जयपुर में दिखीं करोड़ों रुपए की 45 दुर्लभ पेंटिंग्स:RIC में यूपी ललित कला अकादमी का कलेक्शन प्रदर्शित, एग्जीबिशन के लिए कराया इंश्योरेंस
राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर (आरआईसी) की आर्ट गैलरी में अंतरराज्य विनिमय कला प्रदर्शनी का शुभारंभ हुआ। इसमें कला प्रेमियों को करोड़ों रुपए मूल्य की दुर्लभ पेंटिंग्स देखने का अवसर मिल रहा है। उत्तर प्रदेश राज्य ललित कला अकादमी के सहयोग से आयोजित प्रदर्शनी में अकादमी के संग्रह से चयनित 45 महत्वपूर्ण और मौलिक कलाकृतियों को प्रदर्शित किया गया है। यह कलेक्शन इतना दुर्लभ है कि इनमें से कई पेंटिंग्स के रचनाकारों में अभी केवल चार–पांच कलाकार ही जीवित हैं। प्रदर्शनी में प्रदर्शित कलाकृतियों का बाजार मूल्य करोड़ों रुपए में आंका गया है। इसी कारण इन अमूल्य रचनाओं की सुरक्षा को देखते हुए अकादमी द्वारा इनका विशेष रूप से इंश्योरेंस भी कराया गया है, ताकि किसी भी तरह की क्षति से इन्हें सुरक्षित रखा जा सके। अतिथियों की मौजूदगी में हुआ उद्घाटन प्रदर्शनी का उद्घाटन उत्तर प्रदेश राज्य ललित कला अकादमी के अध्यक्ष डॉ. सुनील कुमार विश्वकर्मा ने किया। इस अवसर पर राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर के निदेशक एन.सी. गोयल, राजस्थान ललित कला अकादमी के पूर्व अध्यक्ष अश्विन दलवी, आईएएस अधिकारी पी.सी. किशन, शाह बक्श सहित कला जगत से जुड़े कई वरिष्ठ कलाकार मौजूद रहे। 2 हजार पेंटिंग्स में से चुनी गईं 45 अमूल्य कृतियां डॉ. सुनील कुमार विश्वकर्मा ने बताया- उत्तर प्रदेश राज्य ललित कला अकादमी के पास लगभग 2 हजार पेंटिंग्स का विशाल संग्रह है। इनमें से 45 अत्यंत महत्वपूर्ण और मूल कृतियों को प्रदर्शनी के लिए चयनित किया गया है। उन्होंने कहा- यह ऐसी कलाकृतियां हैं, जो कलाकारों द्वारा स्वयं बनाई गई मूल पेंटिंग्स हैं। इनका बाजार मूल्य करोड़ों रुपए में है। देश के दिग्गज कलाकारों की रचनाएं एक मंच पर प्रदर्शनी में भारतीय कला जगत के कई महान और प्रतिष्ठित कलाकारों की कृतियां शामिल की गई हैं। इनमें नंदलाल बोस, जामिनी रॉय, असित कुमार हलदर, रामकिंकर बेज, जतिन दास, एन.के. मिश्रा, मुनी सिंह, यशोधर मतपाल, ए.पी. दुबे, प्रभात नियोगी, बी.एस. भटनागर, ललित मोहन सेन, एच.एल. मेध, जगन्नाथ मुरलीधर असिवसी, बैजनाथ, सुधीर रंजन, रणबीर सिंह बिष्ट, एस.जी. श्रीकंधे सहित कई अन्य प्रसिद्ध नाम शामिल हैं। साथ ही राजस्थान के वरिष्ठ कलाकार सुरेन्द्र पाल जोशी की 1994 में बनाई गई एक महत्वपूर्ण पेंटिंग भी इस प्रदर्शनी में प्रदर्शित की गई है। भारतीय कला की वैचारिक गहराई और सामाजिक चेतना का दर्शन राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर, जयपुर की क्यूरेटर एवं सहायक कार्यक्रम अधिकारी निखत अंसारी ने बताया- इन कलाकृतियों में भारतीय कला की वैचारिक गहराई, सामाजिक चेतना और सौंदर्यबोध स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। एक ही मंच पर इतने महान कलाकारों की अमूल्य कृतियां देखना कला प्रेमियों के लिए एक दुर्लभ अवसर है। वाश तकनीक पर विशेष चित्रकला कार्यशाला भी प्रदर्शनी के साथ 3 से 7 जनवरी तक प्रतिदिन दोपहर 12 बजे से शाम 5 बजे तक वाश तकनीक पर आधारित चित्रकला कार्यशाला का भी आयोजन किया जाएगा। यह कार्यशाला वरिष्ठ एवं प्रतिष्ठित कलाकार राजेंद्र प्रसाद द्वारा संचालित की जाएगी। करीब 15 वर्षों के अंतराल के बाद आयोजित हो रही यह कार्यशाला विद्यार्थियों और कला में रुचि रखने वालों के लिए अनूठा अवसर है। इसमें जल माध्यम, पारदर्शिता, टोनल वेरिएशन, रंग संतुलन और मुक्त ब्रश तकनीक का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा।