क्या पहलगाम हमला और उसके बाद की स्थिति भारत के लिए 2025 की सबसे बड़ी घटना रही?
भारत ने 'ऑपरेशन सिंदूर' में बड़ी कामयाबी मिलने का दावा किया लेकिन इसके बाद अमेरिका ने पाकिस्तान के साथ जो नज़दीकी दिखाई उससे भारत की कूटनीति पर कई गंभीर सवाल खड़े हुए.

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इमेज कैप्शन, पहलगाम हमले में मारे गए टूरिस्ट जयपुर के नीरज उधवानी का ग़मगीन परिवार (फ़ाइल फ़ोटो)
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- Author, चंदन कुमार जजवाड़े
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
- 14 मिनट पहले
22 अप्रैल 2025 को कश्मीर के पहलगाम में पर्यटकों को निशाना बनाकर किए गए हमले में 26 लोगों की मौत हो गई थी. इस घटना की दुनियाभर के कई देशों ने निंदा की.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हमले के बाद कहा था, "आतंकवादी हमले के ज़िम्मेदारों को नहीं छोड़ेंगे."
इसी तरह गृह मंत्री अमित शाह ने भी पर्यटकों पर इस हमले के बाद कहा, "पहलगाम में पर्यटकों पर हुए आतंकवादी हमले से दुखी हूँ. मेरी संवेदनाएं मारे गए लोगों के परिवारवालों के साथ हैं. जो भी इस घटना का ज़िम्मेदार है उसे छोड़ा नहीं जाएगा और उन्हें पूरी ताक़त के साथ जवाब दिया जाएगा."
इसके कुछ दिन बाद ही भारत ने 'ऑपरेशन सिंदूर' शुरू किया था, जिससे भारत और पाकिस्तान के बीच 1971 के बाद से पहली बार बड़े युद्ध की आशंका पैदा हो गई थी.
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इमेज कैप्शन, भारत-पाकिस्तान सीमा पर उरी में एलओसी के पास हमले का निशाना बने अपने घर में मौजूद एक महिला, मई में हुए संघर्ष में दोनों देशों में कई आम नागरिकों की भी मौत हुई थी (फ़ाइल)
पहलगाम हमले के बाद पाकिस्तान से बढ़े तनाव के बीच भारत के गृह मंत्रालय ने 7 मई को पूरे देश में मॉक ड्रिल कराए जाने के निर्देश दिए थे.
सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को भेजे गए निर्देश में 244 सूचीबद्ध सिविल डिफ़ेंस ज़िलों में सुरक्षा का अभ्यास और रिहर्सल करने को कहा गया.
जानकारों के मुताबिक़ साल 1971 की भारत-पाकिस्तान जंग के बाद इतने बड़े पैमाने पर मॉक ड्रिल से यह संकेत मिल रहा था कि दोनों देशों के बीच हालात लगातार कितने बिगड़ गए.
पहलगाम हमले के बाद पिछले साल छह और सात मई की दरमियानी रात को भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में सैन्य कार्रवाई की थी, जिसे 'ऑपरेशन सिंदूर' नाम दिया गया था.
भारतीय सेना ने दावा किया था कि इस दौरान उन्होंने नौ ठिकानों पर 'आतंकवादियों के कैंपों' पर हमले किए.
भारतीय सेना के डीजीएमओ लेफ़्टिनेंट जनरल राजीव घई ने एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस में कहा, "इन हमलों में 100 से ज़्यादा आतंकवादी मारे गए."
वहीं पाकिस्तानी सेना ने दावा किया कि उसकी जवाबी कार्रवाई 'ऑपरेशन बुनियान-उन-मरसूस' में भारत के 26 सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया था.

वहीं पाकिस्तानी सेना के अहमद शरीफ़ चौधरी ने कहा, "भारत के जिन 26 सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया गया उनमें वायु सेना और विमानन के अड्डे भी शामिल थे. ये अड्डे सूरतगढ़, सिरसा, आदमपुर, भुज, नालिया, बठिंडा, बरनाला, हरवाड़ा, अवंतिपुरा, श्रीनगर, जम्मू, अंबाला, उधमपुर और पठानपुर में थे."
इस संघर्ष में दोनों देशों ने एक-दूसरे पर अपने आम नागरिकों को निशाना बनाने का आरोप लगाया.
साउथ एशियन यूनिवर्सिटी में एसोसिएट प्रोफ़ेसर धनंजय त्रिपाठी कहते हैं, "पहलगाम और उसके बाद का संघर्ष भारत के लिए सबसे बड़ी घटना थी, क्योंकि इसमें बाहरी मुद्दे शामिल हैं, जिसका समाधान केवल आपके हाथ में नहीं है."
वो कहते हैं, "इसका सहारा लेकर आसिम मुनीर पाकिस्तान के फ़ील्ड मार्शल बन गए. ट्रंप ने दावा किया कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच युद्धविराम करवाया, जिसे भारत ने स्वीकार नहीं किया और इससे ट्रंप नाराज़ हो गए. दोनों देशों के बीच ट्रेड डील ना हो पाने में यह भी एक वजह बना है."
साल 1971 के बाद बनी भारत-पाकिस्तान युद्ध की आशंका

