एनजीओ संचालित परियोजना के 192 आंगनबाड़ी केंद्रों की 384 कार्यकर्ताओं को आठ महीने से नहीं मिला मानदेय
प्रदेश की एकमात्र एनजीओ द्वारा संचालित महिला एवं बाल विकास परियोजना कुम्हेर की 384 आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं को पिछले आठ महीनों से मानदेय नहीं मिल पाया है, जिससे वे गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रही हैं। राज्य सरकार से देय मानदेय लगातार लंबित है, वहीं केंद्र सरकार से मिलने वाला आंशिक मानदेय भी सितंबर 2025 तक का ही भुगतान किया गया है। लंबे समय से भुगतान न होने के कारण महिलाओं के सामने घर-परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है। कुम्हेर परियोजना के अंतर्गत 192 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं। प्रदेश की अन्य सभी परियोजनाओं में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं को समय पर मानदेय मिल रहा है, जबकि केवल कुम्हेर परियोजना में ही भुगतान व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। उल्लेखनीय है कि कुम्हेर परियोजना वर्ष 1994 से अब तक एक एनजीओ के माध्यम से संचालित की जा रही है, जबकि परियोजना पर होने वाला पूरा खर्च सरकार वहन करती है। परियोजना कार्यालय में आरएस स्तर के सीडीपीओ से लेकर अकाउंटेंट, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी, चपरासी एवं चारों एलएस पदों तक सभी पदों पर एनजीओ के निजी कर्मचारी तैनात हैं। कार्यकर्ता और सहायिकाओं की मांग है कि कुम्हेर परियोजना को एनजीओ से हटाकर सीधे महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा संचालित किया जाए। यदि परियोजना विभाग के अधीन होती, तो 384 सहायिका और कार्यकर्ताओं को महीनों तक मानदेय के लिए भटकना नहीं पड़ता। नाम प्रकाशित नहीं करने के शर्त पर एक कार्यकर्ता ने बताया कि पिछले आठ महीनों से हमें हमारा मानदेय नहीं मिला है। इतनी आर्थिक तंगी में हम दीपावली भी सही से नहीं मना पाईं। फिर भी हम अपने आंगनबाड़ी केंद्र की सेवाएं नियमित रूप से दे रहे हैं। इस संबंध में राज्य सरकार को लिखित रूप से अवगत करा दिया गया है। साथ ही मानदेय भुगतान के लिए बजट जारी करने के लिए भी राज्य सरकार को पत्र प्रेषित किया गया है। -सीकाराम चोयल, उपनिदेशक, महिला एवं बाल विकास विभाग भारत वर्ष में कहीं भी महिला एवं बाल विकास की कोई परियोजना ठेके पर संचालित नहीं है। कुम्हेर परियोजना को एनजीओ के माध्यम से चलाया जाना पूरी तरह अनुचित है। संगठन आंगनबाड़ी कर्मियों को नियमित कराने के लिए निरंतर संघर्ष कर रहा है, लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण है कि कुम्हेर की आंगनबाड़ी महिलाएं अभी तक मुख्यधारा से जुड़ भी नहीं पाई हैं। - छोटीलाल बुनकर, संस्थापक संरक्षक, अखिल राजस्थान महिला एवं बाल विकास कर्मचारी संघ, जयपुर।