नए पद स्वीकृत कर मेरिट पर भर्ती की मांग:फार्मासिस्टों ने विधायक बोहरा को ज्ञापन सौंपा, कहा- 13 साल में सिर्फ 4800 भर्ती
फार्मासिस्टों ने राजस्थान में नए पदों के सृजन और भर्ती प्रक्रिया में बदलाव की मांग को लेकर राजाखेड़ा विधायक रोहित बोहरा को धौलपुर स्थित उनके आवास पर ज्ञापन सौंपा। उन्होंने मुख्यमंत्री निःशुल्क दवा वितरण योजना के तहत संचालित केंद्रों पर फार्मासिस्टों की भारी कमी का मुद्दा उठाया। ज्ञापन में बताया गया कि राज्य में करीब 20 हजार निःशुल्क दवा वितरण केंद्र (DDC) संचालित हैं। इसके बावजूद पिछले 13 वर्षों में केवल 4,800 नियमित फार्मासिस्टों की नियुक्ति हुई है। इस कमी के कारण, मुख्यमंत्री निःशुल्क दवा वितरण केंद्रों पर ओपीडी का भार बहुत अधिक है, जिससे मरीजों को लंबी कतारों में इंतजार करना पड़ता है और कई बार उन्हें बिना दवा के ही घर लौटना पड़ता है। फार्मासिस्टों ने फार्मेसी अधिनियम का हवाला दिया, जिसके अनुसार 120 ओपीडी पर एक फार्मासिस्ट की नियुक्ति का प्रावधान है। उन्होंने ओपीडी भार के आधार पर नए फार्मासिस्ट पदों को स्वीकृत करने का आग्रह किया। उन्होंने यह भी मांग की कि आगामी फार्मासिस्ट कैडर की भर्ती प्रक्रिया वर्तमान चिकित्सा एवं स्वास्थ्य नियम 1965 के तहत मेरिट और बोनस अंकों (10, 20, 30) के आधार पर ही करवाई जाए। उनका कहना है कि इससे स्वास्थ्य सेवाओं की मुख्य रीढ़ माने जाने वाले संविदा और निविदा कर्मचारियों को स्थायी होने का अवसर मिलेगा, जो वर्तमान में बहुत कम वेतन पर कार्यरत हैं। फार्मासिस्टों ने बताया कि चिकित्सा विभाग ने हाल ही में 6,826 फार्मासिस्ट पदों के सृजन के लिए वित्त विभाग को स्वीकृति हेतु भेजा है। उन्होंने विधायक से इन पदों को जल्द से जल्द वित्तीय स्वीकृति दिलवाने का निवेदन किया।
फार्मासिस्टों ने नए पदों के सृजन और भर्ती प्रक्रिया में बदलाव की मांग को लेकर विधायक रोहित बोहरा को ज्ञापन सौंपा।
फार्मासिस्टों ने राजस्थान में नए पदों के सृजन और भर्ती प्रक्रिया में बदलाव की मांग को लेकर राजाखेड़ा विधायक रोहित बोहरा को धौलपुर स्थित उनके आवास पर ज्ञापन सौंपा। उन्होंने मुख्यमंत्री निःशुल्क दवा वितरण योजना के तहत संचालित केंद्रों पर फार्मासिस्टों
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ज्ञापन में बताया गया कि राज्य में करीब 20 हजार निःशुल्क दवा वितरण केंद्र (DDC) संचालित हैं। इसके बावजूद पिछले 13 वर्षों में केवल 4,800 नियमित फार्मासिस्टों की नियुक्ति हुई है।
इस कमी के कारण, मुख्यमंत्री निःशुल्क दवा वितरण केंद्रों पर ओपीडी का भार बहुत अधिक है, जिससे मरीजों को लंबी कतारों में इंतजार करना पड़ता है और कई बार उन्हें बिना दवा के ही घर लौटना पड़ता है।