डांगाजी का स्टिंग और 'नाटक':जिलाध्यक्ष बोलीं- '3 कैंची मंगवानी चाहिए थी'; किरोड़ी बाबा का 'दमदार डांस'
नमस्कार डांगा के स्टिंग के बाद मार्केट में AI वाले वीडियोज की बहार है। किरोड़ी बाबा पर कन्हैया दंगल की ऐसी धुन सवार हुई कि घुटनों की भी परवाह नहीं की। मकराना में एक रिबन माननीयों के ईगो का सवाल बन गया। डीग में न मंच न समारोह, एक वक्ता और एक श्रोता, गजब का कवि सम्मेलन हुआ। राजस्थान की राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के इस एपिसोड में... 1. स्टिंग ऑपरेशन और 'मिर्ची बड़े जितनी सोच' डांगा जी कई दिन से परेशान हैं। जब से स्टिंग हुआ है, तब से जान हलक में है। फंड रुका पड़ा है। नोटिस मिल चुका है। कार्रवाई का डर सता रहा है। केंद्रीय मंत्रीजी के पास जाकर दुखड़ा रो आए। अब कहीं जाकर सकारात्मक रुझान आ रहे हैं। पार्टी संगठन के मुखिया ने जब डांगा जी पर कार्रवाई को लेकर सवाल किया तो 'सॉफ्ट कॉर्नर' नजर आया। मुखिया जी ने जो कुछ कहा, उसका सार इस प्रकार है- अपराध तो हमारे विधायक ने भी किया और फलां पार्टी के फलां विधायक ने भी किया। लेकिन अपराध अपराध में अंतर है। फलां विधायक ने तो प्रश्न लगाकर अमुक व्यक्ति को ब्लैकमेल किया। डराया। फिर पैसे ले लिए। पैसे लेते हुए पकड़े तक गए। लेकिन हमारे वाले विधायक के साथ जो कुछ हुआ वह एक नाटक था। स्टिंग था। न कुछ खरीदा, न बेचा। न धरातल पर कोई काम हुआ। हो सकता है पत्रकार ने ही फंसाया हो, घुमाया हो, पाबंद किया हो। पता नहीं क्या काट दिया, क्या छांट दिया? क्या छापा क्या छुपाया? जो कुछ भी है अनुशासन समिति समीक्षा करेगी। फिर विधानसभा की शुचिता समिति के पास मामला जाएगा। आगे कोर्ट भी हैं। कुल मिलाकर यह कि डांगा जी के आंसुओं का रुझान आ रहा है। पार्टी ने तो 'सॉफ्ट कॉर्नर' दिखा दिया लेकिन सोशल मीडिया पर AI वीडियो बनाने वाले डांगा-प्रेमियों का क्या करें? एक वीडियो सामने आया। जिसमें AI वाले पूर्व मुखिया जी और एक सांसद महोदय अलाव तापते हुए बात कर रहे हैं। पूर्व मुखिया जी कहते हैं- ये डांगा जी ने क्या किया नागौर का नाम खराब कर दिया। इस पर सांसद का जवाब- इनको मैंने पहले ही समझाया था कि तुम्हारी सोच मिर्च बड़े जितनी ही है। 2. जिलाध्यक्ष बोलीं- तीन कैंची मंगवा लेते जिलाध्यक्ष महोदय ऐसी पार्टी से आती हैं जिसके लिए नामुमकिन कुछ भी नहीं। इसलिए उद्घाटन का फीता 3 कैंचियों से 3 जगह से काटा जा सकता है। इसका लाभ यह होगा कि रिबन के दो टुकड़े हाथ आ जाएंगे। जिन्हें किसी स्कूल बालिका को गिफ्ट भी किया जा सकता है। बात मकराना की है। मकराना डीडवाना-कुचामन में आता है। यहां के सरकारी हॉस्पिटल में नया डायलिसिस रूम बना। इसी का फीता कटना था। अस्पताल वालों ने प्रोटोकॉल की मजबूरी के कारण भाजपा जिलाध्यक्ष और प्रधान के साथ-साथ कांग्रेस