जैसलमेर नए साल की शुरुआत में ठिठुरा:पश्चिमी विक्षोभ एक्टिव, दो-तीन दिन में 5 से 7 डिग्री तक गिर सकता है न्यूनतम तापमान
साल 2026 की शुरुआत रेगिस्तान के लिए किसी बर्फीले एहसास से कम नहीं रही। जहां एक ओर पूरा देश नए साल के जश्न में डूबा था, वहीं सीमावर्ती जैसलमेर जिले सहित आसपास के नहरी क्षेत्रों में मौसम ने अपनी चाल बदल ली है। सक्रिय हुए पश्चिमी विक्षोभ के कारण साल के पहले दिन, गुरुवार को जैसलमेर शहर से लेकर सरहदी गांवों तक घना कोहरा छाया रहा। कड़ाके की ठंड और दृश्यता कम होने के कारण जनजीवन की रफ्तार धीमी पड़ गई है। मौसम विभाग का अनुमान है कि पश्चिमी विक्षोभ के गुजरने के बाद अब उत्तरी बर्फीली हवाएं मैदानों की ओर रुख करेंगी, जिससे आने वाले दो-तीन दिनों में न्यूनतम तापमान 5 से 7 डिग्री तक नीचे जा सकता है। कोहरे की चादर में लिपटा नया साल गुरुवार, 1 जनवरी की सुबह जैसलमेर शहर सहित ग्रामीण क्षेत्रों में दृश्यता कम दर्ज की गई। कोहरे के कारण वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई और हाईवे पर वाहन रेंगते नजर आए। हैरानी की बात यह रही कि बुधवार को जहां दिन में बादल छाने और बारिश होने से सर्दी का एहसास बढ़ा, वहीं बादलों की चादर के कारण रात का पारा सामान्य से काफी ऊपर बना रहा। दिन और रात के पारे में 11 डिग्री का भारी अंतर देखा गया। लेकिन गुरुवार को कोहरा छाने के साथ ही अब न्यूनतम तापमान में गिरावट की आशंका जताई जा रही है। बाजारों और पर्यटन पर असर नए साल के मौके पर जैसलमेर आए हजारों पर्यटकों को इस बार 'डेजर्ट विंटर' का असली एहसास हुआ। हालांकि, घने कोहरे और ठंडी हवाओं के कारण सुबह के समय पर्यटकों की चहल-पहल कम रही। स्थानीय बाजारों में गर्म कपड़ों और चाय-पकौड़ों की दुकानों पर भीड़ देखी जा रही है। दो दिन तक कोहरा छाए रहने की आशंका मौसम विज्ञान केंद्र, जयपुर के अनुसार, आगामी 48 घंटों में जैसलमेर, बीकानेर और श्रीगंगानगर बेल्ट में 'कोल्ड डे' की स्थिति बनी रह सकती है। विक्षोभ के असर से हवा में नमी अधिक है, जिसके कारण अगले दो दिनों तक सुबह के समय घना कोहरा छाने की प्रबल संभावना है। प्रशासन ने वाहन चालकों को सावधानी बरतने और फॉग लाइट का उपयोग करने की सलाह दी है। फसलों के लिए अमृत, आमजन के लिए कंपकंपी जिले में बुधवार को मौसम में आए अचानक बदलाव ने सबको चौंका दिया। सुबह से ही आसमान में बादलों की आवाजाही शुरू हो गई थी, जो दोपहर होते-होते हल्की बारिश में तब्दील हो गई। नाचना नहरी क्षेत्र के नाचना, पांचे का तला, अवाय, भदड़िया, सांकड़िया, भारेवाला और मोहनगढ़ जैसे इलाकों में हुई सीजन की पहली मावठ ने पूरे क्षेत्र को अपनी चपेट में ले लिया। इस हल्की बारिश और सर्द हवाओं ने वातावरण में नमी बढ़ा दी है, जिससे ठिठुरन महसूस की जा रही है। हालांकि, कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, यह मावठ रबी की फसलों, विशेषकर गेहूं, सरसों और चने के लिए 'गोल्डन ड्रॉप्स' साबित होगी। नहरी क्षेत्रों में सिंचाई की समस्या झेल रहे किसानों के लिए यह प्राकृतिक बारिश किसी वरदान से कम नहीं है। रात का पारा बढ़ा, दिन में बढ़ी सर्दी मौसम विभाग के आंकड़ों पर नजर डालें तो बुधवार का दिन काफी उतार-चढ़ाव वाला रहा: --------- ये खबर भी पढ़ें ... जैसलमेर में साल के आखिरी दिन बारिश:स्वर्णनगरी में साल का अंत रिमझिम के साथ, अब 1 जनवरी को 'यलो अलर्ट' साल 2025 का विदाई सप्ताह जैसलमेर के लिए मरुधरा की खास सौगात 'मावठ' लेकर आया है। बुधवार, 31 दिसंबर को अलसुबह शहर के कई हिस्सों में मावठ की पहली बरसात हुई। (खबर पढ़ें)