सिरोही में खनन परियोजना के खिलाफ महाआंदोलन का ऐलान:28 जनवरी से बेमियादी प्रदर्शन, गांव-गांव जनजागृति अभियान शुरू
सिरोही जिले में कमलेश मेटा कास्ट की प्रस्तावित खनन परियोजना के खिलाफ जनआंदोलन तेज हो गया है। क्षेत्रवासी पिछले तीन महीनों से इस परियोजना को रद्द करने की मांग कर रहे हैं। उनका आरोप है कि यह परियोजना पर्यावरण, जलस्रोतों और स्थानीय जनजीवन के लिए हानिकारक होगी। क्षेत्रवासियों की मुख्य मांग है कि प्रस्तावित खनन परियोजना को तत्काल निरस्त किया जाए। ग्रामीणों का कहना है कि इस परियोजना से खेती, पशुपालन और पीने के पानी के स्रोतों पर गंभीर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। सरकार द्वारा अब तक कोई ठोस निर्णय न लिए जाने से लोगों में नाराजगी है। सरकार की ओर से कोई प्रतिक्रिया न मिलने पर क्षेत्रवासियों ने विभिन्न सामाजिक संगठनों के साथ मिलकर 28 जनवरी 2026 से अनिश्चितकालीन महाआंदोलन की घोषणा की है। इस आंदोलन को व्यापक बनाने के लिए गांव-गांव में संपर्क अभियान चलाया जा रहा है। आंदोलन की तैयारियों के तहत पूरे क्षेत्र में जनजागृति अभियान चलाया जा रहा है। मुख्य मार्गों, गांवों और चौराहों पर खनन परियोजना के विरोध में होर्डिंग्स, बैनर और पोस्टर लगाए गए हैं। इनका उद्देश्य लोगों को परियोजना के संभावित नकारात्मक प्रभावों से अवगत कराना और उन्हें आंदोलन से जोड़ना है। खनन परियोजना को लेकर क्षेत्र में व्यापक आक्रोश है। ग्रामीणों, किसानों, पशुपालकों और युवाओं में रोष देखा जा रहा है। आंदोलनकारियों का कहना है कि यदि सरकार ने समय रहते परियोजना को रद्द नहीं किया, तो यह आंदोलन अब तक का सबसे बड़ा जनआंदोलन बन सकता है। अब सभी की निगाहें प्रशासन और राज्य सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं। क्षेत्रवासियों ने कहा है कि वे शांतिपूर्ण लेकिन निर्णायक संघर्ष के लिए तैयार हैं और मांग पूरी होने तक आंदोलन जारी रखेंगे।
सिरोही जिले में कमलेश मेटा कास्ट की प्रस्तावित खनन परियोजना के खिलाफ बेमियादी प्रदर्शन की चेतावनी।
सिरोही जिले में कमलेश मेटा कास्ट की प्रस्तावित खनन परियोजना के खिलाफ जनआंदोलन तेज हो गया है। क्षेत्रवासी पिछले तीन महीनों से इस परियोजना को रद्द करने की मांग कर रहे हैं। उनका आरोप है कि यह परियोजना पर्यावरण, जलस्रोतों और स्थानीय जनजीवन के लिए हानिकार
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क्षेत्रवासियों की मुख्य मांग है कि प्रस्तावित खनन परियोजना को तत्काल निरस्त किया जाए। ग्रामीणों का कहना है कि इस परियोजना से खेती, पशुपालन और पीने के पानी के स्रोतों पर गंभीर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। सरकार द्वारा अब तक कोई ठोस निर्णय न लिए जाने से लोगों में नाराजगी है।