ग्रामीणों को अब 125 दिन रोजगार की कानूनी गारंटी:ऊर्जा मंत्री ने 'वीबी-जी राम जी' को बताया ऐतिहासिक पहल
ऊर्जा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) एवं जिला प्रभारी मंत्री हीरालाल नागर ने रविवार को बूंदी में आगामी राज्य बजट और जिले की विकास योजनाओं पर जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों तथा विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ संवाद किया। इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लाए गए 'विकसित भारत-रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) गारंटी अधिनियम, 2025' को एक ऐतिहासिक पहल बताया, जिसके तहत अब ग्रामीणों को साल में 100 के बजाय 125 दिन के रोजगार की कानूनी गारंटी मिलेगी। कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित इस बैठक में प्रभारी मंत्री नागर ने कहा कि राज्य सरकार बजट में जन-भागीदारी सुनिश्चित कर रही है, जिसके लिए सीधे सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों से सुझाव लिए जा रहे हैं। उन्होंने जोर दिया कि राज्य सरकार जिले के सर्वांगीण विकास के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और पिछले बजट की अधिकांश घोषणाओं का क्रियान्वयन धरातल पर शुरू हो चुका है। मंत्री ने बूंदी शहर की यातायात व्यवस्था को सुगम बनाने के लिए भी निर्देश दिए। उन्होंने नैनवां रोड पर प्रस्तावित फ्लाई ओवर की डीपीआर जल्द पूरी कर टेंडर प्रक्रिया शुरू करने और बूंदी बस स्टैंड की शिफ्टिंग में आ रही बाधाओं को विभागों के समन्वय से तत्काल दूर करने के निर्देश दिए। इसके अतिरिक्त, के. पाटन आरओबी की मरम्मत और भारतमाला प्रोजेक्ट के कार्यों में तेजी लाने पर भी जोर दिया गया, ताकि आमजन को आवाजाही में सुविधा मिल सके। जड़ से समाप्त होगा भ्रष्टाचार प्रभारी मंत्री ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती देने के उद्देश्य से लाए गए 'विकसित भारत-रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) गारंटी अधिनियम, 2025' को मील का पत्थर बताया। उन्होंने कहा कि यह कानून पुरानी मनरेगा योजना का परिष्कृत रूप है, जो भ्रष्टाचार और लेटलतीफी जैसी कमियों को जड़ से समाप्त करेगा। आधुनिक तकनीकों का होगा उपयोग इस नई योजना के तहत अब केवल कच्चे काम नहीं होंगे, बल्कि जल संसाधन और पक्की सड़कों जैसी स्थायी संपत्तियों का निर्माण होगा, जिससे गांव आत्मनिर्भर बनेंगे। मंत्री ने बताया कि योजना की सबसे बड़ी विशेषता इसकी पारदर्शिता है, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), जियो-टैगिंग और सैटेलाइट इमेजरी जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाएगा। डिजिटल सोशल ऑडिट प्रभारी मंत्री ने कहा कि कार्यों की निगरानी होगी और हर छह महीने में डिजिटल सोशल ऑडिट किया जाना अनिवार्य होगा। योजना में श्रमिकों के हितों का ध्यान रखते हुए साप्ताहिक भुगतान को अनिवार्य किया गया है और दो सप्ताह से अधिक की देरी होने पर स्वतः मुआवजे का कड़ा प्रावधान रखा गया है। बिजली और पानी की व्यवस्थाओं पर चर्चा करते हुए ऊर्जा राज्यमंत्री ने बताया कि जिले में बिजली सुदृढ़ीकरण के लिए जीएसएस निर्माण के कार्य प्रगति पर हैं। नगर परिषद क्षेत्र में स्वीकृत तीन नए जीएसएस के लिए भूमि का आवंटन कर दिया गया है, जिसका निर्माण कार्य शीघ्र प्रारंभ होगा। उन्होंने किसानों को आश्वस्त किया कि उन्हें सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी और कृषि कार्यों के लिए निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। इस दौरान नगर परिषद सभापति सरोज अग्रवाल, अतिरिक्त जिला कलेक्टर रामकिशोर मीणा, केशवरायपाटन की पूर्व विधायक चन्द्रकांता मेघवाल, पूर्व जिला प्रमुख राकेश बोयत, सुरेश अग्रवाल सहित विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि, जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक मौजूद रहें।
