16 जनवरी को सिनेमाघरों में रिलीज होगी सागवान:राजस्थान के वास्तविक घटनाओं पर बनी, अंधविश्वास के खिलाफ सशक्त संदेश देगी
SOURCE:Dainik Bhaskar Tech
राजस्थान पुलिस के अधिकारी हिमांशु सिंह राजावत की फिल्म ‘सागवान’ 16 जनवरी 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी, जो सामाजिक कुरीतियों और अंधविश्वास के खिलाफ एक सशक्त संदेश देती है। फिल्म के कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी और केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत भी पहुंचे। राजस्थानी सिनेमा करीब 25 साल बाद एक बार फिर बड़े और गंभीर विषय के साथ दर्शकों के सामने आने को तैयार है। भोजपुरी इंडस्ट्री में चर्चित गीतों के जरिए ‘सागवान’ शब्द को जिस तरह फूहड़ता और द्विअर्थी मनोरंजन से जोड़ा गया, उसके ठीक उलट अब राजस्थान की धरती से उसी शब्द को नया अर्थ देने की कोशिश की जा रही है। अब तक ‘सागवान’ शब्द भोजपुरी गानों के कारण बेडरूम की अश्लीलता और सस्ते मनोरंजन का प्रतीक बन चुका था। लेकिन फिल्म ‘सागवान’ में यह शब्द इंसाफ, सख्ती और कानून के प्रतीक के रूप में सामने आता है। यह फिल्म उन वास्तविक घटनाओं से प्रेरित है, जहां अंधविश्वास, डायन-प्रथा और बलि जैसी कुप्रथाओं के नाम पर मासूम लोगों की जान ली गई। फिल्म की कहानी और प्रस्तुति पूरी तरह रियल और रॉ है। इसमें किसी तरह का फूहड़पन, गाली-गलौज या अश्लील दृश्य नहीं हैं। खास बात यह है कि फिल्म में सभी कलाकार राजस्थानी हैं और शूटिंग भी उन्हीं इलाकों में की गई है, जहां ऐसी घटनाएं वास्तव में घटित हुई थीं। हिमांशु सिंह राजावत का कहना है कि पुलिस की चार्जशीट अपराधी को अदालत तक ले जाती है, लेकिन यह फिल्म उस सोच पर सवाल उठाती है जो अपराध को जन्म देती है। ‘सागवान’ को सेंसर बोर्ड से भी सराहना मिली है। फिल्म यह साबित करने की कोशिश करती है कि बिना अश्लीलता और सस्ते मसाले के भी सशक्त और प्रभावशाली सिनेमा बनाया जा सकता है। यही वजह है कि इसे राजस्थानी सिनेमा के लिए एक नई शुरुआत के तौर पर देखा जा रहा है। फिल्म का ट्रेलर सोशल मीडिया पर पहले ही चर्चा में है और अब दर्शकों को 16 जनवरी 2026 का इंतजार है। माना जा रहा है कि यह फिल्म न सिर्फ राजस्थानी सिनेमा को नई पहचान देगी, बल्कि अश्लीलता और फूहड़ मनोरंजन के दौर में सामाजिक सरोकारों से जुड़े सिनेमा की मजबूत वापसी का संकेत भी बनेगी।
राजस्थान पुलिस के अधिकारी हिमांशु सिंह राजावत की फिल्म ‘सागवान’ 16 जनवरी 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी, जो सामाजिक कुरीतियों और अंधविश्वास के खिलाफ एक सशक्त संदेश देती है। फिल्म के कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी और केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत भी पहुंचे। राजस्थानी सिनेमा करीब 25 साल बाद एक बार फिर बड़े और गंभीर विषय के साथ दर्शकों के सामने आने को तैयार है। भोजपुरी इंडस्ट्री में चर्चित गीतों के जरिए ‘सागवान’ शब्द को जिस तरह फूहड़ता और द्विअर्थी मनोरंजन से जोड़ा गया, उसके ठीक उलट अब राजस्थान की धरती से उसी शब्द को नया अर्थ देने की कोशिश की जा रही है। अब तक ‘सागवान’ शब्द भोजपुरी गानों के कारण बेडरूम की अश्लीलता और सस्ते मनोरंजन का प्रतीक बन चुका था। लेकिन फिल्म ‘सागवान’ में यह शब्द इंसाफ, सख्ती और कानून के प्रतीक के रूप में सामने आता है। यह फिल्म उन वास्तविक घटनाओं से प्रेरित है, जहां अंधविश्वास, डायन-प्रथा और बलि जैसी कुप्रथाओं के नाम पर मासूम लोगों की जान ली गई। फिल्म की कहानी और प्रस्तुति पूरी तरह रियल और रॉ है। इसमें किसी तरह का फूहड़पन, गाली-गलौज या अश्लील दृश्य नहीं हैं। खास बात यह है कि फिल्म में सभी कलाकार राजस्थानी हैं और शूटिंग भी उन्हीं इलाकों में की गई है, जहां ऐसी घटनाएं वास्तव में घटित हुई थीं। हिमांशु सिंह राजावत का कहना है कि पुलिस की चार्जशीट अपराधी को अदालत तक ले जाती है, लेकिन यह फिल्म उस सोच पर सवाल उठाती है जो अपराध को जन्म देती है। ‘सागवान’ को सेंसर बोर्ड से भी सराहना मिली है। फिल्म यह साबित करने की कोशिश करती है कि बिना अश्लीलता और सस्ते मसाले के भी सशक्त और प्रभावशाली सिनेमा बनाया जा सकता है। यही वजह है कि इसे राजस्थानी सिनेमा के लिए एक नई शुरुआत के तौर पर देखा जा रहा है। फिल्म का ट्रेलर सोशल मीडिया पर पहले ही चर्चा में है और अब दर्शकों को 16 जनवरी 2026 का इंतजार है। माना जा रहा है कि यह फिल्म न सिर्फ राजस्थानी सिनेमा को नई पहचान देगी, बल्कि अश्लीलता और फूहड़ मनोरंजन के दौर में सामाजिक सरोकारों से जुड़े सिनेमा की मजबूत वापसी का संकेत भी बनेगी।