मथानिया मंडी में 17000 बोरी मूंगफली खुले में पड़ी:स्टोरेज नहीं होने से खरीद पर संकट, अधिकारी बोले - जल्द होगी व्यवस्था
मथानिया कृषि उपज मंडी में समर्थन मूल्य पर खरीदी गई मूंगफली के स्टोरेज की समस्या सामने आई है। राजफेड द्वारा समय पर उठाव नहीं होने के कारण मंडी परिसर में लगभग 16 से 17 हजार बोरियां खुले में पड़ी हुई हैं। इससे मंडी यार्ड पूरी तरह भर गया और आज से मूंगफली खरीद व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका है। भारतीय किसान संघ के जिला कार्यकारिणी सदस्य विनोद डागा ने बताया कि बाजार में मूंगफली के भाव गिरने से किसान समर्थन मूल्य केंद्रों की ओर रुख कर रहे हैं। मथानिया मंडी में प्रतिदिन 40 से 50 किसान मूंगफली लेकर पहुंच रहे हैं और रोजाना 4 से 5 हजार बोरियों की खरीद हो रही है। राजफेड द्वारा खरीदी गई मूंगफली के भंडारण की व्यवस्था न होने से मंडी में संकट बढ़ रहा है। डागा ने आगे बताया कि बोरियों का उठाव ना होने के कारण तुलाई के लिए जगह नहीं बची है। इस स्थिति में स्थानीय खरीद एजेंसी को तुलाई की गति धीमी करनी पड़ सकती है और इलेक्ट्रॉनिक कांटों की संख्या भी कम करनी होगी, जिससे किसानों को असुविधा होगी। मथानिया समर्थन मूल्य खरीद केंद्र के अधिकारियों ने बताया कि भंडारण को लेकर राजफेड अधिकारियों से लगातार संपर्क किया जा रहा है, लेकिन अभी तक कोई ठोस व्यवस्था नहीं हो पाई है। इस बीच किसान संघ ने उन किसानों के लिए तुलाई अवधि बढ़ाने की मांग की है। किसानों ने बताया कि कई किसान निर्धारित 10 दिन की अवधि में अपना माल नहीं ला सके, जिससे वे तुलाई से वंचित रह गए। इस संबंध में राजफेड को एक ज्ञापन भी भेजा गया है। इसको लेकर राजफेड जोधपुर के क्षेत्रीय अधिकारी दलपत चारण ने आश्वासन दिया है कि सोमवार दोपहर तक भंडारण की व्यवस्था कर ली जाएगी, जिसके बाद मंडी से मूंगफली का उठाव शुरू हो जाएगा।
मथानिया कृषि उपज मंडी में समर्थन मूल्य पर खरीदी गई मूंगफली के स्टोरेज की समस्या सामने आई है। राजफेड द्वारा समय पर उठाव नहीं होने के कारण मंडी परिसर में लगभग 16 से 17 हजार बोरियां खुले में पड़ी हुई हैं। इससे मंडी यार्ड पूरी तरह भर गया और आज से मूंगफली
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भारतीय किसान संघ के जिला कार्यकारिणी सदस्य विनोद डागा ने बताया कि बाजार में मूंगफली के भाव गिरने से किसान समर्थन मूल्य केंद्रों की ओर रुख कर रहे हैं। मथानिया मंडी में प्रतिदिन 40 से 50 किसान मूंगफली लेकर पहुंच रहे हैं और रोजाना 4 से 5 हजार बोरियों की खरीद हो रही है। राजफेड द्वारा खरीदी गई मूंगफली के भंडारण की व्यवस्था न होने से मंडी में संकट बढ़ रहा है।
डागा ने आगे बताया कि बोरियों का उठाव ना होने के कारण तुलाई के लिए जगह नहीं बची है। इस स्थिति में स्थानीय खरीद एजेंसी को तुलाई की गति धीमी करनी पड़ सकती है और इलेक्ट्रॉनिक कांटों की संख्या भी कम करनी होगी, जिससे किसानों को असुविधा होगी।