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इमेज कैप्शन, मई महीने में कई इलाक़ों में मॉक ड्रिल भी शुरू हो गई थी, ताकि आम लोगों को यह बताया जा सके कि आपातकालीन हालात में क्या किया जाना चाहिए
साल 2025 की बात करें तो साल की शुरुआत में ही देश को बड़ी बुरी ख़बर का सामना करना पड़ा. उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में लगे कुंभ मेले में जनवरी के अंत में मौनी अमावस्या के दिन भगदड़ मच गई, जिसमें कई लोगों की मौत हो गई.
कुंभ मेले के लिए देश-विदेश से लोगों को स्नान के लिए आमंत्रित किया गया था और बड़ी तैयारियों के दावे किए गए थे. यह घटना देश-विदेश के अख़बारों की सुर्खियाँ बनी.
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक़ इसमें कम से कम 37 लोगों की मौत हो गई. हालाँकि बाद में बीबीसी की पड़ताल में कम से कम 82 लोगों की मौत की पुष्टि हुई.
वहीं बीते साल के मध्य में 12 जून को अहमदाबाद में हुए प्लेन क्रैश की ख़बर भी कई दिनों तक दुनियाभर के अख़बारों की छपती रही. इस हादसे में एयर इंडिया के विमान में सवार 242 में से 241 लोगों की मौत हो गई.
जबकि साल के अंतिम दिनों में 10 नवंबर को दिल्ली के लालक़िले के पास हुए धमाके में कम से कम दस लोगों की मौत हो गई और कई लोग घायल हो गए.
इस घटना ने देश की राजधानी में सुरक्षा और ख़ुफ़िया तंत्र की नाकामी को लेकर सवाल खड़े किए.
धनंजय त्रिपाठी कहते हैं, "ये बड़ी घटनाएं ज़रूर हैं लेकिन आंतरिक मामले हैं. आप ख़ुद ये तय कर सकते हैं कि इसे कैसे ठीक करना है. लेकिन 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान भारत-पाकिस्तान संघर्ष साल 1971 के बाद ऐसा पहला मौक़ा था जब दोनों देशों के बीच बड़े पैमाने पर युद्ध हो सकता था."
"इस दौरान भारत ने उनके सैन्य ठिकानों को भी निशाना बनाने की कोशिश की और पाकिस्तान ने भी जम्मू-कश्मीर और पंजाब के सीमावर्ती इलाक़ों में ड्रोन हमले की कोशिश की. साल 1999 में करगिल में जो संघर्ष हुआ था वो पहाड़ियों तक सीमित था, जबकि मई महीने के संघर्ष का दायरा बहुत बड़ा हो सकता था."
'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद जियोपॉलिटिकल हालात

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इमेज कैप्शन, भारत में भी 'ऑपरेशन सिंदूर' को लेकर जश्न मनाया जा रहा था
'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद बने हालात में पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर को प्रमोशन देकर फ़ील्ड मार्शल बना दिया गया.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कई मौक़ों पर आसिम मुनीर की प्रशंसा की, उन्हें अपना पसंदीदा जनरल बताया और व्हाइट हाउस में भी आमंत्रित किया.
ये ऐसी घटनाएँ थीं, जो भारत के लिहाज से काफ़ी अहम थीं. ख़ासकर तब जब पीएम मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप एक-दूसरे को अपना दोस्त कहते हैं.
धनंजय त्रिपाठी कहते हैं, "ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत के लिए एक और घटना यह रही है कि भारत को पश्चिमी देशों का भी बहुत ज़्यादा साथ नहीं मिला है. जो जियोपॉलिटिक्स के लिहाज से काफ़ी अहम है."
भारत ने पहलगाम हमले के बाद अपना सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल भी कई देशों में भेजा, जिसका मक़सद भारत के प्रमुख साझेदार देशों और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सदस्य देशों का दौरा कर चरमपंथ को लेकर भारत का रुख़ स्पष्ट करना था.
हालाँकि कांग्रेस पार्टी ने शशि थरूर का नाम विदेश जाने वाले दल में शामिल करने को लेकर सवाल खड़े कर दिए, क्योंकि पार्टी की तरफ से उनका नाम नहीं भेजा गया था. इस तरह से यह दौरा शुरू होने से पहले विवाद शुरू हो गए और अंत में इस बात को लेकर भी सवाल उठे कि इस तरह के दौरे से भारत को क्या मिला?

