प्रतापगढ़ में अवैध पट्टों, भू-उपयोग स्वीकृतियों पर बड़ी कार्रवाई:जिला कलेक्टर ने 15 दिन में निरस्त करने के दिए आदेश
प्रतापगढ़ में नगर परिषद द्वारा जारी की गई अवैध स्वीकृतियों को लेकर जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। जिला कलेक्टर डॉ. अंजलि राजोरिया ने आयुक्त नगर परिषद को आगामी 15 दिवस में ऐसी सभी स्वीकृतियों को निरस्त करने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं। इन निर्देशों में नगर परिषद द्वारा बिना विधिवत जांच के जारी की गई धारा 69(क), धारा 90-बी, खांचा भूमि, भू-उपयोग परिवर्तन, नीलामी से आवंटित आवासीय-व्यवसायिक भू-खंडों, निर्माण और नामांतरण से जुड़ी सभी अवैध स्वीकृतियां शामिल हैं। ये कार्रवाई दैनिक जनसुनवाई, शिकायतों और जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर की जा रही है। इसमें पाया गया कि नगर परिषद क्षेत्र में बिलानाम, चरागाह, नाला और अन्य विवादित राजकीय भूमियों पर मास्टर प्लान के विपरीत स्वीकृतियां जारी की गईं। कई मामलों में भू-उपयोग परिवर्तन सक्षम स्तर से स्वीकृत नहीं था, फिर भी पट्टे, निर्माण और नामांतरण की अनुमति दे दी गई, जो न्यायालयों के निर्णयों और कानून के प्रतिकूल है। जिला कलेक्टर ने निर्देश दिए हैं कि सभी ऐसे मामलों को सूचीबद्ध कर राजस्थान विधियां (संशोधन) अधिनियम-2021 के तहत नगरपालिका अधिनियम 2009 की धारा 73-बी में प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए कार्रवाई की जाए। राजकीय भूमियों को राजसात कर अवैध कब्जाधारियों को बेदखल किया जाएगा, वहीं निजी खातेदारी भूमि पर दी गई अवैध स्वीकृतियों को निरस्त कर रिकॉर्ड में पूर्व स्थिति बहाल की जाएगी। हालांकि, आदेश में ये भी स्पष्ट किया गया है कि विधिवत जारी पट्टों और स्वीकृतियों को किसी राजनीतिक दबाव या द्वेष के कारण निरस्त नहीं किया जाएगा। इस पूरे प्रकरण को नगर परिषद में अब तक की सबसे बड़ी प्रशासनिक सख्ती के रूप में देखा जा रहा है।
प्रतापगढ़ में नगर परिषद द्वारा जारी की गई अवैध स्वीकृतियों को लेकर जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। जिला कलेक्टर डॉ. अंजलि राजोरिया ने आयुक्त नगर परिषद को आगामी 15 दिवस में ऐसी सभी स्वीकृतियों को निरस्त करने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं।
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इन निर्देशों में नगर परिषद द्वारा बिना विधिवत जांच के जारी की गई धारा 69(क), धारा 90-बी, खांचा भूमि, भू-उपयोग परिवर्तन, नीलामी से आवंटित आवासीय-व्यवसायिक भू-खंडों, निर्माण और नामांतरण से जुड़ी सभी अवैध स्वीकृतियां शामिल हैं।
ये कार्रवाई दैनिक जनसुनवाई, शिकायतों और जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर की जा रही है। इसमें पाया गया कि नगर परिषद क्षेत्र में बिलानाम, चरागाह, नाला और अन्य विवादित राजकीय भूमियों पर मास्टर प्लान के विपरीत स्वीकृतियां जारी की गईं। कई मामलों में भू-उपयोग परिवर्तन सक्षम स्तर से स्वीकृत नहीं था, फिर भी पट्टे, निर्माण और नामांतरण की अनुमति दे दी गई, जो न्यायालयों के निर्णयों और कानून के प्रतिकूल है।