भक्ति व मस्ती के बीच नए साल-2026 का आगाज : मंदिरों में गूंजी रामचरितमानस की चौपाइयां, गुरुद्वारों में शब्द कीर्तन
भास्कर संवाददाता | श्रीगंगानगर जब घड़ी की सुइयां रात के 12 बजे एक साथ पहुंचीं तो श्रीगंगानगर के आसमान में आतिशबाजी के रंगों ने मानों सुनहरी इबारत लिख दी। बुधवार की रात शहर सोया नहीं, बल्कि एक नए संकल्प और नए साल के स्वागत में सड़कों पर उतर आया। श्रीगंगानगर वासियों ने 2026 का स्वागत करने के लिए भक्ति और मस्ती का अनूठा संतुलन चुना। शहर के अधिकतर मंदिरों में श्रद्धालुओं की काफी भीड़ रही। हनुमानगढ़ रोड स्थित बालाजी धाम, एल ब्लॉक हनुमान मंदिर, सिद्धधाम श्री खाटू श्याम धाम मंदिर, वैष्णो माता मंदिर, चहल चौक स्थित संकट मोचन हनुमान मंदिर, प्राचीन शिवालय, श्री अरोड़वंश मंदिर आदि में बुजुर्गों से लेकर युवाओं तक, हर कोई रामचरितमानस की चौपाइयों, श्रीहनुमान चालीसा पाठ व श्री सुंदरकांड पाठ में लीन दिखाई दिया। इस कड़ी में शहर के गुरुद्वारों में भी देर रात तक संगत की भारी भीड़ उमड़ी रही। कड़ाके की ठंड और बारिश की बूंदों के बीच भी लोगों की श्रद्धा कम नहीं हुई। गुरबाणी के कीर्तन ने श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक शांति का अहसास कराया। माथा टेकने के बाद लोगों ने एक-दूसरे को नए साल की बधाई दी। इसके अलावा सूरतगढ़ रोड, हनुमानगढ़ रोड, गोल बाजार स्थित होटलों व रिसोर्ट में डीजे की हाई बेस पर जब बॉलीवुड के रिमिक्स गाने बजे तो लोगों ने जमकर डांस किया। कई रिसोर्ट्स में विंटर वंडरलैंड थीम पर पार्टियां आयोजित की गईं, जहां लाइटिंग और सेल्फी पॉइंट्स पर युवाओं की लंबी कतारें देखने को मिली।
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जब घड़ी की सुइयां रात के 12 बजे एक साथ पहुंचीं तो श्रीगंगानगर के आसमान में आतिशबाजी के रंगों ने मानों सुनहरी इबारत लिख दी। बुधवार की रात शहर सोया नहीं, बल्कि एक नए संकल्प और नए साल के स्वागत में सड़कों पर उतर आया। श्रीगंगानगर वासियों ने 2026 का स्वागत करने के लिए भक्ति और मस्ती का अनूठा संतुलन चुना।
शहर के अधिकतर मंदिरों में श्रद्धालुओं की काफी भीड़ रही। हनुमानगढ़ रोड स्थित बालाजी धाम, एल ब्लॉक हनुमान मंदिर, सिद्धधाम श्री खाटू श्याम धाम मंदिर, वैष्णो माता मंदिर, चहल चौक स्थित संकट मोचन हनुमान मंदिर, प्राचीन शिवालय, श्री अरोड़वंश मंदिर आदि में बुजुर्गों से लेकर युवाओं तक, हर कोई रामचरितमानस की चौपाइयों, श्रीहनुमान चालीसा पाठ व श्री सुंदरकांड पाठ में लीन दिखाई दिया। इस कड़ी में शहर के गुरुद्वारों में भी देर रात तक संगत की भारी भीड़ उमड़ी रही। कड़ाके की ठंड और बारिश की बूंदों के बीच भी लोगों की श्रद्धा कम नहीं हुई। गुरबाणी के कीर्तन ने श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक शांति का अहसास कराया।