शोध संस्थान के लिए सेमिनार 18 को
टोंक| टोंक प्रोग्रेसिव कमेटी की बैठक पांच बत्ती के समीप हुई। इसमें विश्व विख्यात मौलाना अबुल कलाम आजाद अरबी-फारसी शोध संस्थान की अहमियत एवं शोध कार्य में योगदान के साथ ही वर्तमान स्थिति पर चर्चा हुई। अखिल भारतीय सेमिनार के आयोजन पर विचार किया। बताया गया कि शोध संस्थान विश्व विख्यात होने के साथ ही देश-दुनिया में राजस्थान का नाम उज्जवल करने वाला ऐसा संस्थान है, जिसे देखने एवं यहां पर शोध कार्य करने के लिए 50 से अधिक देशों के प्रबुद्धजन यहां आ चुके हैं। इसे देखने तत्कालीन राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह, उप राष्ट्रपति रहे हिदायतुल्लाह खान, हामिद अंसारी देखने आ चुके हैं। ये संस्थान तत्कालीन मुख्यमंत्री भैरोंसिंह शेखावत की एक उज्जवल यादगार होने के साथ ही साहित्यकारों की तीर्थ स्थली के रूप में भी अपनी पहचान रखती है। यहां पर कई धर्मों के दुर्लभ ग्रंथों सहित कई आकर्षक वस्तुओं के साथ ही विभिन्न भाषाओं एवं कई विषयों की दुर्लभ किताबें मौजूद हैं।
टोंक| टोंक प्रोग्रेसिव कमेटी की बैठक पांच बत्ती के समीप हुई। इसमें विश्व विख्यात मौलाना अबुल कलाम आजाद अरबी-फारसी शोध संस्थान की अहमियत एवं शोध कार्य में योगदान के साथ ही वर्तमान स्थिति पर चर्चा हुई। अखिल भारतीय सेमिनार के आयोजन पर विचार किया। बताया
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इसे देखने तत्कालीन राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह, उप राष्ट्रपति रहे हिदायतुल्लाह खान, हामिद अंसारी देखने आ चुके हैं। ये संस्थान तत्कालीन मुख्यमंत्री भैरोंसिंह शेखावत की एक उज्जवल यादगार होने के साथ ही साहित्यकारों की तीर्थ स्थली के रूप में भी अपनी पहचान रखती है। यहां पर कई धर्मों के दुर्लभ ग्रंथों सहित कई आकर्षक वस्तुओं के साथ ही विभिन्न भाषाओं एवं कई विषयों की दुर्लभ किताबें मौजूद हैं।