विधायक को भी बुला लिया। फीता काटने की बारी आई तो विधायक, जिलाध्यक्ष और प्रधान तीनों खड़े हो गए। लेकिन कैंची सौंप दी विधायक जी को। विधायक ने 'खच' से रिबन काट दिया। इस हृदय-विदारक घटना से जिलाध्यक्ष महोदया को बहुत बुरा लगा। विधायक जी को कुछ कह नहीं पाईं। PMO साहब को जमकर लताड़ पिलाई। चिल्लाकर पूछने लगीं- तुम्हें पता है एक रूलिंग पार्टी का जिलाध्यक्ष कौन होता है? रिबन काटना था तो तीन कैंचियां मंगा लेते। मेरा और मेरे दल का अपमान क्यों किया? विधायक जी ने प्रोटोकॉल का गीत गाकर कार्यक्रम का समापन किया। 3. बाबा किरोड़ी ने डांस में दिखाया दम वे 74 साल के हैं। इस बात को वे स्वीकार नहीं करते। क्योंकि उनका नाम डॉ. किरोड़ी लाल मीणा है। वे कृषि मंत्री हैं। इस उम्र में घुटने सवाल-जवाब करने लगते हैं। हिम्मत टूटने लगती है। मन पर उदासी छायी रहती है। रिश्तों से मोह भंग हो जाता है। उत्सव से इंसान कुढ़ने लगता है। खेल-तमाशों का शोर तंग करने लगता है। मेथी-अजवायन सब फेल हो जाती है। दुनिया फानी लगती है। लेकिन किरोड़ी बाबा की बात ही अलग। वे संस्कृति पर लच्छेदार भाषण नहीं देते। धूल में उतर जाते हैं। धुन में डूब जाते हैं। बच्चों की तरह कूद-कूद कर नाचते हैं। दौड़ने की बात हो तो दौड़ लगाने लगते हैं। बल्ला दिखे तो गेंद पर शॉट जमा देते हैं। कहीं भी, किसी से भी हंसी मसखरी कर लेते हैं। करौली के कैमला गांव में हुए कन्हैया दंगल में बाबा ने दिखा दिया कि उम्र सिर्फ एक नंबर है। जिसे जीना आए वही जवान। 4. चलते-चलते.. बिटिया ने अभिनेता आशुतोष राणा की कविता कलयुग सुनी। बिटिया को पसंद आई। उसने कविता को रट लिया। कविता के हाव-भाव पकड़ लिए। एक दिन मौका मिला और अभिनेता को उसी की रचित कविता सुना डाली। रचयिता ने भी तारीफ की। कहा- बच्ची बहुत बढ़िया। इतने सुंदर ढंग से तो मेरी कविता मैं खुद नहीं सुना पाता। बिटिया का हौसला सातवें आसमान पार। अब यही तमन्ना कि कविता दिग्गजों को सुनाए। सर्दी की छुटि्टयों में बिटिया माता पिता के साथ देवदर्शन के लिए जयपुर से गोवर्धन महाराज के गई। वहां घूमते-घूमते पता चला कि श्रीनाथजी मंदिर में मुख्यमंत्री भजनलाल आ रहे हैं। बिटिया ने जिद पकड़ ली कि कविता सुनाऊंगी। बात सीएम के अंगरक्षकों तक पहुंची। अंगरक्षकों से स्टाफ तक पहुंची। स्टाफ से अधिकारियों तक पहुंची। अधिकारियों से सीएम के कानों तक भी पहुंची। मुख्यमंत्रीजी ने वहीं एक गलियारे में आए और कहा- सुनाओ बिटिया कविता। न मंच, न समारोह। न मसनद न कुर्सियां। छोटी सी बालिका वक्ता और पूरे प्रदेश का मुखिया श्रोता। ऐसे भाव और भंगिमाओं से बच्ची ने कविता सुनाई कि सीएम साहब गदगद। ताली बजाई। आशीर्वाद दिया। शॉल ओढ़ाकर शाबाशी दी। वीडियो देखने के लिए ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब कल मुलाकात होगी...



