26 साल बाद जनवरी में उफनी चंबल, झरेल बालाजी पुलिया डूबी, कई गांवों का संपर्क कटा
जनवरी के महीने में चंबल नदी का इस तरह उफनना दुर्लभ माना जाता है, लेकिन 26 साल बाद चंबल ने इतिहास दोहरा दिया। बहरावंडा खुर्द से महज 8 किलोमीटर दूर पालीघाट पर चंबल नदी का जलस्तर चार दिनों में 43 सेंटीमीटर बढ़ गया। इसके चलते झरेल के बालाजी की पुलिया डूब गई और खातोली-इटावा सहित एक दर्जन गांवों का सवाई माधोपुर से सीधा संपर्क कट गया। हालात की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन को आनन-फानन में रास्ता बंद कर पुलिस जाब्ता तैनात करना पड़ा। जनवरी 2000 में छोड़ा था चंबल में पानी चंबल नदी में जनवरी माह में जलस्तर बढ़ना असामान्य माना जाता है। इससे पहले वर्ष 2000 में जनवरी में चंबल में पानी छोड़ा गया था, तब महज 15 सेंटीमीटर की बढ़ोतरी दर्ज हुई थी। लेकिन इस बार हालात अलग हैं। कोटा बैराज के नवनेरा बांध से पानी की निकासी और नहरों का पानी चंबल में आने के कारण पालीघाट पर पिछले चार दिनों में जलस्तर 43 सेंटीमीटर तक बढ़ गया। नदी का जलस्तर पहले 6 मीटर था, जो अब बढ़कर 6.42 मीटर पर पहुंच गया है। जलस्तर बढ़ने का सीधा असर झरेल के बालाजी की पुलिया पर पड़ा है। पुलिया के ऊपर करीब 24 सेंटीमीटर पानी बह रहा है, जिससे आवागमन पूरी तरह बाधित हो गया। सूचना मिलते ही तहसीलदार जयप्रकाश रोनल के नेतृत्व में राजस्व और पुलिस प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची। सुरक्षा को देखते हुए मशीनों से पुलिया के दोनों ओर मिट्टी डलवाकर रास्ता बंद कराया गया, ताकि कोई भी राहगीर जोखिम न उठाए। हालांकि इसके बावजूद कुछ ग्रामीण जान जोखिम में डालकर पुलिया पार करने का प्रयास करते नजर आए, जिन्हें पुलिस ने समझाइश कर वापस लौटाया। पुलिस ने दोपहिया, चारपहिया, बस और पिकअप वाहनों की आवाजाही पूरी तरह रोक दी है। झरेल बालाजी की पुलिया डूबने से खातोली, इटावा, कैथूदा, नीमसरा सहित एक दर्जन से अधिक गांवों का सवाई माधोपुर से सीधा संपर्क कट गया है। अब ग्रामीणों को श्योपुर होकर करीब 60 किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर लगाना पड़ रहा है। भास्कर में लगातार खबरें प्रकाशित होने के बाद प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था और सख्त कर दी है। पुलिया पर पटवारी, गिरदावर और पुलिस कांस्टेबलों की स्थायी तैनाती की गई है, ताकि कोई भी व्यक्ति पानी उतरने तक पुलिया पार न कर सके।