कराने की तैयारी:12 जिलों के परिषद-पंचायत समिति बोर्ड भंग करने के संकेत, चुनाव आयोग ने पूछा था-स्थिति स्पष्ट करे सरकार
राज्य सरकार ने ‘वन स्टेट वन इलेक्शन’ की तैयारी शुरू कर दी है। इसके लिए जयपुर-जोधपुर सहित प्रदेश के 12 जिलों में जिला परिषद और पंचायत समितियों के बोर्ड समय से पहले भंग भी कर सकती है। हाल ही में राज्य चुनाव आयोग ने चिट्ठी लिखकर सरकार से ‘वन स्टेट वन इलेक्शन’ पर स्थिति स्पष्ट करने को कहा था। चिट्ठी के बाद प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से सरपंचों को बुलाकर ‘वन स्टेट वन इलेक्शन’ पर चर्चा हो चुकी है। संबंधित सरपंचों को बोर्ड भंग करने के संकेत दे दिए गए हैं। अब बजट पूर्व संवाद के दौरान मुख्यमंत्री भी सरपंच प्रतिनिधियों से बात कर सकते हैं। अगर ऐसा हुआ तो जिन पंचायत समितियों और जिला परिषदों का कार्यकाल बाकी है, उसे समाप्त कर एक साथ चुनाव कराए जा सकते हैं। हालांकि इस राह में अभी भी कई चुनौतियां बनी हुई हैं। संडे बिग स्टोरी में पढ़िए- क्या है ‘वन स्टेट वन इलेक्शन’ और अभी को लेकर क्या स्थिति है? कार्यकाल एक साथ पूरा नहीं होने के हालत क्यों हुए? आमतौर पर प्रदेश के सभी जिलों में पंचायत चुनाव एक साथ होते आए हैं। कोरोना काल में (2020 से 2022) प्रदेश की ज्यादातर पंचायतों का कार्यकाल पूरा होने के बाद चुनाव नहीं हो पाए थे। तब सरकार ने सरपंचों को ही प्रशासक बनाकर उनका कार्यकाल बढ़ा दिया था। सरपंचों और वार्ड पंचों की एक कमेटी बनाकर चुनाव होने तक उसे ही प्रशासक के पावर दे दिए गए थे। पुराने जिलों के हिसाब से 21 और नए के हिसाब से 25 जिलों में पंचायत समितियों कार्यकाल कब का समाप्त हो चुका है। पुराने 12 जिलों (नए के हिसाब से 16) में कई पंचायत समितियों और जिला परिषदों का कार्यकाल अभी बाकी है। इधर, सुप्रीम कोर्ट ने भी 15 अप्रैल 2026 तक चुनाव करवाने की हाईकोर्ट की डेडलाइन पर मुहर लगा दी है। ऐसे में राज्य चुनाव आयोग ने अपनी तैयारी शुरू कर दी है। चुनाव आयोग के लेटर के बाद सरकार में तैयारियां तेज सरकार चाहती है कि ‘वन स्टेट वन इलेक्शन’ के तहत सभी ग्राम पंचायत और पंचायत समितियों के चुनाव एक साथ हों, लेकिन इसका निर्णय भी सरकार को ही लेना है। 3 दिन पूर्व 8 जनवरी को ही राज्य चुनाव आयोग ने भी पत्र लिखकर पूछा था- ‘वन स्टेट वन इलेक्शन’ के तहत पंचायत चुनाव कराने हैं या नहीं, स्थिति स्पष्ट करें। ऐसे में सरकार के स्तर पर भी तैयारियां शुरू हो गई हैं। CMO में पंचायती राज से जुड़े अधिकारियों ने विभिन्न हिस्सों से सरपंच प्रतिनिधियों को बुलाकर चर्चा की थी। अब 17 जनवरी को बजट पूर्व संवाद के दौरान फाइनल डिस्कशन मुख्यमंत्री स्तर पर हो सकता है। CMO में अधिकारियों के साथ मीटिंग में शामिल रहे राजस्थान सरपंच संघ के प्रवक्ता रफीक पठान कहते हैं- राज्य सरकार ने बात करने के लिए हमें मुख्यमंत्री कार्यालय बुलाया था। अधिकारियों ने एक साथ सभी जिलों में चुनाव कराने के संकेत दिए थे। हमसे हमारी राय पूछी गई थी। जवाब में हमने यही कहा कि जैसा सरकार उचित समझे। हम सरकार के फैसले के साथ हैं। जयपुर के सांगानेर में नरसिंहपुरा ग्राम पंचायत के प्रशासक बंशीधर गढ़वाल बताते हैं- सरकार वन स्टेट वन इलेक्शन के तहत चुनाव कराना चाहती है। हम सरकार के हर फैसले के साथ हैं। हम भी चाहते हैं कि एक साथ चुनाव हों। अब सरकार ने 15 जनवरी के बाद बात करने के लिए बुलाया है। हालांकि अभी तारीख तय नहीं हुई है। वन स्टेट वन इलेक्शन के लिए राज्य सरकार को करने होंगे ये 2 काम 1. सरकार ‘वन स्टेट वन इलेक्शन’ का फॉर्मूला लागू करना चाहती है तो उसे 12 जिलों की जिला परिषद और पंचायत समितियों के चुनाव कार्यकाल समाप्ति से पहले करानी होगी। 