कृषि विभाग ने पाले से बचाव के उपाय बताए:फसलों को टाट या पट्टी से ढकें, गंधक के तेजाब का 15 दिन के अंतराल पर करें छिड़काव
कोटपूतली क्षेत्र में पड़ रही शीतलहर और पाले के कारण किसानों की चिंता बढ़ गई है। रबी फसलों पर पाले के बढ़ते खतरे को देखते हुए कृषि विभाग ने किसानों के लिए एक एडवाइजरी जारी की है। कोटपूतली-बहरोड़ के कृषि उप निदेशक डॉ. रामजी लाल यादव ने बताया कि समय पर अपनाए गए उपाय फसलों को पाले से होने वाले नुकसान से बचा सकते हैं। पाले के प्रभाव डॉ. यादव ने पाले के प्रभावों को स्पष्ट करते हुए बताया- इसके कारण पौधों की पत्तियां और फूल मुरझाकर झड़ जाते हैं। इससे फलियों और बालियों में दाना नहीं बनता या दाने सिकुड़ जाते हैं। पाले से कई बार पौधे पूरी तरह नष्ट भी हो सकते हैं, जिससे किसानों को आर्थिक हानि होती है। रबी की प्रमुख फसलें जैसे सरसों, गेहूं, चना, आलू और मटर शीतलहर व पाले से विशेष रूप से प्रभावित होती हैं। इन फसलों में नुकसान की आशंका अधिक रहती है, जिसके लिए किसानों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। जमीन का तापमान बनाए रखना जरूरी कृषि विभाग ने पाले से बचाव के कई उपाय सुझाए हैं। सीमित क्षेत्र वाली फसलों, पौधशालाओं, उद्यानों और नगदी सब्जियों में भूमि का तापमान बनाए रखना महत्वपूर्ण है। इसके लिए फसलों को टाट, पट्टी या भूसी से ढकना लाभकारी होता है। इसके अलावा, हवा की दिशा को देखते हुए उत्तरी-पश्चिमी दिशा में अवरोध करने से भी पाले का प्रभाव कम किया जा सकता है। गंधक के तेजाब का छिड़काव विभाग ने पाले की संभावना होने पर व्यवसायिक ग्रेड गंधक के तेजाब का छिड़काव करने की भी सलाह दी है। एक लीटर गंधक को एक हजार लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करना चाहिए। इस छिड़काव का प्रभाव लगभग दो सप्ताह तक रहता है। यदि पाले की आशंका बनी रहती है, तो 15 दिन के अंतराल पर दोबारा छिड़काव किया जा सकता है। इसके अलावा, पाले की आशंका वाले दिनों में फसलों में हल्की सिंचाई अवश्य करनी चाहिए। नमी युक्त भूमि में गर्मी अधिक समय तक बनी रहती है, जिससे भूमि का तापमान अचानक नहीं गिरता और फसलें सुरक्षित रहती हैं।
कोटपूतली क्षेत्र में पड़ रही शीतलहर और पाले के कारण किसानों की चिंता बढ़ गई है। रबी फसलों पर पाले के बढ़ते खतरे को देखते हुए कृषि विभाग ने किसानों के लिए एक एडवाइजरी जारी की है।

