2026 में शनि का प्रभाव : इस नववर्ष में कुंभ, मीन और मेष राशि पर रहेगी शनि की साढ़े साती
भास्कर न्यूज | बीकानेर सूर्य के राशि परिवर्तन से शुरू हुआ नववर्ष काफी महत्वपूर्ण रहने वाला है। चंद्रमा के रोहिणी नक्षत्र में शुरू हुआ वर्ष-2026 ज्योतिषीय दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। गुरुवार से शुरू हो रहा यह नववर्ष चंद्रमा के रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश के साथ शुरू हुआ जो नवसृजन, परिवर्तन और भावनात्मक चेतना का प्रतीक माना जाता है। यह वर्ष समाज, राजनीति, अर्थव्यवस्था और प्राकृतिक घटनाओं-चारों ही स्तरों पर बड़े बदलाव लेकर आएगा। ज्योतिर्विद पंडित हरिनारायण व्यास मन्नासा के अनुसार साल 2026 शनि ग्रह के प्रभाव की दृष्टि से कई राशियों के लिए चुनौतीपूर्ण रहने वाला है। शनि पूरे साल मीन राशि में ही गोचर करेगा। इस कारण कुंभ, मीन और मेष राशि पर शनि की साढ़ेसाती का प्रभाव बना रहेगा, जबकि सिंह और धनु राशि पर शनि की ढैया रहेगी। मन्नासा बताते हैं कि शनि सबसे मंद गति से चलने वाला ग्रह है, इसलिए इसका प्रभाव लंबे समय तक बना रहता है।यह जातकों को लाभ देने में समय लेता है लेकिन स्थायी लाभ देता है। शनि ढाई वर्ष में राशि परिवर्तन करता है और कर्मों के अनुसार फल देने के कारण इन्हें न्यायाधीश भी कहा जाता है। वर्तमान में शनि मीन राशि में स्थित हैं, जिससे साढ़ेसाती और ढैया का असर वर्ष 2027 तक बना रहेगा। कर्मों के अनुसार फल देते हैं शनि शनि ग्रह जातक को उसके कर्मों के अनुसार ही फल देते हैं। यही कारण है की शनि को न्याय का देवता भी कहा जाता है। शनि दोष से बचाव और अशुभ प्रभाव को कम करने के लिए शनिवार को शनिदेव को तेल अर्पित करें, हनुमानजी की पूजा करें और ऊं शं शनैश्चराय नम: मंत्र का 108 बार जाप करें। साथ ही शनिवार को काले तिल, कंबल, लोहे के पात्र और जूते-चप्पल का दान लाभकारी रहेगा। इसके अलावा 1 मीटर काला कपड़ा, पांव काले तिल, पाव तिल्ली का तेल, लोहे के ताला चाबी और 11 रुपए दान से भी शनि के अशुभ प्रभावों से बचा जा सकता है।
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सूर्य के राशि परिवर्तन से शुरू हुआ नववर्ष काफी महत्वपूर्ण रहने वाला है। चंद्रमा के रोहिणी नक्षत्र में शुरू हुआ वर्ष-2026 ज्योतिषीय दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। गुरुवार से शुरू हो रहा यह नववर्ष चंद्रमा के रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश के साथ शुरू हुआ जो नवसृजन, परिवर्तन और भावनात्मक चेतना का प्रतीक माना जाता है। यह वर्ष समाज, राजनीति, अर्थव्यवस्था और प्राकृतिक घटनाओं-चारों ही स्तरों पर बड़े बदलाव लेकर आएगा।