खुशकिस्मत... जो जयपुर में ऑडी का शिकार होने से बचे:ठेला मालिक की पत्नी 5 मिनट पहले निकली, दोस्त के साथ जाने से बची जान
जयपुर में 9 जनवरी की रात रेसिंग कर रहे ऑडी कार ने कहर बरपाया। मानसरोवर इलाके में तेज रफ्तार ऑडी पहले डिवाइडर से टकराई, फिर सड़क किनारे लगी फूड स्टॉल्स में घुस गई। 16 लोगों को रौंदने के बाद पेड़ से टकराकर रुकी। 1 की मौत हो गई और 4 लोग घायल हैं। भास्कर ने मौके पर चश्मदीदों से हादसे के कारण जाने और उन लोगों से भी बात की जो एक्सीडेंट का शिकार होने से बच गए। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… कार के नीचे दब गए थे 2 लोग ऑडी ने सबसे आगे खड़े दाल-बाटी के ठेले को टक्कर मारी। गणेश विहार में रहने वाले राजेंद्र सिंह ठेला था। वह पिछले 9 महीने से खरबास सर्किल सर्विस लेन पर ठेला लगा रहे हैं। उनकी पत्नी सीमा ने भास्कर रिपोर्टर को बताया- मैं ठेले पर ही थी। हादसे से करीब 5 मिनट पहले मैं अपने बेटे को घर छोड़ने के लिए आई थी। घर पहुंचते ही हादसे के बारे में फोन आया। वापस गई तो ठेले का सारा सामान सड़क पर बिखरा था। मेरे ठेले पर काम करने वाले भीलवाड़ा के रमेश की मौत हो गई। एक और युवक अचेत अवस्था में पड़ा था। कार को पलटकर हमने उसके नीचे से दोनों को निकाला। रोज खाना खाने जाता था, कल नहीं गया, इसलिए बची जान अम्बालाल चौधरी खरबास सर्किल पर ही रहते हैं। रोज राजेंद्र के ठेले पर ही खाते थे। चौधरी ने बताया कि 9 जनवरी की शाम एक दोस्त से मिलने चला गया था। आने में देर हो गई। वापस खरबास सर्किल पर गए तो हादसे का पता चला। चौधरी का कहना है कि 200 फीट रोड की चौड़ाई है। रात के समय भीड़ कम होने पर अक्सर यहां कार रेसिंग, स्टंट करने वाले सक्रिय रहते हैं। पत्रकार कॉलोनी टी पॉइंट पर एक चौकी भी बनाई गई है, लेकिन शाम के समय वहां कोई नहीं रहता। तेज धमाके से पूरा इलाका दहल गया प्रत्यक्षदर्शी शिवबली सिंह हादसे के समय ठेले के ठीक सामने अपने ऑटो में बैठे थे। वो कहते हैं- जैसे ही कार ने टक्कर मारी, तेज धमाके से पूरा इलाका दहल गया। पेड़ न होता तो कार और आगे तक टक्कर मारती हुई बैंक्वेट हाल की दीवार से टकराकर रुकती। सुभाष गोदारा हादसे के बाद सबसे पहले मौके पर पहुंचने वालों में से थे। बोले- कार में चार लोग सवार थे। पत्रकार कॉलोनी के टी पॉइंट और महिमा सर्किल की तरफ से कार बहुत तेज गति से आई और सर्किल के किनारे से टकरा गई। घर पर ताला, अकेला कमाने वाला था रमेश हादसे में मारा गया रमेश घर का इकलौता कमाने वाला था। वह भीलवाड़ा के बड़लियास का रहने वाला है। परिवार में बुज़ुर्ग मां और भाई हैं। वह ठेला मालिक राजेंद्र के साथ काम करता था और उन्हीं के घर रहता था। रमेश ने पिता की मौत के बाद पढ़ाई बीच में ही छोड़कर परिवार की जिम्मेदारी संभाल ली थी। वह यहां करीब 6-7 महीने से काम कर रहा था। रमेश के अन्य रिश्तेदार भी साथ ही रहते थे। भास्कर रिपोर्टर गणेश विहार स्थित राजेंद्र के घर पहुंचा, जहां रमेश भी रहता था। वहां गेट पर ताला लगा हुआ था। वहां रमेश के परिचित उम्मेद सिंह से बात हुई। उम्मेद सिंह ने बताया- हादसे के वक्त वो चाय पीने के लिए ठेले के सामने वाली सड़क पर रुके थे। हादसे के बाद मुख्य आरोपी भीड़ का फायदा उठाकर भाग गया। NHAI–IRC मानकों पर क्यों खतरनाक है खरबास सर्किल चौड़ी सड़क + गलत सर्किल एंगल यानी तेज रफ्तार को न्योता NHAI / IRC क्या कहते हैं: शहरी क्षेत्र में डिजाइन स्पीड 40–50 किमी/घंटा मानी जाती है। चौड़ी सड़क का मतलब क्षमता बढ़ाना है, स्पीड बढ़ाना नहीं। जहां पैदल यात्री, ठेले, दुकाने हों, वहां ट्रैफिक नियंत्रित और सुगम होना जरूरी है। खरबास सर्किल पर हकीकत: