संतोष; हर साल 20 क्विंटल गाजर के बीज तैयार कर रही हैं, कई राज्यों में है सप्लाई
सीकर | झीगर बड़ी की संतोष पचार द्वारा अपनाई गई देसी गाजर की तकनीक देश भर के किसानों को रास आई है। उन्होंने सलेक्शन विधि से 4 फीट से बड़ी गाजर तैयार करने में कामयाबी हासिल की है। वे 20 बीघा में खेती कर हर साल 20 लाख से ज्यादा की पैदावार ले रही हैं। वे करीब 15 साल से देसी गाजर की खेती कर रही हैं। संतोष को केंद्र व राज्य सरकार द्वारा कई बार प्रगतिशील किसान पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। बुवाई के लिए बीज सिलेक्शन विधि में बोई हुई फसल से अच्छी गुणवत्ता वाली गाजर के कंद की छंटनी कर बीज के लिए बुवाई कर दी जाती है। बीज तैयार होने पर उसी को अगले साल बुवाई की जाती है। ये तरीका लगातार 3 से 4 साल तक उपयोग में लिया जाता है। इसके बाद पैदावार एकरूपता में आने लगती है। सीकर | रसीदपुरा के अमित फेनिन ने हाइटेक डेयरी फार्मिंग में अपना सिक्का जमा लिया है। 10 साल पहले ब्रिटेन से डेयरी फार्मिंग में शिक्षा प्राप्त करने के बाद अमित ने वहां जॉब का अच्छा ऑफर छोड़ा। उन्होंने रसीदपुरा में ही 2015 में हाइटेक डेयरी प्रोजेक्ट लगाकर दूध व्यवसाय की शुरुआत की। बैंक से लोन लेकर उन्होंने इस व्यवसाय पर 2 करोड़ खर्च किए। वे 150 से ज्यादा गोवंश का पालन कर प्रतिदिन 1200 लीटर दूध का उत्पादन कर रहे हैं। गांव के 12 से ज्यादा युवाओं को स्वरोजगार भी दे रखा है। सभी खर्च निकालने के बाद हर माह 5 लाख रुपए कमा रहे हैं। डेयरी में पशु नस्ल सुधार के लिए भी विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। अमित ने बताया कि यहां विदेशी नस्ल की गायों की नस्ल तैयार की जाती है। वे 30 से 55 लीटर तक दूध देती हैं। सीकर | पुरां बड़ी के 12वीं पास कमलेश शर्मा (25) ने बड़ी सफलता प्राप्त की है। उन्होंने गांव में द कमलेश ब्रांड की नींव रखी। भाई कृष्णा शर्मा व पिता लालचंद शर्मा के साथ मिलकर 2021 में 5-7 लाख रुपए इंवेस्टमेंट कर म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट इंडियन बैंजो की मैन्युफैक्चरिंग शुरू की। आज कंपनी की वैल्युएशन करीब 5 करोड़ है। इस साल टर्न ओवर 2 करोड़ होने वाला है। वे 18 देशों में सीकर से म्यूजिकल इंस्टूमेंट सप्लाई कर रहे हैं। इसी दिशा में उन्होंने अपना ब्रांड हंसमाला शुरू किया। कमलेश का परिवार 19 साल सूरत रहा। बीच में 3 साल सीकर में ताऊजी के पास रहकर पढ़ाई की। कोरोना के बाद गांव में कमलेश ने इंडियन बैंजो की मैन्युफैक्चरिंग शुरू की, जो आज विदेश में भी एक्सपोर्ट हो रहा है। प्रसिद्ध संगीतकार एआर रहमान तक उनके वाद्य यंत्र पहुंचे। पंजाब, हरियाणा, गुजरात व आसाम तक जा रहा बीज : इस विधि से तैयार गाजर का बीज पंजाब, हरियाणा, यूपी, दिल्ली, आसाम, हिमाचल, गुजरात, महाराष्ट्र तक जा रहे हैं। कृषि विभाग के अतिरिक्त निदेशक शिवजीराम कटारिया ने संतोष पचार द्वारा तैयार की गई गाजर के बीज की सिलेक्शन विधि किसानों के लिए कारगर साबित हो रही है। यू ट्यूब चैनल पर 7 लाख से ज्यादा सब्सक्राइबर : कमलेश वर्ष 2016 से यू ट्यूब के जरिये वाद्ययंत्र बजाना सिखा रहे हैं। आज इस चैनल पर 7 लाख से अधिक सब्स्क्राइबर हैं। उन्होंने बताया िक इंडियन बैंजो की कीमत 8 हजार से 35 हजार रुपए तक है। आने वाले समय में हारमोनियम, ढोलक और अन्य भारतीय वाद्ययंत्र बनाने की योजना है। अपने खेत में होने वाला आहार देते हैं पशुओं को : अमित अपने खेत में होने वाला पशु आहार ही पशुओं को देते हैं। प्रत्येक गाय के गले के पट्टे पर एक सेंसरयुक्त डिवाइस है। इससे पशु की गतिविधि की मॉनिटरिंग की जाती है। पशुओं को दुहने के लिए ऑटोमैटिक मिल्किंग पाइंट बने हैं। जहां एक साथ 12 गाय का दूध निकाला जाता है।