38 दिन में सिर्फ 12% खरीद, अब लक्ष्य पूरा करने के चक्कर में किसानों पर जुल्म
भास्कर न्यूज | नागौर एमएसपी पर मूंग खरीद प्रक्रिया अब किसानों के लिए राहत के बजाय आफत बन गई है। सरकारी आंकड़ों में लक्ष्य को पूरा करने की कोशिश ने किसानों को भीषण सर्दी में ठिठुरने पर मजबूर कर दिया। बीते तीन दिनों से कृषि उपज मंडी के बाहर का नजारा देखकर किसानों की परेशानी झलक रही है। दरअसल, जिले में इस बार 70 हजार टन मूंग खरीद का टारगेट है। इससे बढ़ाने के चक्कर में जिम्मेदारों ने जमीनी हकीकत को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया। नतीजा यह हुआ कि 29, 30 और 31 दिसंबर को आनन-फानन में हर दिन 250-250 किसानों को तुलाई के मैसेज भेज दिए गए। हैरानी की बात यह है कि जिम्मेदारों का कहना है कि राजफेड जयपुर से बीना बताएं किसानों को बड़ी मात्रा में टोकन जारी किया है। नागौर. नंबर नहीं आने से ट्रॉलियों में कटी रातें। सिस्टम की गणित कितनी 'फेल है, इसे आंकड़ों से समझिए। जिम्मेदारों ने रोजाना 250 किसानों को मंडी बुलाया, लेकिन हकीकत यह है कि एकमात्र ग्रेडिंग मशीन सुबह से देर रात तक चलने के बावजूद केवल 100 किसानों की ही तुलाई कर सकी। सवाल यह है कि जिन 150 किसानों को मैसेज देकर बुलाया गया और उनकी तुलाई नहीं हुई, उनके साथ हुए इस धोखे का जिम्मेदार कौन है? ये किसान अपनी ट्रॉलियां लेकर खुले आसमान के नीचे रात गुजारने को मजबूर हैं। बिना पूछे बांटे टोकन डिप्टी रजिस्ट्रार कमल रुलानिया ने बताया कि स्थानीय स्तर पर प्रतिदिन केवल 40-50 किसानों की मूंग तुलाई की व्यवस्था है। लेकिन जयपुर स्तर से सोमवार से ही बिना किसी सलाह के रोजाना 250 से ज्यादा किसानों को टोकन आवंटित कर दिए गए। इसी कारण मंडी में अफरातफरी मची है। हालांकि 1-2 जनवरी की छुट्टी थी , लेकिन मैनेजमेंट की गलती सुधारने के लिए उन किसानों की तुलाई जारी रखी गई है जो पहले से कतार में फंसे हैं। जिले में मूंग खरीद की रफ्तार का अंदाजा इन आंकड़ों से लगाया जा सकता है। सरकार ने इस बार 70 हजार टन (7 लाख क्विंटल) खरीद का लक्ष्य रखा है, लेकिन 38 दिन बीत जाने के बाद भी अब तक केवल 82,513 क्विंटल मूंग ही खरीदी जा सकी है। यानी निर्धारित 90 दिनों में से लगभग आधा समय बीतने को है और लक्ष्य महज 12 प्रतिशत ही पूरा हुआ है। अब तक केवल 3,851 किसान ही अपनी उपज बेच पाए हैं। लक्ष्य की ओर बढ़ने की ओर अधिकारियों ने अचानक शॉर्टकट अपनाया। जहां रोजाना केवल 40-50 किसानों को बुलाया जा रहा था, वहां बिना संसाधनों के अचानक संख्या बढ़ाकर 250 कर दी गई। जबकि इस बात की भनक स्थानीय अधिकारियों को भी नहीं लगी। जिस कारण से ही किसानों को परेशानी हुई। क्योंकि मंडी में रोजाना 40-50 किसानों के मूंग तुलाई की व्यवस्था है। ऐसे में एक साथ ज्यादा टोकन जारी करने से मोबाइल पर मैसेज मिलते ही किसान अपनी उपज लेकर उम्मीद के साथ मंडी पहुंचे, लेकिन वहां उनके स्वागत के लिए केवल अव्यवस्थाएं खड़ी थीं। दिन ढला, सूरज डूबा और पारा नीचे गिरा, लेकिन किसानों का नंबर नहीं आया। मजबूरन किसानों को अपनी ट्रॉलियों के साथ मंडी परिसर के बाहर, खुले आसमान के नीचे ठंड में रातें काटनी पड़ीं। अलाव जलाकर खुद को गर्म रखने की कोशिश करते इन किसानों का कसूर सिर्फ इतना था कि उन्होंने सिस्टम के मैसेज पर भरोसा किया।