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इमेज कैप्शन, पिछले साल मई में संघर्ष के दौरान भारत और पाकिस्तान दोनों में आम लोग सेना के समर्थन में उतर गए थे
अमेरिकी कांग्रेस में दाखिल की गई एक रिपोर्ट में ये दावा किया गया है कि इस साल मई में भारत के साथ संघर्ष में 'पाकिस्तान का पलड़ा भारी था' और चीन ने इस संघर्ष का फ़ायदा उठाते हुए अपने 'हथियारों का परीक्षण और प्रचार' किया.
रिपोर्ट में एक जगह ये कहा गया है कि 'पाकिस्तानी सेना की चार दिन के संघर्ष के दौरान भारत पर हासिल की गई सफलता में चीन के हथियारों की भूमिका दिखी'.
साथ ही रिपोर्ट में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में इसी साल 22 अप्रैल को हुए हमले को 'विद्रोहियों का हमला' भी बताया गया है. भारत में विपक्ष ने इस रिपोर्ट को सरकार के लिए कूटनीतिक झटका बताया.
वरिष्ठ पत्रकार नीरजा चौधरी कहती हैं, "पहलगाम हमले ने भारत की सुरक्षा और ख़ुफ़िया तंत्र को लेकर चिंताएं उजागर कीं. इसके बाद जो हालात हुए और भारत जिस तरह से सीज़फ़ायर के लिए तैयार हुआ, उससे लोगों का एक वर्ग सहमत नहीं था."
उनका कहना है, "डोनाल्ड ट्रंप ने क़रीब 30 बार दावा किया कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच सीज़फ़ायर कराया, जिसका भारत खुलकर खंडन नहीं कर पाया. इसने हालात को और पेचीदा बना दिया. फिर ट्रंप का पाकिस्तान के क़रीब जाना भी जियोपॉलिटिक्स के लिहाज से एक बड़ी घटना बन गई."
पीएम मोदी के सामने घरेलू हालात

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इमेज कैप्शन, मई में पीएम मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार सैन्य अधिकारियों के बीच एक उच्चस्तरीय बैठक की तस्वीर
नीरजा चौधरी मानती हैं कि साल 2024 में हुए लोकसभा चुनावों के बाद घरेलू स्तर पर पीएम मोदी की स्थिति थोड़ी कमज़ोर हुई थी, जब बीजेपी को पूर्ण बहुमत नहीं मिला और वो 240 सीटों तक ही पहुँच पाई.
हालाँकि 2024 के अंतिम महीनों में हरियाणा और महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में बीजेपी की बड़ी जीत ने घरेलू स्तर पर उनकी स्थिति फिर से मज़बूत कर दी.
लेकिन पिछले साल यानी 2025 में पहलगाम में पर्यटकों पर हुए हमले ने एक बार फिर मोदी सरकार के सुरक्षा इंतज़ाम और ख़ुफ़िया नाकामी को लेकर सवाल खड़े कर दिए.
अभी साल 2019 के पुलवामा हमले को लेकर विपक्ष के सवाल ख़त्म भी नहीं हुए हैं कि पहलगाम में एक बड़ा हमला हो गया.
जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में 14 फ़रवरी 2019 को सीआरपीएफ़ के एक क़ाफ़िले पर हुए चरमपंथी हमले में चालीस जवानों की मौत हो गई थी.

नीरजा चौधरी कहती हैं, "इस साल के शुरुआती महीने में दिल्ली में बीजेपी ने विधानसभा चुनाव में जीत हासिल की. फिर अप्रैल में पहलगाम में हमला हो गया. साल का अंत होते-होते बिहार विधानसभा चुनावों में जीत ने पीएम मोदी को घरेलू स्तर पर 2024 के पहले की तरह ताक़तवर बना दिया है."
"लेकिन पड़ोसी देशों के साथ भारत के संबंध बिगड़े हैं, इसने वैश्विक राजनीति के लिहाज से उनके लिए हालात को और चुनौतीपूर्ण बना दिया है, जिसका असर लंबे समय तक देखने को मिल सकता है. हालाँकि विपक्ष इसे मुद्दा नहीं बना पा रहा है, जो उसकी नाकामी है."
हाल के दिनों में बांग्लादेश में हुई घटनाओं ने भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में नया तनाव पैदा कर दिया है. हालाँकि साल 2024 में अगस्त महीने में शेख़ हसीना सरकार के ख़त्म होने के साथ ही बांग्लादेश और भारत के संबंध बिगड़े हैं.
इससे पहले साल 2022 में श्रीलंका में भी लोगों ने सरकार के ख़िलाफ़ बड़ा विरोध प्रदर्शन किया था.
वहीं पिछले साल भारत के पड़ोसी देश नेपाल में भी जेन ज़ी के प्रदर्शनों और हिंसा के बाद वहाँ सरकार का इस्तीफा देना पड़ा था. इस तरह से भारत के पड़ोसी देशों के हालात भी बहुत अच्छे नहीं रहे हैं.
फिर पाकिस्तान के साथ भारत के तनाव के बीच उसकी बांग्लादेश के साथ दिख रही क़रीबी भी भारत के लिए चिंताजनक हो सकती है.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.