नर्सिंग कर्मियों ने खून से लिखा पत्र:मेरिट-बोनस अंक आधारित 19 हजार से ज्यादा पदों पर विज्ञापन जारी करने की मांग
हनुमानगढ़ में नर्सिंग कार्मिकों ने गुरुवार को स्थायी भर्ती और नियमितीकरण की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने मुख्यमंत्री और चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री के नाम अपने खून से पत्र लिखे, जिन्हें प्रशासन के माध्यम से जयपुर भेजा गया। यह अभियान राजस्थान नर्सेज भर्ती संघर्ष समिति के देखरेख में चलाया जा रहा है। नर्सिंग कर्मियों का कहना है कि वे पिछले 8-10 वर्षों से चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की विभिन्न योजनाओं में संविदा, निविदा और अल्प वेतन पर कार्यरत हैं। उनकी उम्र बढ़ने के साथ उनका भविष्य असुरक्षित हो गया है। कर्मियों ने यह भी बताया कि सरकार ने चुनावों के दौरान संविदा नर्सों को नियमित करने का वादा किया था। संघर्ष समिति ने मांग की है कि चिकित्सा नियम 1965 के तहत, 2013, 2018 और 2023 की तर्ज पर, नर्सिंग ऑफिसर के 12,000 और एएनएम के 7,000 पदों पर नई भर्ती का विज्ञापन जल्द जारी किया जाए। उनकी मुख्य मांग है कि भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह से मेरिट और अनुभव के आधार पर मिलने वाले 10, 20 और 30 बोनस अंकों पर आधारित हो। इससे वर्षों से सेवा दे रहे संविदा नर्सों को प्राथमिकता मिल सकेगी। समिति ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के फैसलों में भी राज्य की बोनस अंक नीति का उल्लेख है, और वे इस पर अमल की मांग कर रहे हैं। नर्सिंग कर्मियों ने आरोप लगाया कि मौजूदा संविदा व्यवस्था के तहत उन्हें बहुत कम वेतन पर काम करना पड़ रहा है, जिससे वे मानसिक, आर्थिक और सामाजिक रूप से परेशान हैं। उन्होंने सरकार को चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही पारदर्शी और मेरिट-बोनस आधारित स्थायी भर्ती प्रक्रिया शुरू नहीं की गई, तो आंदोलन को प्रदेश स्तर पर और तेज किया जाएगा।
हनुमानगढ़ में नर्सिंग कार्मिकों ने स्थायी भर्ती और नियमितीकरण की मांग को लेकर सीएम को खून से लिखा पत्र।
हनुमानगढ़ में नर्सिंग कार्मिकों ने गुरुवार को स्थायी भर्ती और नियमितीकरण की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने मुख्यमंत्री और चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री के नाम अपने खून से पत्र लिखे, जिन्हें प्रशासन के माध्यम से जयपुर भेजा गया। यह अभियान र
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नर्सिंग कर्मियों का कहना है कि वे पिछले 8-10 वर्षों से चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की विभिन्न योजनाओं में संविदा, निविदा और अल्प वेतन पर कार्यरत हैं। उनकी उम्र बढ़ने के साथ उनका भविष्य असुरक्षित हो गया है। कर्मियों ने यह भी बताया कि सरकार ने चुनावों के दौरान संविदा नर्सों को नियमित करने का वादा किया था।