टोपरिया में 3 हजार किसानों को मिले 350 यूरिया कट्टे:कड़ाके की ठंड में सुबह से लाइन में लगे, बोले- गेहूं और सरसों के लिए अधिक आवश्यकता
नोहर तहसील के गांव टोपरिया में यूरिया खाद का गंभीर संकट बना हुआ है। यहां 3 हजार किसानों के लिए मात्र 350 यूरिया के थैले उपलब्ध कराए गए। कड़ाके की शीत लहर के बावजूद किसान सुबह 6 बजे से ही सोसाइटी के बाहर लंबी कतारों में खड़े हो गए। जनवरी का महीना रबी की फसल की पकाई के लिए महत्वपूर्ण होता है। इस दौरान गेहूं और सरसों जैसी फसलों के लिए यूरिया की अत्यधिक आवश्यकता होती है। किसानों को उनकी आवश्यकतानुसार खाद नहीं मिलने से उनमें निराशा है। किसान पिछले काफी समय से खाद के संकट से जूझ रहे हैं। एक-एक यूरिया के थैले के लिए उन्हें लंबी लाइनों में धक्का-मुक्की का सामना करना पड़ता है, जिससे उनमें भारी रोष है। किसानों का आरोप है कि सरकारें बदलने के बावजूद व्यवस्था में कोई सुधार नहीं हुआ है। उच्च अधिकारियों को समाचार पत्रों के माध्यम से कई बार समस्या से अवगत कराया गया है, लेकिन कृषि विभाग के अधिकारी कभी मौके पर पहुंचकर किसानों से बात नहीं करते। फसलों की बुवाई और पकाई के समय यूरिया के लिए किसानों को दर-दर भटकना पड़ता है। घंटों तक सर्दी, गर्मी या बारिश में लाइन में खड़े रहने के बाद भी आवश्यकतानुसार खाद न मिलने से पैदावार अच्छी नहीं होती। इससे किसानों के जीवनयापन में भारी परेशानी आती है, क्योंकि खेती से सिर्फ लागत ही पूरी हो पाती है और अन्य जरूरतों के लिए पर्याप्त फसल नहीं मिल पाती। वितरण के दौरान प्रत्येक किसान को केवल एक यूरिया का बैग दिया गया। सोसाइटी के अधीन आने वाले चक क्षेत्रों के किसानों को भी खाद की कमी के कारण खाली हाथ लौटना पड़ा। किसानों का कहना है कि रबी और खरीफ दोनों फसलों के समय यूरिया और डीएपी की किल्लत बनी रहती है। समय पर बुवाई न होने से कटाई में भी देरी होती है, जिससे अनुमानित फसल प्राप्त नहीं हो पाती।
नोहर तहसील के गांव टोपरिया में यूरिया खाद का गंभीर संकट बना हुआ है। यहां 3 हजार किसानों के लिए मात्र 350 यूरिया के थैले उपलब्ध कराए गए। कड़ाके की शीत लहर के बावजूद किसान सुबह 6 बजे से ही सोसाइटी के बाहर लंबी कतारों में खड़े हो गए।