झुंझुनूं में ट्रैफिक इंचार्ज हरफूल मीणा का निधन:कैंसर से पीड़ित थे; 16 दिन पहले हुआ था पिता का निधन
झुंझुनूं में यातायात प्रभारी (टीआई) और उपनिरीक्षक हरफूल मीणा का शनिवार की रात निधन हो गया। 53 वर्षीय मीणा लंबे समय से कैंसर से जूझ रहे थे। उन्होंने जयपुर के एक निजी अस्पताल में अंतिम सांस ली। हरफूल मीणा के निधन की खबर मिलते ही पुलिस बेड़े में शोक छा गया। एसपी बृजेश ज्योति उपाध्याय सहित तमाम अधिकारियों ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया। 18 दिसंबर को ही उनके पिता गबदाराम का निधन हुआ था। वे अपने पैतृक गांव अलवर जिले के मालाखेड़ा (निठारी) गए हुए थे। पिता की तीये की बैठक की रस्म पूरी करने के बाद वे 24 दिसंबर को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के दौरे की सुरक्षा व्यवस्था संभालने वापस झुंझुनूं लौट आए। मुख्यमंत्री का दौरा संपन्न कराने के बाद वे 26 दिसंबर को फिर से पिता की द्वादशा (बारहवीं) की रस्मों के लिए गांव गए थे, जहां उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई। परिवार में 16-17 दिनों के भीतर ही दो असामयिक मौतें हो गई हैं। पहले पिता और अब घर के कमाऊ बेटे के चले जाने से कोहराम मचा है। हरफूल मीणा अपने पीछे पत्नी माया देवी, प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रही बेटी मनीषा और कॉलेज में पढ़ रहे बेटे राहुल को छोड़ गए हैं। वे पांच भाइयों में से एक थे, जिनमें से एक भाई रेलवे सुरक्षा बल में हैं और एक जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल में नर्सिंग अधिकारी हैं। करीब आठ महीने पहले हरफूल मीणा के चेहरे पर एक साधारण सी फुंसी हुई थी। जांच करवाने पर उसमें कैंसर की पुष्टि हुई। मई 2025 में उन्होंने इसका ऑपरेशन भी करवाया था, लेकिन बीमारी पूरी तरह नियंत्रित नहीं हो पाई। आठ-दस दिन पहले अचानक संक्रमण बढ़ने पर उन्हें जयपुर भर्ती करवाया गया था। पुलिस के अनुसार वे 1994 में बीकानेर में बतौर कॉन्स्टेबल राजस्थान पुलिस में भर्ती हुए थे। अलवर, दौसा, बीकानेर, जयपुर ग्रामीण और कोटपूतली-बहरोड़ जिलों में सेवारत रहे थे।
यातायात प्रभारी (टीआई) और उपनिरीक्षक हरफूल मीणा का बीती रात निधन हो गया। 53 वर्षीय मीणा लंबे समय से कैंसर से जूझ रहे थे। उन्होंने जयपुर के एक निजी अस्पताल में अंतिम सांस ली। हरफूल मीणा के निधन की खबर मिलते ही पुलिस बेड़े में शोक की लहर दौड़ गई। पुलिस अधीक्षक बृजेश ज्योति उपाध्याय सहित तमाम अधिकारियों ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया। 18 दिसंबर को ही उनके पिता गबदाराम का निधन हुआ था। वे अपने पैतृक गांव अलवर जिले के मालाखेड़ा (निठारी) गए हुए थे। पिता की तिये की बैठक की रस्म पूरी करने के बाद वे 24 दिसंबर को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के दौरे की सुरक्षा व्यवस्था संभालने वापस झुंझुनू लौट आए। मुख्यमंत्री का दौरा संपन्न कराने के बाद वे 26 दिसंबर को फिर से पिता की द्वादशा (बारहवीं) की रस्मों के लिए गांव गए थे, जहां उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई। परिवार में 16-17 दिनों के भीतर ही दो असामयिक मौतें हो गई हैं। पहले पिता और अब घर के कमाऊ बेटे के चले जाने से कोहराम मचा है। हरफूल मीणा अपने पीछे पत्नी माया देवी, प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रही बेटी मनीषा और कॉलेज में पढ़ रहे बेटे राहुल को छोड़ गए हैं। वे पांच भाइयों में से एक थे, जिनमें से एक भाई रेलवे सुरक्षा बल में हैं और एक जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल में नर्सिंग अधिकारी हैं। करीब आठ महीने पहले हरफूल मीणा के चेहरे पर एक साधारण सी फुंसी हुई थी। जांच करवाने पर उसमें कैंसर की पुष्टि हुई। मई 2025 में उन्होंने इसका ऑपरेशन भी करवाया था, लेकिन बीमारी पूरी तरह नियंत्रित नहीं हो पाई। आठ-दस दिन पहले अचानक संक्रमण बढ़ने पर उन्हें जयपुर भर्ती करवाया गया था। 1994: बीकानेर में बतौर कांस्टेबल राजस्थान पुलिस में भर्ती हुए। अलवर, दौसा, बीकानेर, जयपुर ग्रामीण और कोटपुतली-बहरोड़ जिलों में काम किया।