डीग जलमहलों के तालाबों में सीवर, ऐतिहासिक विरासत संकट में:46वें दिन भी धरना जारी, घाट पर अर्द्धनग्न प्रदर्शन, भूख हड़ताल की दी चेतावनी
डीग के जलमहलों से जुड़े रूप सागर और गोपाल सागर तालाबों में लगातार गंदा पानी पहुंचने से उनकी स्थिति बिगड़ रही है। इस गंभीर समस्या को लेकर भाजयुमो के पूर्व जिला उपाध्यक्ष गिरीश शर्मा के नेतृत्व में चल रहा अनिश्चितकालीन धरना शनिवार को 46वें दिन भी जारी रहा। प्रदर्शनकारियों ने तालाब के घाट पर अर्द्धनग्न प्रदर्शन कर प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि तालाबों में सीवर का पानी गिरना जल्द नहीं रोका गया, तो आंदोलन को और तेज करते हुए भूख हड़ताल शुरू की जाएगी। गिरीश शर्मा ने बताया कि डीग स्केप क्षेत्र के किनारे बसे कई घरों का गटर सीधे गोपाल सागर (कच्चा तालाब) और रूप सागर (पक्का तालाब) में मिल रहा है। यह दूषित पानी आगे चलकर किले की खाई तक भी पहुंच रहा है। शर्मा ने आगे कहा कि घरों के शौचालयों से निकलने वाला गंदा पानी तालाबों को प्रदूषित कर रहा है, जिससे आमजन और जीव-जंतुओं पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। उन्होंने विभागीय अधिकारियों की अनदेखी को ऐतिहासिक धरोहरों की पहचान खोने का कारण बताया। ये तालाब कभी जलमहलों की शान हुआ करते थे। इनसे जलमहलों को पानी की आपूर्ति होती थी और गुरुत्वाकर्षण के माध्यम से बिना बिजली के फव्वारे संचालित किए जाते थे। गोपाल भवन, सूरज भवन और नाव के आकार के सावन-भादो भवन इन्हीं तालाबों के बीच स्थित हैं। उचित रख-रखाव के अभाव में आज ये तालाब बदहाली की ओर बढ़ रहे हैं। धरनार्थियों ने मांग की है कि नालियों की व्यवस्था को दुरुस्त कर सीवर का पानी तालाबों में जाने से रोका जाए और इन ऐतिहासिक जल संरचनाओं का संरक्षण सुनिश्चित किया जाए।
डीग के जलमहलों से जुड़े रूप सागर और गोपाल सागर तालाबों में लगातार गंदा पानी पहुंचने से उनकी स्थिति बिगड़ रही है। इस गंभीर समस्या को लेकर भाजयुमो के पूर्व जिला उपाध्यक्ष गिरीश शर्मा के नेतृत्व में चल रहा अनिश्चितकालीन धरना शनिवार को 46वें दिन भी जारी
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प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि तालाबों में सीवर का पानी गिरना जल्द नहीं रोका गया, तो आंदोलन को और तेज करते हुए भूख हड़ताल शुरू की जाएगी।
गिरीश शर्मा ने बताया कि डीग स्केप क्षेत्र के किनारे बसे कई घरों का गटर सीधे गोपाल सागर (कच्चा तालाब) और रूप सागर (पक्का तालाब) में मिल रहा है। यह दूषित पानी आगे चलकर किले की खाई तक भी पहुंच रहा है।
शर्मा ने आगे कहा कि घरों के शौचालयों से निकलने वाला गंदा पानी तालाबों को प्रदूषित कर रहा है, जिससे आमजन और जीव-जंतुओं पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। उन्होंने विभागीय अधिकारियों की अनदेखी को ऐतिहासिक धरोहरों की पहचान खोने का कारण बताया।