सिटी ट्रांसपोर्ट:शहर को 150 किलोमीटर मेट्रो चाहिए, प्लान 59 का ही; अभी 11 किलोमीटर में ही दौड़ रही मेट्रो
शहर में ट्रैफिक दबाव कम करने के लिए सबसे जरूरी है पब्लिक ट्रांसपोर्ट—बस, मेट्रो, फीडर सर्विस—को बढ़ाकर एक कोने से दूसरे कोने तक ट्रांसपोर्ट कनेक्टिविटी बढ़ाना। राज्य सरकार ने हाल में प्रहलादपुरा से टोडी मोड़ तक मेट्रो चलाने के लिए डीपीआर तैयार की है। यह काम 5 साल में पूरा होने की उम्मीद है। जेडीए के एक सर्वे में राजधानी में 30 साल में करीब 150 किमी मेट्रो रूट की जरूरत बताई गई है, जबकि वर्तमान में ही राजधानी को 150 किमी मेट्रो नेटवर्क की जरूरत है। इसमें राजधानी के 9 रूट अहम हैं। मुंबई की तर्ज पर करना होगा काम
शहर में ट्रैफिक दबाव कम करने के लिए सबसे जरूरी है पब्लिक ट्रांसपोर्ट—बस, मेट्रो, फीडर सर्विस—को बढ़ाकर एक कोने से दूसरे कोने तक ट्रांसपोर्ट कनेक्टिविटी बढ़ाना। राज्य सरकार ने हाल में प्रहलादपुरा से टोडी मोड़ तक मेट्रो चलाने के लिए डीपीआर तैयार की है।
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यह काम 5 साल में पूरा होने की उम्मीद है। जेडीए के एक सर्वे में राजधानी में 30 साल में करीब 150 किमी मेट्रो रूट की जरूरत बताई गई है, जबकि वर्तमान में ही राजधानी को 150 किमी मेट्रो नेटवर्क की जरूरत है। इसमें राजधानी के 9 रूट अहम हैं।
मुंबई की तर्ज पर करना होगा काम
- बड़ी चौपड़ से रामगढ़ मोड़-आमेर, हसनपुरा से वैशाली नगर, पांच्यावाला व ट्रांसपोर्ट नगर घाट की गुणी से आगरा रोड बगराना-कानोता के लिए भी प्लानिंग हो।
- सरकार को पहले 10 साल के मेट्रो प्रोजेक्ट पर काम करना चाहिए। रूट तलाशकर फिजिबिलिटी चेक करनी होगी।
- सरकार की मंजूरी के बाद अधिकारियों को मुंबई की तर्ज पर काम करने की जरूरत है। मुंबई में एक साथ मेट्रो के पांच रूटों का काम चल रहा है।
- कंपनी 1 रूट पर एक साल में दो किमी ट्रैक तैयार करेगी तो 5 साल में 5 रूट पर 50 किमी रूट तैयार होगा। इस प्रकार 10 साल में 100 किमी रूट तैयार हो सकता है।
- सेकंड फेज पूरा होने के बाद शहर के सबसे व्यस्ततम रूट—सीतापुरा से जगतपुरा, महल रोड वाया 7 नंबर से बालाजी तिराहा, अपेक्स सर्किल झालाना डूंगरी, अरण्य भवन से गांधी सर्किल—वाला है। इस रूट पर मेट्रो की तैयारी होनी चाहिए। रूट 20 किमी होना चाहिए।
- मेट्रो का सेकंड फेज 15 साल पहले बन जाना चाहिए था, अब तो फेज-3 एवं 4 का काम शुरू होना था। जयपुर मेट्रो अन्य राज्यों से 15 साल पीछे है। मेट्रो का नेटवर्क 80 किमी होना चाहिए था, लेकिन अभी मात्र 11 किमी में ही चल रही है।