करीब 200 फीट चौड़ाई, कोई विजुअल या फिजिकल स्पीड-रिस्ट्रिक्शन नहीं। इससे ड्राइवर को रेस के लिए खुला ट्रैक मिलने का एहसास, स्पीड अपने आप बढ़ती है। सर्किल एंगल और रेडियस: यही सबसे बड़ी चूक नियम के मुताबिक: राउंडअबाउट/सर्किल का एप्रोच एंगल ऐसा होना चाहिए कि गाड़ियां स्वाभाविक रूप से धीमी हों। डायरेक्ट, स्ट्रेट एंट्री को अवॉयड किया जाता है। एंट्री पर मोड़ अनिवार्य माना जाता है। खरबास सर्किल की स्थिति: सर्किल की एप्रोच लगभग सीधी लाइन में आती है। ड्राइवर को मोड़ का प्रेशर नहीं मिलता। नतीजा- कार बिना स्पीड कम किए सर्किल में प्रवेश करती है। रंबल स्ट्रिप और ब्रेकर : नदारद NHAI / IRC की सिफारिश: सर्किल से पहले रंबल स्ट्रिप / स्पीड ब्रेकर्स, हाई रिस्क लोकेशन पर ऑडिबल और फिजिकल वार्निंग हो। मौके पर न रंबल स्ट्रिप, न ब्रेकर। परिणाम- ड्राइवर को खतरे का कोई संकेत नहीं मिलता। स्ट्रीट लाइटिंग: सेफ्टी का बेसिक पैमाना नियम कहता है- सर्किल पर शैडो जोन नहीं होना चाहिए। खरबास सर्किल: रोशनी असमान, कुछ हिस्से अंधेरे में होने से स्पीड और रिएक्शन टाइम दोनों प्रभावित होते हैं। कुल मिलाकर खरबास सर्किल पर सड़क की चौड़ाई, सीधी एप्रोच और स्पीड कंट्रोल के इंतजामों की कमी मिलकर ड्राइवर को तेज रफ्तार का खुला न्योता देती है। यह हादसा सिर्फ लापरवाही नहीं, डिजाइन में कुछ कमियों का नतीजा भी है। एफएसएल, एक्सीडेंट रिसर्च टीम ने सबूत जुटाए हादसे के बाद जेसीबी की मदद से सड़क पर बिखरा सामान हटाया गया और हल्का बल प्रयोग और समझाकर भीड़ को भी हटाया गया। इस दौरान पुलिस की एक्सीडेंट रिसर्च टीम और एफएसएल ने मौके से सबूत जुटाए, ताकि गाड़ी के अनियंत्रित होने की वजह, स्पीड, पलटने का कारण और दूसरे तकनीकी पहलुओं को भी जांच में शामिल कर सकें। 120 की रफ्तार से दौड़ाई थी कार हादसे वाले दिन 120 की रफ्तार से कार दौड़ाई गई थी। जानलेवा रेस की शुरुआत अहिंसा सर्किल से हुई थी। ऑडी मालिक दिनेश रणवा (32) ने शराब पीते हुए तेज रफ्तार में ड्राइविंग की। वह साथ बैठे दोस्तों को स्पीड और कंट्रोल दिखाना चाहता था। दोस्तों के मना करने के बाद भी स्पीड बढ़ाता रहा। नतीजा यह हादसा हुआ। --- जयपुरी ऑडी कार हादसे की ये खबरें भी पढ़िए... 1. ऑडी हादसा- सिर में ऐसा छेद कि उंगली चली जाए:जयपुर में रफ्तार का कहर, किसी की रीढ़ की हड्डी तो किसी की पसलियां टूटीं एक दम से तेज कार चलने की आवाज आई। जैसे ही मैं मुड़ा, उसने हम सबको रौंद डाला। मैं उछल कर पीछे की ओर गिरा और बेहोश हो गया। इतना कहते-कहते 26 साल के मृदुल पंवार सिहर उठते हैं। उनके चेहरे का रंग उड़ जाता है। उस खौफनाक रात को अब कभी नहीं भूल पाएंगे। पढ़ें पूरी खबर 2. ऑडी-हादसा,VIP मूवमेंट से पहले हॉस्पिटल में लगा पोछा: वार्ड से मरीजों के परिजनों को बाहर निकाला; चश्मदीद बोला- पुलिस ने लाठीचार्ज किया जयपुरिया हॉस्पिटल के वार्ड से घायलों के परिवार को बाहर निकाल दिया गया। अस्पताल में रात 12 बजे पोछा लगाया गया। ये सब तब हुआ, जब घायलों से मिलने डिप्टी सीएम प्रेमचंद बैरवा, चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर, गृह राज्यमंत्री जवाहर सिंह बेढ़म और विधायक गोपाल शर्मा पहुंचे थे। पढ़ें पूरी खबर 3. जयपुर-रेस लगा रही ऑडी ने 16 को रौंदा, एक मौत:120kmph स्पीड थी, बेकाबू होकर डिवाइडर से टकराई, फिर फूड स्टॉलों में घुसी जयपुर में 9 जनवरी की देर रात रेसिंग कर रहे एक ऑडी कार ने कहर मचा दिया। मानसरोवर के भीड़भाड़ वाले इलाके में 120 की रफ्तार से दौड़ रही ऑडी कार पहले बेकाबू होकर डिवाइडर से टकराई, फिर सड़क किनारे लगी फूड स्टॉल्स में घुस गई। पढ़ें पूरी खबर







