गिटार जैसा वाटर प्लांट: 220 गांवों के 21734 घरों तक पहुंचेगा पानी
चित्तौड़गढ़ | आसमान से ऐसा दिखता है, मानो 5 बड़े बेयरिंग और इनके बीच गिटार रखा हो। असल में यह बेगूं-रावतभाटा मार्ग पर आंवलहेड़ा गांव के पास निर्माणाधीन वाटर प्लांट है। जल जीवन मिशन में करीब तीन साल पूर्व चित्तौड़गढ़ जिले के 648 गांवों में चंबल नदी से पेयजल उपलब्ध कराने का बड़ा प्रोजेक्ट मंजूर हुआ था। पहले फेज में करीब 1065 करोड़ से यहां इस प्लांट का काम 6 अक्टूबर 2023 को शुरू हुआ। हालांकि इसकी डेडलाइन 5 जून 2025 थी पर बीच में काम रुक गया। अब वापस तेजी से चल रहा है। पीएचईडी अधिकारियों के अनुसार 2026 में पूरा हो जाएगा। इससे बेगूं के 137 व भैसरोड़गढ़ के 83 गांवों के 21734 घरों तक शुद्व पेयजल पहुंचेगा। इसमें 170 एमएलडी के 3 जल शोधक संयंत्र तैयार हो रहे हैं। दो इंटेकवैल, विभिन्न क्षमता के उच्च जलाशय, स्वच्छ जलाशय व पंप हाउस, पंप सेटस, अलग-अलग व्यास की राइजिंग मेन निर्माण हो रहा। इन 220 गांवों में वितरण पाइप लाइन जोड़ने-बिछाने व 21734 घरों में कनेक्शन देने का काम भी इसमें शामिल है।
चित्तौड़गढ़ | आसमान से ऐसा दिखता है, मानो 5 बड़े बेयरिंग और इनके बीच गिटार रखा हो। असल में यह बेगूं-रावतभाटा मार्ग पर आंवलहेड़ा गांव के पास निर्माणाधीन वाटर प्लांट है। जल जीवन मिशन में करीब तीन साल पूर्व चित्तौड़गढ़ जिले के 648 गांवों में चंबल नदी से पेयज
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हालांकि इसकी डेडलाइन 5 जून 2025 थी पर बीच में काम रुक गया। अब वापस तेजी से चल रहा है। पीएचईडी अधिकारियों के अनुसार 2026 में पूरा हो जाएगा।
इससे बेगूं के 137 व भैसरोड़गढ़ के 83 गांवों के 21734 घरों तक शुद्व पेयजल पहुंचेगा। इसमें 170 एमएलडी के 3 जल शोधक संयंत्र तैयार हो रहे हैं। दो इंटेकवैल, विभिन्न क्षमता के उच्च जलाशय, स्वच्छ जलाशय व पंप हाउस, पंप सेटस, अलग-अलग व्यास की राइजिंग मेन निर्माण हो रहा। इन 220 गांवों में वितरण पाइप लाइन जोड़ने-बिछाने व 21734 घरों में कनेक्शन देने का काम भी इसमें शामिल है।