2. जानकारों के मुताबिक सरकार नगरीय निकाय और पंचायतीराज के चुने हुए बोर्ड को 6 महीने पहले भंग कर सकती है। ऐसे में सभी जिलों के चुनाव एक साथ कराए जा सकते हैं। सरकार ऐसा नहीं करती है तो वन स्टेट वन इलेक्शन फॉर्मूला फेल हो सकता है। सरकार के सामने दिक्कत क्या है? जानकारों के मुताबिक, राज्य सरकार के सामने दिक्कत यह है कि जिन जिला परिषदों और पंचायत समितियों का कार्यकाल समाप्त होने में 8 महीने बाकी है। वह मामला कोर्ट में जा सकता है। एक अप्रैल के हिसाब से 4 जिलों (बारां, करौली, कोटा और श्रीगंगानगर) में जिला परिषद और पंचायत समितियों का कार्यकाल पूरा होने में 8 महीने का समय बचा है। अगर इन जिलों के बोर्ड समय से पहले सरकार भंग करती है तो उन जनप्रतिनिधियों के पास कोर्ट में जाने का विकल्प रहेगा। फिलहाल वन स्टेट वन इलेक्शन के लिए सबसे बड़ी अड़चन 12 जिलों (नए जिलों को छोड़कर) की 12 जिला परिषद और करीब 135 पंचायत समितियां हैं। क्योंकि इनका कार्यकाल बचा हुआ है। शेष जिलों में कार्यकाल समाप्त हो गया है। इन जिलों में हाईकोर्ट ने अप्रैल में ही चुनाव कराने के निर्देश दिए हैं। 21 जिलों (पुराने) में कार्यकाल पूरा, सरकार ने प्रशासक लगाए जैसलमेर, उदयपुर, बाड़मेर, अजमेर, पाली, भीलवाड़ा, राजसमंद, नागौर, बांसवाड़ा, बीकानेर, बूंदी, चित्तौड़गढ़, चूरू, डूंगरपुर, हनुमानगढ़, जालोर, झालावाड़, झुंझुनूं, प्रतापगढ़, सीकर, टोंक की करीब 222 पंचायत समितियों का कार्यकाल पूरा हो गया। सरकार ने जिला परिषदों में कलेक्टर को प्रशासक लगा दिया है, जबकि 12 जिलों (भरतपुर, दौसा, जयपुर, जोधपुर, सवाई माधोपुर, सिरोही, अलवर, धौलपुर, बारां, करौली, कोटा और श्रीगंगानगर) की ग्राम पंचायतों और जिला परिषदों का कार्यकाल बचा हुआ है। 4 जिले खैरथल-तिजारा, फलोदी, डीग और कोटपूतली-बहरोड़ भी हैं, जो इन 12 जिलों में से टुकड़े करके बनाए गए हैं। ऐसे में 12 और 4 कुल 16 जिलों में कार्यकाल पूरा होने में समय बचा हुआ है। आयोग को हरियाणा और मध्य प्रदेश से मिली ईवीएम राजस्थान में ग्राम पंचायत और पंचायत समिति के चुनाव एक साथ होने की संभावना ज्यादा है। इसके लिए आयोग ने 60 हजार ईवीएम की व्यवस्था कर ली है। आयोग को हरियाणा से 40 हजार और मध्य प्रदेश से 10 हजार ईवीएम मिल गई हैं। आयोग के पास खुद की ही 10 हजार ईवीएम हैं। करीब एक महीने पहले आयोग को ईवीएम नहीं मिली थी। आयोग के अधिकारियों का कहना था कि ईवीएम मिल जाती है तो एक साथ चुनाव करा लिए जाएंगे। प्रदेश में 60 हजार बूथ हैं। वार्ड पंच और सरपंच के चुनाव बैलेट बॉक्स से होंगे राज्य निर्वाचन आयोग से जुड़े सूत्रों के मुताबिक पंच और सरपंच के चुनाव बैलेट बॉक्स से कराए जाएंगे। इसके लिए एक लाख बैलेट बॉक्स गुजरात से मंगाए जा रहे हैं। आयोग के पास पहले से एक लाख बैलेट बॉक्स है। यदि राज्य सरकार आयोग से कह देती है कि सभी जिलों में एक साथ चुनाव कराओ। ऐसी स्थिति में 16 जिलों में बैलेट बॉक्स से चुनाव कराए जाएंगे। हाईकोर्ट ने अप्रैल में चुनाव कराने के दिए निर्देश हाल ही में देश की शीर्ष अदालत सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान में पंचायत चुनाव का रास्ता साफ कर दिया है। बीते सोमवार को कोर्ट ने आदेश में स्पष्ट किया कि पंचायत चुनाव की प्रक्रिया 15 अप्रैल तक पूरी कर ली जाए। कोर्ट ने पंचायत परिसीमन और पुनर्गठन की प्रक्रिया को चुनौती देने वाली राजस्व ग्राम सिंहानिया सहित अन्य गांवों की एसएलपी खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि परिसीमन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और चुनावी प्रक्रिया शुरू है, ऐसे में दखल देना उचित नहीं है। राजस्थान सरपंच संघ के प्रदेश अध्यक्ष बोले- यह सरकार का फैसला राजस्थान सरपंच संघ के प्रदेश अध्यक्ष बंशीधर गढ़वाल का कहना है- सरकार एक साथ चुनाव कराएं। कभी भी कराएं। यह सरकार का फैसला होगा। हमारे कहने से तो सरकार निर्णय नहीं लेती है। चुनाव का स्वागत है। हमने अधिकारियों से बात की है। चुनाव कराने के संकेत दिए हैं। यह सरकार की व्यवस्था है कि वो किस तरह से चुनाव करवाती है।






